फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते दसियों साल से धन लूटने में जुटे अदलखा को अब विधायक बनकर अपना नाम चमकाने की भी चिंता सताने लगी है। इसके लिए वह जगह जगह अपने नाम के पत्थर लगवाने की अंधाधुंध कोशिश में लगा है। इस कोशिश का पहला निशाना सीमा त्रिखा बनती नजर आ रही है। मोदी-खट्टर तो दूसरी सरकारों की विकास योजनाओं पर अपनी तख्ती लगा कर उद्घाटन करते रहे हैं लेकिन धनेश अदलखा तो उनसे आगे निकल गया और अपनी ही सरकार में पिछली विधायक व शिक्षामंत्री त्रिखा द्वारा किए गए काम अपने नाम कराने पर उतारू है।
दस साल तक ठगी में लगी रही खट्टर-सैनी सरकार ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले दिखावे के लिए कुछ विकास कार्य शुरू कराने का ढिंढोरा पीटा था। बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में भी सवा दो करोड़ की लागत से दस पार्कों के सौंदर्यीकरण की घोषणा की गई थी। दस साल में कुछ नहीं करने वाली सीमा त्रिखा ने भी टिकट कटने पर जाते जाते अपना नाम अमर करने के इरादे से चौक चौराहों पर मूर्तियां और उन पर अपने नाम की तख्तियां लगवाने के लिए 2 करोड़ बीस लाख रुपये का प्रोजेक्ट बनवाया था।
आचार संहिता लागू होने से पहले चौराहों पर मूर्तियां लगवाने का काम तो शुरू हो गया और पार्कों के सौंदर्यीकरण का ठेका त्यागी नाम ठेकेदार को जारी भी कर दिया गया था। जनता को दिखाने के लिए सीएम सैनी, मंत्री सीमा त्रिखा के आदि के नाम की तख्तियां भी लगा दी गईं लेकिन काम कोई नहीं हुआ।
चुनाव समाप्त दो माह से ज्यादा बीत चुका है लेकिन पार्कों के सौंदर्यीकरण का काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है। इसी तरह एफएमडीए द्वारा चौराहों पर लगवाई जाने वाली मूर्तियों का काम भी ढीला पड़ा हुआ है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार नए विधायक धनेश अदलखा ने सारा काम रुकवा रखा है। कारण बताया जा रहा है कि धनेश पार्कों और चौराहों में लगे सीमा त्रिखा के नाम के पत्थर उखाड़ कर अपने नाम के लगाए जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। सुधी पाठकों को याद होगा कि बीते 16 अक्तूबर को शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा ने एनआईटी तीन चौक का निरीक्षण कर उनके नाम का पत्थर लगाने का अधिकारियों पर दबाव डाला था।
आदेश का पालन हुआ और अधूरे निर्माण में ही आनन फानन उनके नाम का पत्थर लगवा भी दिया गया। शायद ही किस नेता ने खुद को इतना बेबस महसूस किया होगा जितना कि तब निवर्तमान शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा ने, खट्टर के चहेते धनेश के इशारे पर उनके नाम का पत्थर दूसरे दिन ही हटा दिया गया था। निगम सूत्र कहते हैं कि धनेश केवल अपने नाम के ही पत्थर लगाने के लिए पिछली सरकारों में शुरू हुए काम के पत्थर तक हटवाने का दबाव बना रहा है। नाम की इतनी ही भूख है तो सिर्फ सीमा के नाम के ही क्यों, खट्टर व हुड्डा के लगवाए पत्थर भी उखड़वा कर अपने पत्थर लगवा लो, लेकिन जो भ्रष्टाचार तुमने किए हैं जीवन भर उनमें तुम्हारा नाम आता रहेगा। फार्मेसी काउंसिल में रिश्वतखोरी मामले में खट्टर ने भले ही तुम्हें विजिलेंस जांच में निकलवा लिया हो लेकिन भुक्तभोगी और आम जनता तो तुम्हारी सच्चाई जानती ही है।
यह भी चर्चा है कि हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन रहते हुए फार्मा छात्रों से पंजीकरण के एवज में पांच-पांच हजार रुपये तक वसूलने वाले धनेश करीब साढ़े चार करोड़ के इन विकास कार्यों में अपने कमीशन का भी हिसाब किताब लगा रहे हैं। नगर निगम पार्षद रहते हुए दो सौ करोड़ रुपये के घोटाले में प्रमुख भूमिका निभाने, चहेते ठेकेदार द्वारा नकली एलईडी लाइटें लगवाने, इंटरलॉकिंग सड़कों का खेल करने, वित्त कमेटी के सदस्य होने के नाते बड़े बड़े कारनामे अंजाम देकर करोड़ों रुपयों की बंदरबांट करने के आरोपों में घिरे धनेश अदलखा को अच्छी तरह मालूम है कि पार्कों के सौंदर्यीकरण के नाम पर कितने धन की बंदरबांट की जाती है, नेताओं से लेकर अधिकारियों की कितनी हिस्सापत्ती होती है।
चुनाव में जनता का बेटा और जनता के लिए आसमान से तारे तोड़ कर लाने की कसमें खाने वाले धनेश ने इन दोनों ही विकास कार्यों को क्यों रुकवाए रखा है समझा जा सकता है। यदि उन्हें कमीशन वसूलने और अपने नाम की तख्ती लगाने की इच्छा न होती तो ये दोनों प्रोजेक्ट न जाने कब पूर्ण होकर जनता को समर्पित कर दिए गए होते। जहां इंसान को इंसान बनाया जाए। (राज वाल्मीकि स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)