नगर निगम चुनाव घोषित : धांधली के लिए दस दिन रखे

नगर निगम चुनाव घोषित : धांधली के लिए दस दिन रखे
February 16 07:22 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्थानीय निकायों के चुनाव में होने वाली अपनी हार के भय से भाजपा सरकार गत दो सालों से चुनावों को रोक कर बैठी रही। अब जीत की कुछ सम्भावना को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों की चार $फरवरी को घोषणा कर दी है। इसमें सबसे मजेदार बात यह है कि दो मार्च को मतदान होने के बाद 12 मार्च को मतों की गिनती की जाएगी।

मतदान व मतगणना के बीच 10 दिन का समय रखने का कोई औचित्य बेशक राज्य चुनाव आयोग ने नहीं बताया, लेकिन लोगों का मानना है कि इस दौरान भाजपा सरकार ईवीएम मशीनों में ‘सेटिंग’ करके अपने उम्मीदवारों को जिताने का पुख्ता इंतजाम करेगी। मतलब साफ है कि जनता चाहे किसी को वोट दे-दे लेकिन जीत का $फार्मूला तो ईवीएम मशीनों में ही रहेगा।

कुछ पूर्व पार्षदों से बातचीत करने पर पता लगा कि अब से पहले जितने भी चुनाव हुए उनमें मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद पोलिंग बूथ पर ही मतगणना कर वहीं के वहीं परिणाम घोषित कर दिए जाते थे, जिसे सभी पार्षद स्वीकार भी कर लेते थे। लेकिन अब भाजपा को चुनाव परिणाम तैयार करने में लगने वाला इतना समय केवल इसलिए चाहिए कि वह पूरी तसल्ली से हेरा-फेरी कर सके।

इन चुनावों से पूर्व हुए विधानसभा व लोकसभा चुनावों के परिणाम घोषित करने के लिए भारत के चुनाव आयोग ने, विभिन्न राज्यों में चार से आठ दिन तक का समय तो लिया ही था, इसके अलावा जहां अनेक चरणों में चुनाव हुआ वहां तो इन मशीनों को महीनों तक होल्ड करके रखा गया था। अब होने वाले निकाय चुनावों में भाजपा सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए मशीनों की ‘सेटिंग’ के लिए 10 दिन का समय पर्याप्त समझा गया है।

राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारीअधिसूचना के अनुसार 11 फरवरी को नामांकन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया 17 फरवरी तक चलेगी। उम्मीदवार 19 फरवरी को नाम वापस ले सकेंगे। दो मार्च को मतदान होगा। मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया जाएगा। 12 मार्च को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी, इसके बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। कहने को तो बेशक फरीदाबाद में 14.70 लाख मतदाता शहर की सरकार चुनेंगे लेकिन असल में मोदी द्वारा निर्देशित ईवीएम मशीनें ही यह काम करेंगी।
निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण कर्मचारी और अधिकारियों के तबादले भी नहीं हो पाएंगे। अनुमति लेकर ही तबादले किए जा सकेंगे। सभी उम्मीदवारों को आपराधिक मामलों या किसी अन्य विवाद की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह ब्यौरा समाचार पत्रों में भी प्रकाशित करवाना होगा।

मेयर पद के लिए 10 हजार रुपये और वार्ड पार्षद के लिए तीन हजार रुपये का सिक्योरिटी राशि देनी होगी। उधर, मेयर का चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार 30 लाख रुपये तक चुनाव में खर्च कर सकेंगे। जबकि निगम पार्षद उम्मीदवार साढ़े सात लाख रुपये खर्च कर सकेंगे।

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Mazdoor Morcha
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