मंझावली पुल की तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे भी झुनझुना ही है फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे पर मोहना गांव में कट उतरवाने के लिए क्षेत्र के लोगों को धरना देते 14 अक्तूबर को एक साल पूरा हो गया। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के आश्वासन पर भाजपा को लोकसभा और फिर विधानसभा में जीत दिलाने वाले मोहना क्षेत्र के वासियों को अब भी उम्मीद है कि मंत्री गूजर यहां कट उतरवाने की घोषणा करेंगे। कट तो तब बनेगा जब यह प्रोजेक्ट चालू होगा, ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे भी खट्टर-गूजर की मंझावली पुल परियोजना तरह ही बनता नजर नहीं आ रहा, क्योंकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि एक्सप्रेस वे का एलिवेटेड हिस्सा कहां से बनाया जाना है, और कट कहां उतारा जाना है। लगता है कि जब तक मोहना वाले धरना देते रहेंगे और गूजर मंत्री बने रहेंगे तब तक यह प्रोजेक्ट अटका ही रहेगा।
मोहना क्षेत्र के लोगों को अच्छी तरह मालूम है कि मंत्री गूजर पहले भी झूठ बोल कर उन्हें अंधेरे में रख चुके है, उनसे धोखा मिलने के बाद ही इन लोगों ने अपना हक पाने के लिए अनिश्चितकालीन धरना देना शुरू किया था। मई 2022 में पूर्व सीएम खट्टर ने एक रैली में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पर मोहना में कट बनवाने की घोषणा की थी, तब मंत्री गूजर ने भी जोर शोर से कट उतरवाने की हामी भरी थी। घोषणा के बाद गांव वाले आश्वस्त थे कि कट बन जाएगा। लेकिन गूजर ने धोखा देते हुए चोरी चुपके से कागजों में मोहना की जगह कट यूपी बॉर्डर के करीब फरेंदा में उतरवा लिया था। गांव वाले जब भी मिलते मंत्री गूजर उनसे ठोंक कर कहते कि उन पर पूरा भरोसा रखें कट मोहना में ही बनेगा। सितंबर 2023 में कुछ समझदार लोगों ने एनएचएआई कार्यालय से एक्सप्रेस वे की ड्रॉइंग निकलवाई तो पता चला कि मोहना की जगह फरेंदा में कट उतरना है, जिससे मंत्री के झूठ और धोखे का पता चला। इस मामले में पांच गांव की सरदारी मिलने गई तो गूजर ने उन्हें बुरी तरह बेइज्जत कर लौटा दिया था।
गूजर ने मोहना की जगह यह कट फरेंदा में इसलिए उतरवाया था कि उसने अपने पारिवारिक सदस्यों के नाम यहां सात सौ एकड़ जमीन कौडिय़ों के दाम में खरीदी थी, कट उतरते ही यह जमीन सोने के भाव बिकती, इसी लालच में उसने मोहना सहित आसपास के दर्जन भर गांवों में रहने वाले हजारों लोगों के हित की बलि चढ़ा दी थी। मंत्री से अपमानित होकर कट बनाए जाने की मांग पर पांच गांवों की सरदारी 15 अक्तूबर 2023 से मोहना गांव में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई। ग्रामीणों ने विरोध में कृष्णपाल के पुतले की शव यात्रा निकाली, तेरहवीं की लेकिन मंत्री जी नहीं झुके। इस बीच जनवरी 2024 में लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गई। खिसकते जनाधार देख कर हार से बचने के लिए मंत्री गूजर ने एक बार फिर ग्रामीणों को धोखा दिया। अखबारों में खबर छपवाई कि मोहना मे बनवाने के लिए वह सड़क मंत्री नितिन गडकरी से मिले, गडकरी ने चुनाव के बाद कट बनवाने का आश्वासन दिया है। गूजर के बहकावे में आकर मोहना और आसपास के क्षेत्र के लोगों ने जुमला पार्टी को वोट देकर तीसरी बार जिता दिया। एक बार फिर मंत्री बनते ही गूजर अपने झूठे वादे को भूल गए।
इस बीच विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई। प्रदेश में भाजपा सरकार की बुरी स्थिति देख संघ भाजपा के नेतृत्व ने असंतुष्ट वोटरों को मनाने का जिम्मा गूजर को सौंपा। जुलाई में उन्होंंने एक बार फिर ढोंग किया कि दस सितंबर से पहले वह खुद मोहना में कट उतारे जाने का सुबूत देंगे, लेकिन कुछ किया नहीं। मंत्री के झूठे आश्वासनों से ऊब चुके क्षेत्र के लोग अब कट उतारे जाने तक धरने पर बैठे रहने का प्रण ले चुके हैं।
कट बनना तो दूर एनएचएआई से जो जानकारियां मिल रही हैं उससे तो लग रहा है कि यह एक्सप्रेस वे भी खट्टर की अन्य घोषणाओं की तरह कागजों में ही रहने वाला है। एक्सप्रेस वे में आठ किलोमीटर का एलिवेटेड रोड कहां से कहां तक बनाया जाना है अभी तक यही नहीं तय हो सका है, जबकि प्रोजेक्ट पूरा होने की डेड लाइन 26 सितंबर 2024 निर्धारित की गई थी। जो थोड़ा बहुत काम हुआ भी है वह भी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद़्ध नगर में ही हुआ है न कि पलवल, फरीदाबाद में। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यहां सेक्टर 65 के सामने इंटरचेंज का काम हो रहा है। यही नहीं मोहना गांव में कट उतारे जाने का प्रस्ताव भी एनएचएआई मुख्यालय में विचाराधीन है।
सूत्रों के अनुसार फरेंदा में कट को तो बहुत पहले ही मंजूरी मिल गई थी, मोहना को कब मिलेगी अभी कुछ निश्चित नहीं है। मुख्यालय पिछले एक साल से कोई निर्णय नहीं ले सका है। दरअसल, मंत्री गूजर के दबाव के कारण एनएचएआई कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है। गूजर कभी नहीं चाहेंगे कि फरेंदा में कट समाप्त कर दिया जाए, ऐसा होने से सात सौ एकड़ जमीन बेचकर अरबों रुपये नहीं कमा पाएंगे। जिस रफ्तार से एक्सप्रेस वे का काम चल रहा है उससे तो लगता है कि मोहना वासियों को अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक धरने पर ही बैठे रहना पड़ेगा।