फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 62 निवासी दीपक की हत्या के मामले में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के बारह से अधिक निर्दाेष युवकों को अवैध ढंग से आठ दिन तक बंधक बना कर रखा और जुर्म कुबूल करवाने के लिए उन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। पुलिस द्वारा उनके मौलिक अधिकार और मानवाधिकारों का उल्लंघन किए जाने से यह लोग नाराज तो हैं लेकिन भाजपा विधायक मूलचंद शर्मा से न्याय दिलाने की उम्मीद पाले बैठे हैं। मुस्लिम विरोधी राजनीति कर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा के विधायक से न्याय दिलाने की उम्मीद करना वैसा ही है जैसे कि एक मेमना भूखे शेर से जान की सुरक्षा की उम्मीद करे।
दीपक हत्याकांड में हिंदू धर्म के कथित ठेकेदारों के उकसावे और दबाव के कारण पुलिस सेक्टर 62 निवासी फकरुद्दीन, इदरीस, अनवर अजहरउद्दीन, आजाद, सोहेल साबिर, साहिल, गोलू, मोना, आजाद साहिल अकीश, शाहरुख और साबिर को पकड़ कर ले गई थी। परिवार वालों का दावा है कि फकरुद्दीन भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश सचिव है। इतना सब होने के बावजूद इन निर्दाेषों को बिना लिखा पढ़ी आठ दिन तक क्राइम ब्रांच सेक्टर 65 और क्राइम ब्रांच डीएलएफ में बंधक बना कर रखा गया। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष यानी फकरुद्दीन सहित अन्य निर्दाेष मुस्लिम युवकों की आठ दिन तक थर्ड डिग्री खातिरदारी की गई और जब असली मुजरिम यानी करण पकड़ा गया तो पुलिस ने सभी को यह धमकाते हुए छोड़ दिया कि कथित हिरासत और उसमें हुई पिटाई की बात किसी से न करना अन्यथा फिर अंदर कर दिए जाओगे।
पुलिस की पकड़ से छूटते ही फकरुद्दीन सहित अनेक भुक्तभोगी गांव जाने के नाम पर शहर छोड़ कर चले गए लेकिन उनके परिजन अवैध हिरासत और मारपीट किए जाने से रोष में हैं। वह पुलिस पर अवैध रूप से बंधक बनाने और मौलिक व मानवाधिकार का हनन करने का आरोप लगा रहे हैं लेकिन इसके खिलाफ न्यायपालिका या मीडिया में जाने के सवाल पर वह भाजपा नेता मूलचंद शर्मा से इंसाफ दिलाने की उम्मीद कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि इस संबंध में वह जल्द ही विधायक मूलचंद शर्मा से मुलाकात करेंगे, विधायक जो भी हिदायत देंगे उसके अनुसार ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हत्याकांड पर लगातार नजर रखने वाले सेक्टर 62 के एक व्यक्ति ने बताया कि जब ये लोग पकड़े गए थे तो फकरुद्दीन के परिवार वाले विधायक मूलचंद से लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष तक सबके यहां गुहार लगाते रहे लेकिन निर्दोष होने के बावजूद इन लोगों ने उन्हें छुड़वाया नहीं। वह विधायक अब पुलिस के खिलाफ कुछ कार्रवाई करने की बात करेंगे ऐसा सोचना बेमानी है। संदर्भवश बता दें कि डीके बसु केस में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की गाइडलाइन बनाई हुई है। इसके तहत हिरासत या गिरफ़्तार करने वाले पुलिसकर्मी अपने नेमप्लेट वाली पूरी वर्दी में जाएंगे।
गिरफ़्तारी का वारंट या कारण व्यक्ति, उसके परिवार को बताएंगे। पकड़े जाने वाले व्यक्ति को अपने वकील को इसकी सूचना देने का अधिकार है। पीडि़तों की मानें तो खुद को क्राइम ब्रांच से बताने वाले लोग सादे कपड़ों में आए थे और किसी को पकड़े सूचना न दे सकें इसलिए सबसे पहले उनके फोन ही छीने थे। यही नहीं हिरासत में लिए गए व्यक्ति को आने जाने में लगने वाला समय छोड़ कर 24 घंटे के भीतर नजदीक के सक्षम न्यायालय में पेश करना होता है। सभी को आठ दिन तक बंधक बना कर पीटा गया लेकिन किसी भी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया।
विधायक मूलचंद शर्मा को अपना न्यायाधीश मान रहे इन 12 युवाओं के परिवार वालों को यह नहीं पता कि विधायक अपनी ही सरकार की किरकिरी नहीं करवाएंगे, इसलिए कभी उनके हक और हित की बात नहीं करेंगे। बेहतर होता कि परिजन न्याय पाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और सुप्रीम कोर्ट की शरण लेते तो गैर कानूनी काम करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती, सत्ता के पीछे दुम हिलाते रहने से कुछ होने वाला नहीं।