राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट : चोरों को पड़ गए मोर

राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट : चोरों को पड़ गए मोर
June 02 14:13 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) गोमाता भाजपाइयों के लिए हमेशा ही फायदे का सौदा रही है। गाय-गोबर-गोमूत्र के बल पर सत्ता हासिल करने के बाद अब यही भाजपाई गोमाता के नाम पर की जा रही लूट कमाई हड़पने और कब्जा करने के लिए आपस में ही भिड़ पड़े हैं। खेड़ी गूजरान में ग्राम समाज की जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा कर गोशाला चला रही कथित गोसेविका मंजू यादव को हटा कर बडख़ल विधायक भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा के चेले अमित आहूजा और अल्का भाटिया गुट कब्जा करने के पैंतरे चल रहे है। जाहिर है कि यह सारा खेल लूट कमाई के हथकंडों में माहिर धनेश अदलखा के इशारे पर हो रहा है, क्योंकि कब्जा होने के बाद इसी गोशाला में दान के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूलियां की जाएंगी।

एनआईटी विधानसभा क्षेत्र स्थित खेड़ी गूजरान गांव में शहर की मंजू यादव नाम की महिला ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर पिछले दो-ढाई साल से राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट नाम से एक गौशाला चला रही हैं। जानकारी के अनुसार उनकी गौशाला का पंजीकरण हरियाणा गो सेवा आयोग में नहीं है। विधायक धनेश अदलखा और उसके उक्त चेलों की नजर गौशाला की करोड़ों रुपये की जमीन और उससे होने वाली कमाई पर पड़ गई और फिर इस पर कब्जेदारी का चक्रव्यूह बनाया गया। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मंजू यादव को लालच देकर अपने जाल में फंसाने के लिए ढाई- तीन महीने पहले अदलखा गिरोह, पूर्व मेयर सुमनबाला आदि पहुंचे। समझा जा सकता है कि बिना फायदा दिखे मंजू किसी को ट्रस्ट में नहीं जोड़ती। इसलिए सबसे पहले धनेश अलदखा ने गोशाला को पांच लाख रुपये दान देने की घोषणा कर दी।

विश्वास जमते ही अमित आहूजा ने मंजू को बहुत बड़ा ऑफर दिया कि वह गौशाला को हर चौथे महीने एक करोड़ रुपये का दान दिलाएगा, साथ ही शर्त रख दी कि इस एक करोड़ में दस लाख तुम्हारे होंगे जिसमें गौशाला का खर्च भी होगा बाकी नब्बे लाख रुपये हमारे । 21 लाख का एक दानदाता तो तुरंत ही तैयार खड़ा है बताया। दान के रुपये ठिकाने लगाने के गुर भी बताए कि घीया दस रुपये का आता है लेकिन उसका साठ रुपये का पक्का बिल दिलाएगा।

समझने वाली बात यह है कि अमित आहूजा या अल्का भाटिया की इतनी औकात नहीं है कि वह हर चार महीने में एक करोड़ की व्यवस्था कर सकें, उनके पीछे ज़रूर भ्रष्टाचार के महारती धनेश अदलखा जैसे हरामखोर का दिमाग होगा। संदर्भ वश सुधी पाठकों को बताते चलें कि फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन रहते हुए धनेश अदलखा बी फार्मा, डी फार्मा अभ्यर्थियों के पंजीकरण या रिन्यूअल के नाम पर अभ्यर्थियों से 21 हजार, 11 हजार रुपये रिश्वत लेता था। लेकिन यह रिश्वत सीधे नहीं ली जाती थी बल्कि अभ्यर्थियों से गोवंश सेवा धाम पंचकूला या अखिल भारतवर्षीय श्री सनातन धर्म महाबीर नाम की संस्था के फरीदाबाद स्थित बैंक खाते में जमा करवाई जाती थी। अब पाठक समझ गए होंगे कि अमित आहूजा क्यों कह रहा था कि हर चौथे महीने ट्रस्ट के खाते में एक करोड़ का इंतजाम करवा देगा और उसमें से नब्बे लाख रुपये वापस उसको देने पड़ेंगे। अमित आहूजा विधायक धनेश अदलखा का दाहिना हाथ है और अदलखा तो रिश्वत की काली कमाई सफेद करने की शातिराना चाल का प्रदर्शन फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन रहते हुए कर ही चुका है।

