अजन्मे बच्चे का बाबा वागेशबर के लिए खत

अजन्मे बच्चे का बाबा वागेशबर के लिए खत
April 30 17:12 2025

हरप्रीत कौर

मुझे मोक्ष नहीं मिला बाबा
मैं अपनी आत्मा पर तुम्हारे शब्दों की लताड़ महसूस कर रहा हूँ
लतड़ते हुए तुम्हारे शब्द मेरी कंठ नली को चीरते हुए आर- पार हो रहे हैं

मैं माँ के पेट में बस लेटा हुआ था
पिछले कुछ माह से माँ तो नियमित सुनती थी तुम्हारी कथा
माँ के साथ-साथ मैं भी सुनता रहता था
सुना है पर्चियाँ निकलती थीं तुम्हारे हाथ से
मैं और माँ जिंदा होते तो जरूर एक बार आते

भागते हुए लोग भूल जाते हैं पाप पुण्य
उन्हें नहीं दिखती बंधी हुई रस्सियां
रुकने के लिए लगे हुए चिन्ह

आगे बढऩा ही है सबसे बड़ा पुण्य है
तुमसे बेहतर कौन जानता होगा!

रस्सी से बंधी माँ और मैं दोनों लताड़े गए
चढ़ते हुए लोगों के पैर पाप से लिथड़े हुए थे
कभी किसी का थुलथुल शरीर कभी किसी के पैरों की हड्डियाँ
लाखों करोड़ों बार हमे लताड़ती रही

जब कई लोग फिर से मोक्ष द्वार से कपड़ों से भरी गठरियाँ सिर पर लादे
गंगा माँ को बस एक बार देख लेने की इच्छा से भरे हुए दौड़े ही चले आ रहे हैं
मैं सोच रहा था माँ ने सबसे बड़ा पाप क्या किया होगा
यकीन मानो मुझे एक भी याद ना आया

कराहती हुई माँ के अंतिम शब्दों में भी किसी के लिए कोई गाली नहीं थी
कितना कम खाती थी माँ कभी ऊंची आवाज में बोलती भी ना थी
सबसे बड़ा पाप जो दुनिया में माना जाता है
हमारे पुरखों में भी किसी ने नहीं किया

अगर मैं बोल पाता उस रात
तो वे सब पुण्य गिनाता जो मेरी माँ,बाबा और पुरखों ने किए थे
बताता तुमको कि कैसे एक चमकती हुई उजली रात में
उसने मेरी बहनों को अकेले जन्म दिया था
कितना कर्ज लिया था उसने
कितने सपने थे उसके
कितनी जमीन थी उसके पास
कितना सूद लिया था उसने
किसी दूर के रिश्तेदार से हजार दो हजार लेकर कैसे की थी उसने यह यात्रा

उसकी लाश के पास जाओ
देखो उसके पेट के बीचों बीच लताड़ से मरी मेरी देह कितनी पाप मुक्त थी

कैसे फूल गया है उसका चेहरा
हो सके तो उससे माफी जरूर मांगना
उसने कभी कोई पाप नहीं किया सपने में भी नहीं

मैं अपनी आत्मा पर तुम्हारे शब्दों की लताड़ महसूस कर रहा हूँ
जो उन लाखों करोड़ों पैरों से ज्यादा चोटिल है
मुझे कोई मोक्ष नहीं मिला बाबा

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