फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कचरा प्रबंधन के नाम पर संघी की ईकोग्रीन पर कई सौ करोड़ रुपये लुटाने और पूरे शहर का कचरा करवाने वाला नगर निगम चार वार्डोंं के नाले निजी कंपनी से साफ कराने जा रहा है। एक्सईएन नितिन कादियान ने बताया कि वार्ड नंबर 22, 23, 26 और 27 के सीवर और नालों की सफाई निजी कंपनी से कराई जाएगी। इसके लिए 2 करोड़ 26 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।
हालांकि नितिन कादियान ने ठेकेदार कंपनी का नाम नहीं बताया लेकिन माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष के किसी नेता, विधायक, मंत्री या संघी के करीबी की होगी। सीवर नालों की सफाई तो क्या होगी, सवा दो करोड़ की बंदरबांट की जाएगी। वैसे भी नगर निगम पिछले दस साल में नाला-सीवर सफाई के नाम पर कई सौ करोड़ रुपये खुर्दबुर्द कर चुका है। इस मद में प्रत्येक वर्ष कितने रुपये खर्च किए गए निगम अधिकारी इसका रिकॉर्ड देने में बहानेबाजी व आनाकानी करते नजर आते हैं।
समझा जाता है कि नगर निगम प्रत्येक वर्ष नाला-सीवर सफाई के नाम पर तीस से चालीस करोड़ जितनी मोटी रकम खर्च करने का दिखावा करता है। यदि मज़दूर मोर्चा के आंकड़े गलत हैं तो नगर निगम के अधिकारी पिछले दस साल में इस मद में किए गए खर्च का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकते हैं ताकि आम जनता को भी पता चले कि इतनी मोटी रकम लुटाने के बावजूद उसे आज तक सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार इन चार वार्डों में आने वाले सेक्टर 28, 29,30, 31, 37 हूडा ने बसाए हैं, इनमें सीवर-नालों का नेटवर्क ठीक-ठाक है।
इसी तरह निजी बिल्डर्स द्वारा बसाई गई आईपी कॉलोनी, स्प्रिंगफील्ड कॉलोनी, अशोका एंक्लेव, सराय ख्वाजा आदि में भी जल निकासी व्यवस्था और सीवर लाइन नेटवर्क अच्छी हालत में है। यानी थोड़ी बहुत सफाई और डीसिल्टिंग से ही काम चल सकता है। सवा दो करोड़ रुपये का खर्च किस तरह निर्धारित किया गया है, निगम अधिकारियों को इसकी विस्तृत जानकारी देनी चाहिए, अन्यथा इसे भी कमीशनखोरी का खेल ही समझा जाना चाहिए।
सिर्फ चार वार्डों में ही नाला-सीवर सफाई कराए जाने के फैसले को भी जानकार गलत बता रहे हैं, उनके अनुसार एनआईटी एक, दो, तीन, पांच, डबुआ, सारन, बडख़ल, सेक्टर-सात हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सेक्टर-छह औद्योगिक क्षेत्र, रेलवे रोड, वाईएमसीए चौक के पास दिल्ली-आगरा हाईवे, सिही गांव, पर्वतीय कॉलोनी आदि इलाकों में यह समस्या स्थायी रूप ले चुकी है, पहले इन इलाकों में सफाई कराई जानी चाहिए थी। लगता है कि नगर निगम के अधिकारी जनता की समस्या सुलझाने नहीं बल्कि सत्तापक्ष की जी हुजूरी में लगे हैं। यदि वे जनहित में योजनाएं बनाते तो पहले उन क्षेत्रों में सीवर नाला सफाई कराते जहां ज्यादा समस्या है लेकिन उन्हें तो नेताजी की खुशी और मोटे कमीशन से ही मतलब है।