फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अवैध ढंग से बसने के इल्जाम में एक ओर जिला प्रशासन आजादी से पहले बसे गांवों को उजाडऩे की कवायद कर रहा है दूसरी ओर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम एयरफोर्स स्टेशन के प्रतिबंधित सौ मीटर के दायरे में विकास कार्य कराने जा रहा है। प्रतिबंधित इलाके में नागरिक सुविधाएं विकसित करने से उस क्षेत्र में अवैध कब्जा करने वालों या जमीन खरीदने वालों को प्रशासन हतोत्साहित कर रहा है या प्रोत्साहन दे रहा है? रक्षा मंत्रालय और न्यायालय के रुख से तय है कि देर सबेर सौ मीटर का दायरा खाली करवाना ही पड़ेगा, जब ऐसा है तो यहां पर नागरिक सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करना भी जनता के टैक्स की बर्बादी ही होगी।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार डबुआ एयरफोर्स स्टेशन की चारदिवारी के सौ मीटर दायरे में सीवर लाइन, पाइप लाइन और सड़क निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए एक करोड़ साठ लाख रुपये का बजट मंजूर किया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेता और हरामखोर अधिकारियों की देखरेख में इस प्रतिबंधित इलाके में 2018 के सर्वे के अनुसार 2900 मकान और 400 वर्कशॉप खोली जा चुकी थीं। सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील इलाके में इतने बड़े पैमाने पर न केवल अवैध रूप से निर्माण किए गए बल्कि बिजली महकमे ने भी प्रतिबंधित एरिया जानते हुए भी दिल खोल कर बिजली कनेक्शन बांटे। नगर निगम कहां पीछे रहता इसके अधिकारियों ने अवैध रूप से सीवर लाइन और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कर दी। यह सब देख कुछ जागरूक नागरिकों ने 2011-12 में फरीदाबाद और गुडग़ांव एयरफोर्स के प्रतिबंधित इलाके को खाली कराने की जनहित याचिका हाईकोर्ट में डाली थी। 24 मई 2018 को तो हाईकोर्ट ने सरकार को बीस दिन में पॉलिसी बना कर सौ मीटर दायरा खाली करवाने के निर्देश भी जारी किए थे।
रक्षा मंत्रालय भी प्रतिबंधित सौ मीटर क्षेत्र में आबादी बढऩे से एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा को लेकर कई बार चिंताएं जता चुका है। सूत्रों के अनुसार फरवरी 2025 में नगर निगम और विधायक सतीश फागना के साथ हुई बैठक में एयरफोर्स अधिकारियों ने अवैध पार्किंग के कारण रास्ता बंद होने, मकान-दुकान और वर्कशॉपों द्वारा बहाया जाने वाला गंदा पानी स्टेशन के मुख्य द्वार से लेकर चारदिवारी के आसपास जमा होने की शिकायत की थी। अधिकारियों ने सबसे ज्यादा आपत्ति सीवर की गंदगी एयरफोर्स स्टेशन में पहुंचने और इसके कारण बीमारियां पनपने पर जताई थीं। बैठक में नगर निगम अधिकारी और विधायक सतीश फागना राष्ट्रहित के मुद्दे एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा को दर किनार कर जनहित के नाम पर सौ मीटर के दायरे में रहने वाले अपने चंद चेले चपाटों की खैरख्वाही करते नजर आए थे। बताया जाता है कि एयरफोर्स अधिकारियों ने विधायक और निगम अधिकारियों की सिफारिश मानते हुए एयरफोर्स स्टेशन को जाने वाली मुख्य सड़क के दोनों ओर के नाले साफ करवाने, सीवर लाइन और पेयजल लाइन डलवाने की सहमति जताई थी। सूत्र बताते हैं कि एयरफोर्स अधिकारियों का स्पष्ट आदेश था कि कोई भी विकास कार्य जमीन से ऊपर नहीं किया जाएगा। वोट बैंक के भूखे विधायक और उसके चेले निगम अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की थी। सूत्र कहते हैं कि बैठक में जो सहमति बनी थी उसके आधार पर केवल मुख्य मार्ग की ही मरम्मत की जाएगी, सीवर लाइन और पाइपलाइन डाली जाएगी। लेकिन निगम के खाऊ अधिकारियों ने जानबूझ कर सौ मीटर दायरे में गलियों तक सारी नागरिक सुविधाएं पहुंचाने की साजिश रच डाली है। बताया जा रहा है कि एक करोड़ साठ लाख रुपये से प्रतिबंधित क्षेत्र की आबादी की सड़कों बनाई जाएंगी, पाइप लाइन बिछाई जाएगी। कठोर शर्त है कि जमीन के ऊपर कोई भी विकास कार्य नहीं होगा, जब पाइपलाइन बिछाई जाएगी तो उसका कनेक्शन तो जमीन के ऊपर ही दिया जाएगा। इसी तरह प्रतिबंधित इलाके में सड़क भी नहीं बनाई जा सकती लेकिन निगम के अधिकारी ये कारनामा भी करने जा रहे हैं।
बेशक, सरकारी धन खर्च करके विकास कार्य तो किया जा रहा है लेकिन यह सब इस बात को ध्यान में रख कर किया जा रहा है कि इसे किसी भी वक्त हटाने अथवा ध्वस्त करने का आदेश भी कहीं न कहीं से आ सकते हैं। इसी के मद्देनजर उक्त कार्यों में घटिया से घटिया सामग्री व कामचलाऊ काम किया जाएगा। जाहिर है इसके फलस्वरूप लूट कमाई के रूप में चोर अफसरों व धोखेबाज नेताओं को अच्छा खासा माल मिलना तय है।