फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जनता को इवेंटबाजी में उलझा कर रखने वाली मोदी-सैनी की ट्रिपल इंजन सरकार जिस आरएसएस की पैदाइश है उसके मुताबिक तीन रंग का झंडा अपशगुन होता है, इस नाते इन्होंंने सदैव तिरंगे का विरोध किया है। लेकिन आज मजबूरन जनता को बेवकूफ बनाने और अपने को देशभक्त साबित करने के लिए तिरंगा यात्राएं निकाल रही है। तिरंगा यात्रा का यही पाखंड बीते दिनों एनआईटी एक मार्केट में भी बडख़ल विधायक धनेश अदलखा की अगुवाई में किया गया। अनुशासन, चरित्र, सदाचार का दिखावा करने वाली भाजपा का असली चाल चरित्र चेहरा इस यात्रा में नजर आया, इसमें दल्ला अमित आहूजा विधायक अदलखा का बगलगीर था।
यह वही अमित आहूजा है जिसे विधायक अदलखा ने बदनामी से बचने के लिए अपने पास से भगा दिया था। पाठकों को याद होगा कि खेड़ी गूजरान गांव में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर चलाई जा रही गौशाला की संचालिका मंजू यादव के पास गो सेवा के नाम पर करोड़ो रुपयों की बंदरबांट करने का प्रस्ताव यही अमित आहूजा लेकर गया था। उसने मंजू यादव से कहा था कि वह एक करोड़ रुपये दिलाएगा लेकिन नब्बे लाख वापस करने पड़ेंगे (यानी काला धन सफेद किया जाएगा) बाकी दस लाख रुपयों में सब मिलकर ऐश करेेंगे। यह प्रस्ताव वह विधायक धनेश अदलखा के प्रतिनिधि के तौर पर लेकर गया था। वीडियो वायरल होने पर अदलखा की बदनामी होने लगी तो उसने दुनिया को दिखाने के लिए अपने दल्ले अमित आहूजा को भगा देेने का नाटक किया था।
दरअसल, विधायक बनने से पहले अदलखा भी नगर निगम की वित्त कमेटी के सदस्य, हरियाणा फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष के तौर पर भ्रष्टाचार और लूट कमाई में महारत हासिल कर चुका है। यही वजह है कि दलाली और लूट कमाई करने वाला अमित आहूजा उसका करीबी बन चुका था। बताया जाता है कि अदलखा विधायक बनने के बाद खुद लोगों से वसूली नहीं करता, यह काम उसके लिए दल्लागीरी करने वाला अमित आहूजा ही करता था। मंजू यादव द्वारा वीडियो वायरल किए जाने पर अदलखा ने अमित आहूजा और अल्का भाटिया को दिखावे के लिए दूर कर दिया था, लेकिन कमाऊ दलालों को ज्यादा दिन न तो दूर रख सकता था और न ही नाराज। इतनी बदनामी होने के बावजूद अदलखा के इशारे पर सीएम सैनी ने अमित आहूजा को ग्रीवांस कमेटी का सदस्य बना दिया। इसी तरह अल्का भाटिया भी अदलखा के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होने लगीं।
बताया जा रहा है कि खुद को देशभक्त और सदाचारी दिखाने के लिए रंगे सियार की तरह अमित आहूजा ने तिरंगा यात्रा का सहारा लिया। मन में लूट पाट और हरामखोरी के जज्बात लेकिन हाथ में तिरंगा लेते ही देशभक्त बने आहूजा को आका अदलखा ने भी सार्वजनिक रूप से गले लगाकर संदेश दिया कि वह तिरंगे की आड़ में देश और जनता को लूटने वालों के साथ हैं।