फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लीडर से डीलर बने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का चेला बडख़ल विधायक धनेश अदलखा उनका राजनीतिक शार्प शूटर बन कर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल पर हमले कर रहा है। वह खुद को बेहतर साबित करने की होड़ में विपुल गोयल के शहरी स्थानीय निकाय और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभागों में होने वाले भ्रष्टाचार पर खुलेआम बयानबाजी कर मंत्री और सरकार को नंगा करने में जुटा है। उसके बयानों से जनता में यह संदेश जा रहा है कि विपुल गोयल का अपने मंत्रालय पर कोई नियंत्रण नहीं है जबकि धनेश अदलखा उनके भ्रष्टाचारी अधिकारियों को काबू करने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि जानकार उसकी यह सारी कवायद बिल्डर लॉबी, भूमाफिया पर दबाव बनाकर मोटा नजराना ऐंठने की चाल के रूप में देख रहे हैं।
अदलखा इन दिनों अपने विधानसभा क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने का पाखंड कर रहा है। यह सच किसी से छिपा नहीं है कि भाजपा के लगभग ग्यारह साल के कार्यकाल में सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में बडख़ल विधानसभा ही नहीं, लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सीएलयू, सब डिविजन आदि मानकों को खुलेआम तोड़ा गया और अवैध निर्माण किए गए। अब अदलखा इन अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहा है। बीते दिनों उसने बयान दिया कि बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में सरकार की पॉलिसी के तहत केवल स्टिल्ट प्लस तीन मंजिल वाली वाली ही इमारतें रहेंगी, बाकी सबको तोड़ दिया जाएगा। इसके लिए अदलखा खुद बाकायदा एनआईटी, एक, दो, तीन और पांच में भ्रमण कर अवैध भवनों को चिह्नित कर रहा है।
इन अवैध निर्माणों के पीछे उसने विपुल गोयल के दोनों विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार का खुलेआम खुलासा किया। सोशल मीडिया चैनलों पर उसने कहा कि उसे मालूम है कि यहां अवैध निर्माण के कितने कॉकस (गिरोह) काम कर रहे हैं। नगर निगम के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए कहा कि यहां एक कॉकस 233 गज के प्लॉट के दो टुकड़े कर चार फ्लोर बनाता है। यहीं सक्रिय दूसरा कॉकस है जो इन फ़्लैटों की प्रॉपर्टी आईडी बनवाता है। तीसरा कॉकस इन फ़्लैटों को सीवर-पानी का कनेक्शन दिलवाने का काम करता है। राजस्व विभाग में सक्रिय कॉकस प्रति फ्लैट एक लाख रुपये इन फ़्लैटों की रजिस्ट्री करवाता है। मंत्री विपुल गोयल के मंत्रालयों का भ्रष्टाचार उजागर करने के बाद कहता है कि बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में अब यह नहीं चलेगा। बडख़ल के अंदर यदि नॉम्र्स नहीं चलेंगे तो ऐसे सारे अवैध निर्माण तोड़ दिए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के साथ रहकर उसके लिए जमीन की खरीद-फरोख्त, कब्जे आदि करने की कला में महारत हासिल करने वाले अदलखा को बहुत पहले से सारे गोरखधंधे पता हैं। जानकार कहते हैं कि बीते दस-ग्यारह साल में जो भी अवैध निर्माण किए गए हैं वो सत्ता में बैठे विधायक-मंत्रियों के इशारे पर ही हो सके। जाहिर है कि विधायक-मंत्रियों ने मुफ़्त में तो करोड़ों