पंजाब नेशनल बैंक ने खोली मोदी की नेट बैंकिग की पोल
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्वरोजगार के लिए पंजाब नेशनल बैंक से महज साढ़े पांच लाख रुपये लोन का आवेदन करने वाले 45 प्रतिशत दिव्यांग बेरोजगार नरेश चंद शाह को भ्रष्ट बैंक प्रबंधन दो महीने से दौड़ा रहा है। उनकी लोन राशि 25 जुलाई को ही स्वीकृत हो गई थी लेकिन बैंक के प्रबंधक महोदय रकम उनके खाते में ट्रांसफर नहीं कर रहे, बीते करीब तीन सप्ताह से प्रबंधक महोदय बैंक नेटवर्क में तकनीकी समस्या होना बता कर उन्हें चक्कर कटवा रहे हैं।
पीडि़त ने अपनी समस्या बैंकिंग लोकपाल, प्रधानमंत्री, पंजाब नेशनल बैंक के चेयरमैन और राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम (एनएचएफडीसी) से भी की लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है। नरेश चंद शाह के अनुसार उन्होंने एनएचएफडीसी की योजना के तहत रोजगार की नीयत से एक कॉमर्शियल कार के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एनआईटी नेहरू ग्राउंड स्थित मुख्य शाखा में 5 लाख 55 हजार का लोन अप्लाई किया था। सारे दस्तावेज लगाने के बाद लाल फीताशाही के माहिर बैंक वालों ने आय प्रमाण पत्र और उद्योग आधार बनवा कर लाने को कहा। जानकार बताते हैं कि उद्योग आधार एमएसएमई उद्योग लगाने वालों को दिया जाता है, कार लोन के लिए उद्योग आधार की जरूरत नहीं होती।
बावजूद इसके नरेश चंद ने उद्योग आधार और आय प्रमाण पत्र बनवाए जिसमें उनके करीब दो महीने खराब हो गए। उन्होंने ये दस्तावेज भी लगा दिए तो बैंक वालों ने, ऑडिट चल रहा है पंद्रह दिन बाद आना कहकर टरका दिया। लगातार बैंक जाकर लोन राशि मांगते रहने के कारण अंतत: 25 जुलाई 2025 को उन्हें ईमेल से सूचित किया गया कि उनकी लोन राशि स्वीकृत कर दी गई है। अगले दिन वह कार खरीदने के लिए लोन राशि लेने बैंक पहुंचे तो प्रबंधक ने वेबसाइट में तकनीकी खराबी का हवाला देकर अगले दिन आने को कहा। तब से 25 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं लेकिन तकनीकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके कारण नरेशचंद का लोन भी अटका हुआ है।
नरेशचंद कहते हैं कि कार कंपनी वालों ने कहा था कि यदि तकनीकी दिक्कत के कारण लोन नहीं पास हो पा रहा है तो बैंक वालों से लिखवा कर दे दो कि समस्या सुलझने पर धनराशि जारी की जाएगी तो वो कार दे देंगे, लेकिन बैंक वालों ने यह भी लिख कर नहीं दिया। इधर, देरी के कारण कार कंपनी ने भी रेट बढ़ा दिए। कार कंपनी वालों ने कहा कि जो डिस्काउंट दिया गया था वो कोटेशन उसी माह के लिए लागू था। अब कार की कीमत 20 हजार रुपये बढ़ गई है। उन्हें यह नुकसान तो हुआ ही कार आ जाने से प्रतिदिन करीब दो हजार रुपये की कमाई भी शुरू हो जाती, दो महीनों में वह अच्छी खासी कमाई तो करते ही बैंक की किस्तें भी जा रही होतीं।
बेरोजगारी की हालत में लोन नहीं मिलने के कारण आय नही होने से नरेशचंद का परिवार भुखमरी झेलने को अभिशप्त है, परिवार की हालत देख वह भी अवसाद का शिकार हो गए हैं। बताते हैँ कि दिव्यांग होने के कारण फैक्ट्री में उन्हें नौकरी नहीं मिलती। पहले एक कार थी जिसे ओला उबर के साथ जोड़ कर परिवार चला रहे थे लेकिन आग लगने के कारण वह कार खत्म हो गई। अब नई कार लेकर परिवार चलाना चाहते हैं लेकिन बैंक प्रबंधक बिना कारण देरी करके उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है। दरअसल, बैंकों में लोन देने-दिलाने के गैंग सक्रिय रहते है, यदि इनसे संपर्क किया जाए तो किसी उद्योग आधार की जरूरत नहीं पड़ती, तुर्त फुर्त सारे काम हो जाते हैं, हां इस सबमें लोन लेने वाले को पांच से दस प्रतिशत तक रकम इन दल्लों और उनके जरिए प्रबंधकों को खिलानी पड़ती है। नरेशचंद ने दल्लों को किनारे करते हुए सीधे आवेदन कर दिया।
समझा जा सकता है कि बिना कमीशन काम न करने के आदी प्रबंधक महोदय उसको लोन क्यों नहीं दे रहे हैं। पीडि़त नरेश ने युवाओं के लिए स्वरोजगार की सैकड़ों स्कीमों की घोषणाएं करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सुशासन और पारदर्शिता का ढिंढोरा पीटने वाले सीएम सैनी, बैंकिग लोकपाल तक से शिकायत की है। यदि ई गवर्नेंस और ईज ऑफ डूइंग के युग में भी नरेश को एक छोटे से लोन के लिए महीनों चक्कर लगाने पड़ें तो सरकार की ये सारी योजनाएं झूठ और पाखंड से ज्यादा कुछ नही