यूसुफ किरमानी प्यारे दोस्तों, वक्फ की फिक्र मत करो। इमोशनल होने की ज़रूरत नहीं। न ही बेवजह सड़कों पर उतरो। बिरयानी, शीर कोरमा खाओ और सो जाओ। वक्फ बिल लोकसभा में पास हो गया है। राज्यसभा से भी पास हो जाएगा। लेकिन गोदी मीडिया इसके फायदे गिनाने में जुट गया है। तो, तबर्रुकन (प्रसाद) के तौर पर दो शब्द… क्या आप लोगों को तीन तलाक को लेकर बना कानून याद है। गोदी मीडिया और सरकार ने उसके बहुत फायदे गिनाए थे। जब यह कानून 2019 में लाया गया तो कहा गया था कि मुस्लिम महिलाएं एक बार में तीन तलाक प्रथा से परेशान थीं। जबरदस्त प्रचार हुआ कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं की इच्छा पर लाया गया है।
आज तक यह जानकारी आंकड़ों के रूप में सामने नहीं आई कि उस कानून का फायदा कितनी मुस्लिम महिलाओं को हुआ। उस कानून को लाने वाले अब खुद उस कानून का गुणगान नहीं करते। यही हालत वक्फ संशोधन कानून की है। सरकार यह कह रही है कि वो इसे गरीब मुसलामनों के लिए लाई है। इसका समर्थन करने वाले दावा कर रहे हैं कि इससे मुसलमानों को बहुत फायदा होगा। माफिया राज खत्म हो जाएगा। गोदी मीडिया यही कह रहा है। लेकिन यह महज़ छलावा है। नए वक्फ कानून से भी किसी गरीब मुस्लिम का कोई फायदा नहीं होने वाला है।
2025 में बिहार चुनाव, फिर बंगाल चुनाव 2026 और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस कानून को लाया जा रहा है। इन तीनों राज्यों में मुस्लिमों की घनी आबादी है। वहां उनके वोट चुनावी राजनीति को बाकायदा प्रभावित करते हैं। इस कानून की आड़ में तीनों राज्यों में वोट का खेल होगा। डंडा चलेगा। डराया जाएगा। हालांकि, प्रस्तावित वक्फ कानून से बहुत भारी तबाही भी मचने वाली है। जिस मस्जिद, जिस दरगाह, जिस इमामबाड़े पर सरकार ने हाथ रख दिया या उसके डीएम/डीसी/जिलाधिकारी ने बता दिया कि यह सरकारी जमीन है, वक्फ की नहीं है तो मामला खत्म हो जाएगा। आप अदालतों में लड़ाई लड़ते रहिए। सरकार के तर्क बेमानी हैं।
सरकार ने जो बिल पेश किया और गरीब मुस्लिमों की जो दुहाई दी वो छलावा है। संसद में की गई जुमलेबाजी और वक्फ बिल की हकीकत में जमीन आसमान का फर्क है। भारतीय न्यायपालिका की अभी जो स्थिति है वो बताने की जरूरत नहीं है कि कई जज भी अब भ्रष्ट हो चुके हैं। आदर्शवादी बातें छाटने वाला मुख्य जज रिटायर होने के बाद सांसद बन जाता है, दूसरा मंदिर की घंटी बजाते नजर आता है। फिलहाल हवा और माहौल खिलाफ है। आपके पास इलाज नहीं है। वक्त इलाज करेगा। निराश न हों। फेसबुक इस पोस्ट को रोक देगा। फिर भी मुफ्त में जितने लोग पढ़ लें। वही काफी है।