खैर, हर चौथे माह एक करोड़ की लालच में आईं मंजू यादव ने खुशी-खुशी इन लोगों को ट्रस्ट का सदस्य बनने की हामी भर दी। हालांकि मंजू यादव कहती हैं कि इन लोगों ने कई संस्थानों में पंजीकरण और फंड दिलाने का धोखा देकर उनसे ट्रस्ट के दस्तावेज झटक लिए और फिर फर्जी ढंग से खुद को इसका सदस्य बनाने का प्रयास किया। सच्चाई जो भी हो, मंजू यादव जल्द ही विधायक धनेश अदलखा के पांच लाख रुपये सहित एक करोड़ रुपये आने का इंतजार कर रही थीं। करीब पंद्रह दिन पहले उनके शुभचिंतकों ने सूचना दी कि अल्का भाटिया, अमित आहूजा और संगीत यादव उन्हें अध्यक्ष पद से हटा कर गोशाला और ट्रस्ट पर कब्जा करने जा रहे हैं। मंजू यादव को गोशाला के नाम पर कब्जाई गई करोड़ों की जमीन और दान, अनुदान के रूप में आने वाली मोटी रकम हाथ से निकलने का डर सताया तो छटपटाने लगीं। उन्होंने विधायक धनेश अदलखा से शिकायत की। उन्हें क्या मालूम था कि सारे खेल के पीछे तो मास्टर गोगो खुद ही है। अदलखा ने अल्का और अमित से इस्तीफा दिलवाने का आश्वासन देकर उन्हें चलता कर दिया।

इधर मंजू यादव भ्रष्टाचारी विधायक का आश्वासन मिलने पर फूले नहीं समा रही थीं उधर अदलखा के चेलों ने उन्हें पदच्युत करने का फरमान भी जारी कर दिया। अल्का भाटिया ने खुद को ट्रस्ट का महा सचिव बताते हुए 26 मई को पत्र जारी कर दिया। पत्र में ट्रस्ट के सभी सदस्यों को 5 जून को उनके आवास 3ए/154 एनआईटी में बैठक में शामिल होने का न्यौता दिया गया था। कारण बताया गया था कि ट्रस्ट के प्रबंधन में गंभीर गड़बडिय़ां सामने आई हैं और इनके लिए वर्तमान अध्यक्ष मंजू यादव जिम्मेवार हैं। इसलिए बैठक में गौशाला की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, मंजू यादव को अध्यक्ष पद से हटा कर किसी नए अध्यक्ष की तैनाती की जाएगी। सबसे खास बैंक खाते का संचालन के संबंध में प्रस्ताव पास करना। पाठकों को बता दें कि वर्तमान में ट्रस्ट के बैंक खाते का संचालन मंजू यादव के हस्ताक्षर से होता है। रकम हड़पनी हो या हेराफेरी करनी हो इसके लिए बैंक खाते पर होल्ड होना जरूरी है, इसीलिए अदलखा गिरोह ने बैंक खाते के संचालन भी अपने हाथ में लेने का खेल रचा है।

अल्का भाटिया ने यह पत्र सोशल मीडिया पर डाल कर विवाद को चर्चित कर दिया। मंजू यादव इतनी आसानी से हार कहां मानतीं, 27 मई को उन्होंने भी पत्र जारी किया और अल्का भाटिया द्वारा बुलाई गई बैठक को गैर कानूनी बताया। कारण बताया कि बैठक के लिए अध्यक्ष से अनुमति नहीं ली गई। उन्होंने 30 मई को गोशाला प्रांगण में बुलाने की घोषणा की। हालांकि मंजू यादव मौखिक रूप से अल्का भाटिया और अमित आहूजा के ट्रस्ट का सदस्य या पदाधिकारी होने से इनकार करती हैं लेकिन अपने पत्र में उन्होंने उनकी सदस्यता को लेकर कोई खंडन नहीं किया है।

प्रकरण तो पूरा एनआईटी विधानसभा यानी सतीश फागना के क्षेत्र का है तो वो भी कैसे पीछे रहते। सूत्र बताते हैं कि उनके भाई कविंद्र चौधरी भी गोशाला कब्जाने की तरकीबें लगाने लगे हैं । भाजपा सूत्रों के अनुसार यदि कविंद्र को लगा कि अदलखा और उसके चट्टे बट्टे भारी पड़ रहे हैं तो वह ग्राम समाज की जमीन खाली करवा कर गोशाला ही खत्म करा देंगे। कुल मिला कर सारे भाजपाई गोमाता की नहीं गोमाता के नाम पर लूट कमाई की रकम खुद हड़पने के लिए आमने सामने हैं, चंद दिनों में सामने आएगा कि कौन भाजपाई गोमाता की कमाई खाएगा।

गोशाला की आड़ में संरक्षित अरावली में अवैध कब्जा शुरू
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पीएलपीए संरक्षित अरावली में किसी भी तरह की गैर वानिकी गतिविधि पूर्णतया प्रतिबंधित होने के बावजूद अनखीर में अवैध रूप से करीब 16 एकड़ रकबे पर कब्जा किया जा रहा है। गाय-गोबर-गोमूत्र वाली सरकार इस अवैध कब्जे पर कार्रवाई न करे इसलिए नाम दिया गया है श्रीराम गौशाला। गौशाला का जो बोर्ड लगा है उस पर संचालक का तो कोई नाम नहीं है लेकिन अधिकारी के रूप में सुरेश कुमार सोमानी का नाम दिया हुआ है।