की संपत्ति बनाने बेचने की सहमति दी नहीं होगी, उन्होंने भी दूध की मोटी मलाई खाई। बिल्डरों-भूमाफिया के बीच पूर्व बडख़ल विधायक सीमा त्रिखा का यह बयान खूब दोहराया जाता था कि तीन प्लॉटों पर कब्जा करो, दो तुम्हारे-एक मेरा। सीमा त्रिखा की शह पर पूरे एनआईटी इलाके में जमकर अवैध निर्माण हुए, सीएलयू-सबडिविजन आदि नियमों को ताक पर रख कर निर्माण किया गया। सीमा त्रिखा के कार्यकाल में कराए गए इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का पाखंड कर अदलखा दबाव बना रहा है कि तोडफ़ोड़ रुकवाना है तो मुझे भी चढ़ावा चढ़ाया जाए।
शातिर अदलखा को मालूम है कि एनआईटी एक, दो, तीन, पांच, दयाल बाग, सैनिक कॉलोनी सहित अन्य जगहों पर 180 गज से कम प्लॉट में अवैध रूप से बिल्डर फ्लैट बनाकर फ्लोरवार रजिस्ट्री हो रही है, इसमें बिल्डर बहुत मोटा पैसा कमा रहे हैं। अब बनाना है तो नगर निगम, तहसील के साथ नई सत्ता को भी चढ़ावा चढ़ाना होगा। उसे भी मालूम है कि तोडफ़ोड़ होना लगभग नामुमकिन है क्योंकि अधिकतर अवैध निर्माण भाजपाइयों द्वारा कराया गया है। तोडफ़ोड़ होते ही सब पार्टी आला कमान तक पहुंच जाएंगे। ऐसे में इन निर्माणों का राजनीतिक और आर्थिक लाभ लिए जाएं। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल कद में पहली बार विधायक बने धनेश अदलखा से कहीं बड़े हैं लेकिन अदलखा को केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का वरद्हस्त प्राप्त है। एक ओर जहां, विपुल गोयल जिले में तेजी से पांव पसार रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री की राजनीति खड़ंजों व नालियों के उद्घाटन तक सीमित रह गई है। इन दोनों के बीच प्रतिद्वंदिता किसी से छिपी नहीं है। इस परिस्थिति कों भ्रष्टाचारी, घाघ धनेश अदलखा ने अपना राजनीतिक रसूख बढ़ाने के लिए लपक लिया। गुरु गूजर के शार्प शूटर की तरह विपुल गोयल पर निशाना साध रहा है। अब देखना यह है कि विपुल गोयल अपने मंत्रालय के विभागों में जारी भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर अदलखा को जवाब देंगे या फिर वह भी भाजपाइयों की लूट कमाई की रीति-नीति पर चलते नजर आएंगे।
सोने के बिस्कुट खाने वाली निगमायुक्त को सब है पता ! विधायक धनेश अदलखा ने जिस तरह नगर निगम के सर्वे, तोडफ़ोड़, प्लानिंग आदि विभागों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है उससे साफ है कि इनमें बैठे अफसरों ने अवैध निर्माण में बहुत मोटी कमाई की। जाहिर है कि जेई, एसडीओ जैसे अदना अधिकारी यह सारी रकम अकेले हजम करने की न तो हिम्मत रखते हैं, न ही औक़ात। ये बेचारे तो निगम में बैठे आला अधिकारियों के कलेक्शन एजेंट से ज्यादा कुछ नहीं। जिनका काम आला अधिकारियों के इशारे पर अवैध निर्माण कराना और निर्माणकर्ता से मोटी रकम वसूल कर आक़ाओं तक पहुंचाना है, हां ये अधिकारी इसमें उन्हें भी एक-आध टुकड़ा डाल देते हैं जो उनके वेतन से भी कहीं ज्यादा होता है। समझा जा सकता है कि सबसे बड़ा हिस्सा सोने के बिस्कुट खाने की शौकीन और पांच लाख का लहंगा पहनने वाली निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास तक पहुंचता होगा, जिससे उनके शौक तो पूरे होते हैं और निगम के भ्रष्ट अधिकारियों की महीने भर की तनख्वाह भी पूरी की पूरी बच जाती है।