फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम ने बीते मंगलवार बडख़ल-गुडग़ांव रोड पर अवैध रूप से बसी जमाई कॉलोनी में मस्जिद समेत करीब डेढ़ सौ इमारतों को तोड़ डाला। कार्रवाई का कारण सर्वाेच्च न्यायालय का आदेश बताया गया। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश तो अरावली संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए अवैध मैरिज लॉन, फार्म हाउस को तोड़े जाने का भी था, लेकिन इनमें सत्ता पक्ष मंत्री विपुल गोयल और विपक्ष के कैलाश बैंसला के अवैध मैरिज लॉन के साथ अनेक आईएएस अधिकारियों, उनके रिश्तेदारों के फार्म हाउस आते हैं इसलिए हमेशा की तरह उनकी अनदेखी की गई।
जानकार निगम की इस कार्रवाई को विरोधी वोट बैंक को सबक सिखाने की संघ-भाजपा की रणनीति के तौर पर देख रहे है। उनके अनुसार जमाई कॉलोनी में अधिकतर आबादी मुसलमानों की है और ये परंपरागत रूप से कांग्रेसी महेंद्र प्रताप के वोट बैंक हैं। लोकसभा, विधानसभा के बाद अब स्थानीय निकाय चुनाव भी समाप्त हो चुके हैं और ट्रिपल इंजन की सरकारें हैं। संघ-भाजपा की नफरती राजनीति और दुष्प्रचार से मुसलमानों को सामाजिक रूप से हाशिए पर पहुंचाया जा रहा है अब आर्थिक रूप से तोडऩे के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। केंद्र में मोदी सरकार वक्फ कानून लेकर आई तो राज्यों में भी विरोधी वोट बैंक को सबक सिखाने के लिए बुलडोजरराज चालू हो गया है।
जानकारों के अनुसार जमाई कॉलोनी में सिर्फ मुसलमान ही अवैध रूप से नहीं रह रहे हैं काफी मात्रा में हिंदू भी कब्जा किए हुए हैं। यहां तक कि काफी बड़ी जमीन घेर कर एक स्कूल भी अवैध रूप से चलाया जा रहा है। नगर निगम ने मंगलवार को जो अवैध निर्माण गिराए लगभग सारे के सारे मुसलमानों के थे, जबकि यहां बहुसंख्यकों के भी अनेक अवैध निर्माण और कब्जे हैं उन्हें छोड़ दिया गया, इसका कारण बड़ा साफ है वो भाजपा का वोट बैंक है।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि मंत्री विपुल गोयल ने अपने पहले मंत्रित्व काल में सत्ता का दुरुपयोग करते हुए अनखीर में पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में राधास्वामी मंदिर के सटी हुई जमीन पर 11 एकड़ में शानदार फार्म हाउस बना डाला था, तब भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश था लेकिन प्रशासन उसे तोडऩे की हिम्मत नहीं जुटा सका था। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से प्रतिद्वंदिता उन्हें महंगी पड़ी थी, गूजर ने पहले तो उनका टिकट कटवाया, सत्ता से बाहर करवाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में उनका फार्म हाउस तुड़वा दिया गया था। अब गोयल फिर से सत्ता में हैं तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्रशासन के ठेंगे पर है, धड़ल्ले से मज़बूत अवैध निर्माण चल रहा है। इतना ही नहीं वर्तमान में कांग्रेसी कैलाश बैँसला कभी मंत्री गूजर के करीबी थे और उनके संरक्षण में अरावली पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में उनका फार्म हाउस बना डाला गया। मज़दूर मोर्चा विभिन्न अंकों में सत्ता के संरक्षण में होने वाले इन निर्माणों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मखौल उड़ाए जाने की खबरें प्रकाशित कर चुका है।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का रास्ता निकाल लिया है। जब भी सुप्रीम कोर्ट सख्ती करे तो जमाई कालोनी या खोरी में अभियान चला कर कार्रवाई रिपोर्ट लगा दी जाती है, सत्ता सुख भोगने वाले नेता, प्रशासनिक अधिकारियों के अवैध निर्माण को इसकी आड़ में बचा लिया जाता है।