संरक्षित वन क्षेत्र में बन चुकी गोपाल गौशाला से करीब तीन सौ मीटर और अंदर अरावली की प्राकृतिक वनस्पति को उजाड़ कर श्री राम गोशाला का निर्माण पूरी गति से चालू है। संघी मानसिकता से संचालित ट्रिपल इंजन सरकारों की मंशा के अनुरूप वन विभाग के अधिकारी भी भाजपा के राजनीतिक भगवान का नाम देख कर इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। केवल नाम देख कर ही वह बिदक रहे हों ऐसा भी नहीं है, इस काम में बाधा न डालने के लिए उन अधिकारियों का ऊपर से निर्देशित होना स्वाभाविक लगता है।

बताते चलें कि बडख़ल विधायक धनेश अदलखा ने बीते विधानसभा सत्र में ही सदन में अरावली संरक्षित वन क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण और कब्जों को हटाए जाने की सरकार से मांग का पाखंड किया था। सब जानते हैं कि बीते 11 साल की डबल इंजन की भाजपा सरकारों में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर, मंत्री विपुल गोयल, सीमा त्रिखा और उनके चहेतों ने अरावली में जमकर अवैध कब्जे और निर्माण किए-कराए। अनेक भाजपाई या तो खुद किसी न किसी मैरेज लॉन, फार्म हाउस का संचालन कर रहे हैं या सत्तापक्ष की शह पर लूट कमाई में जुटे हैं।

अदलखा को जानने वालों के मुताबिक विधायक ने अरावली में अवैध निर्माण हटवाने की मांग पर्यावरण संरक्षण हिमायती होने के लिए नहीं की थी बल्कि वह भी गूजर, त्रिखा, भड़ाना की तरह इस अकूत प्राकृतिक संपदा में फार्म हाउस, मैरेज लॉन या गौशाला किसी भी नाम पर कब्जा करना चाहता है। पाठकों को याद होगा कि विपुल गोयल ने भी अनखीर में बड़ा फार्म हाउस बना रखा था लेकिन सत्ता से हटते ही चिर प्रतिद्वंदी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारे पर उसे तुड़वा दिया गया था।

सत्ता में लौटने के बाद विपुल गोयल ने उस फार्म हाउस का दोबारा निर्माण करा केंद्रीय मंत्री गूजर को अपनी बढ़ती ताकत का अहसास करा दिया है। वैसे अदलखा भी है तो गूजर का ही चेला लेकिन जब से उसने विधायकी जीती है गूजर से कन्नी काट कर अपना साम्राज्य खड़ा करने की जुगत में जुटा है। इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि यह श्रीराम गौशाला अदलखा या किसी सत्तापक्ष के नेता की सहमित से बनाई जा रही हो।

मंजू का गौशाला कारोबार
गो सेवा की आड़ में करोड़ों रुपयों की सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए मंजू यादव खुलेआम लूटमार करने से बाज नहीं आतीं। उनकी इसी लूटमार का शिकार एक पीडि़त ने मज़दूर मोर्चा को बताया कि मंजू यादव और उसके गुर्गे सड़क पर घायल गायों को बैठाकर उधर से गुजरने वाले वाहन चालकों को टक्कर मारने का आरोप लगा कर पकड़ लेते हैं। मुकदमे से बचने के नाम पर सौदेबाजी होती है। करीब चार महीने पहले पीडि़त अपनी कार सेे उधर से गुजर रहा था, मोड़ आते ही सड़क के बीचोंबीच एक घायल गाय पड़ी देखी तो ब्रेक मार कर रुक गए। वह उतर कर गाय को एक किनारे करते कि चार छह लोगों ने घेर लिया और उन पर ही टक्कर मारने का आरोप लगाकर कार थाने ले चलने पर जोर देने लगे।

आखिर में मंजू यादव आईं और गोशाला में दान करने को कहा। उन्होंने नकद देने से इनकार किया तो गायों के लिए शेड डलवाने या इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछवाने को कहा। उन्होंने सहमति दे दी। जब गोशाला पहुंचे तो पता चला कि शेड डालने में बीस लाख से अधिक का खर्च है, इंटरलॉकिंग टाइलें भी 22 से 25 लाख में लग रही थीं। उन्होंने माफी मांगते हुए मंजू यादव से कहा कि वो पुलिस केस दर्ज करवा दें, मैं मुकदमा लड़ लूंगा, आखिर में बीस हजार रुपयों में सौदा तय हुआ।

 

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Mazdoor Morcha
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