फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी-खट्टर की डबल इंजन सरकारों में स्मार्ट सिटी के खेल में ठेकेदार- नेता-अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए दो सौ करोड़ घोटाले की जांच ढाई साल से ठहरी हुई है। जांच से बचने के लिए हर हथकंडे अपना रहीं घोटाले के मुख्य आरोपियों में एक आईएएस सोनल गोयल अब केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के घर के चक्कर लगा रही हैं। विजिलेंस जांच मेें सोनल गोयल के घोटाले में शामिल होने के पुख्ता सुबूत मिल चुके हैं लेकिन जिस तरह से जांच चल रही है, लगता नहीं है कि उन्हें, एम शाईन या अनीता यादव को दोषी ठहराया जाएगा, छुटभैये अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सरकार वाहवाही लूटेगी।
2014 में मोदी ने प्रधानमंंत्री बनते ही देश में सौ स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा कर दी थी। बिना अध्ययन, योजना और रोड मैप तैयार किए ही घोषित यह योजना देश के बड़े भ्रष्टाचारों में से एक साबित हुई। इस योजना के तहत विकास के नाम पर तत्कालीन मंत्री-ठेकेदार और निगम के अधिकारियों ने करीब दौ सौ करोड़ रुपये बिना काम कराए हज़म कर लिए थे। इतने बड़े पैमाने पर हुई बंदरबांट में हिस्सापत्ती नहीं दिए जाने पर कुछ पार्षदों ने घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए निगमायुक्त से ठेकेदार सतबीरा को बिना काम दो सौ करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की शिकायत की थी। खेल में सरकार के मंत्री, नेता से लेकर आईएएस अधिकारी तक फंस रहे थे तो इसे दबाने का भरपूर प्रयास किया गया लेकिन मामला सार्वजनिक होते ही कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने जांच के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सरकार ने विजिलेंस जांच की स्वीकृति दी तो ठेकेदार सतबीरा को बिना काम के 183 करोड़ रुपये भुगतान किए जाने का घोटाला सामने आया था। 27 लाख के वर्क ऑर्डर को 21 बार रिवाइज कर 5 करोड़ 80 लाख रुपये का किया जाना और बिना काम भुगतान किया जाने समेत अनेक गड़बडिय़ां पकड़ी गईं। इनमें पहले से ही किए गए काम का दोबारा भुगतान किया जाना, फर्जी वर्क ऑर्डर पर करोड़ों का बिल पास किया जाना, आरएमसी-ग्रिल आदि लगाए बिना ही भुगतान आदि हेराफेरी पकड़ी गई थीं। विजिलेंस जांच में आईएएस सोनल गोयल द्वारा जानबूझ कर फर्जी बिलों को पास करने, रिवाइज टेंडर की कीमत दस प्रतिशत से कहीं अधिक बढ़ाए जाने पर आपत्ति करने के बजाय पास करना सामने आया था। इस मामले में गिरफ़्तार ठेकेदार सतबीरा ने जांच के दौरान बयान दिया था कि उसने मंत्री मूलचंद शर्मा को महंगी एसयूवी गिफ़्ट की, निगमायुक्त अनीता यादव को लाखों रुपये कीमत के महंगे गिफ़्ट दिए और अपने खर्च पर उन्हें हवाई यात्रा भी कराईं। विजिलेंस की जांच में आईएएस एम शाईन और अनीता यादव तो शामिल हो गए थे लेकिन सोनल गोयल कोर्ट से स्थगनादेश ले आई थीं। बताया जा रहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा की डबल इंजन सरकारों में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता में गहरा रोष देखा गया। किसी तरह चुनाव जीतने के बाद घोटाले में कार्रवाई का नाटक कर सरकार अपने दाग साफ करने का पाखंड करने वाली है। चर्चा है कि सरकार दो सौ करोड़ घोटाले की जांच में तेजी लाने के आदेश जारी कर सकती है।
दिवाली में आईएएस सोनल गोयल केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से मिलने उनके सेक्टर 28 स्थित आवास पर मिलने पहुंची थीं। सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस जांच में बुरी तरह फंसीं सोनल गोयल ने केंद्रीय मंत्री गूजर से उन्हें बचाने की मदद मांगी है। सुधी पाठकों को बताते चलें कि निगमायुक्त रहते हुए सोनल गोयल तत्कालीन कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की भी खास थीं।
बताया जा रहा है कि उनके दोबारा मंत्री बनने पर सोनल ने उनसे भी जांच से पीछा छुड़ाने का आग्रह किया है। सच्चाई ये भी है कि दो सौ करोड़ की लूट केवल सोनल गोयल ने नहीं की है, ठेकेदार सतबीरा ने मंत्री मूलचंद सहित कई भाजपा नेताओं के भी नाम जांच में लिए हैं।
जाहिर है कि अगर ईमानदारी से जांच हुई तो सोनल गोयल के साथ ही कई आईएएस, भाजपा के मंत्री और नेता सभी फंसेंगेे। पहले से ही जनाक्रोश झेल रही सरकार नहीं चाहेगी कि उसके मंत्री-नेता घोटाले के दोषी बनें। ऐसे में बहुत संभव है कि सरकार के इशारों पर चल रही विजिलेंस भी जांच में बड़ी मछलियों को छोड़ कर भास्कर जैसे सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर, एक्सईएन प्रेमराज, लोकल ऑडिट ऑफिसर हरगुलाल, अकाउंट ऑफिसर इंचार्ज विशाल कौशिक, अकाउंट अफसर सतीश कुमार, अधीक्षक अकाउंट ब्रांच विनोद कुमार, क्लर्क नवीन कुमार और राजेंद्र कुमार जैसी छोटी मछलियों को फंसा कर सरकार को फज़ीहत से बचाने का प्रयास करे।