फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) रेहड़ी-खोमचे लगाकर परिवार पालने वाले छोटे दुकानदारों को अतिक्रमण बता कर उजाडऩे वाले हूडा व नगर निगम अधिकारी सत्तारूढ़ नेताओं द्वारा किए जाने वाले अवैध कब्जे व अतिक्रमण पर आंखें बंद कर लेते हैं। इन अधिकारियों को बड़े दुकानदार, रेस्टोरेंट संचालक, बार वालों का अतिक्रमण भी नहीं नजर आता क्योंकि उनके यहां से हर महीने हिस्सा पहुंच जाता है। यही कारण है कि कभी बड़े दुकानदारों के अतिक्रमण पर बुलडोजर नहीं चलता।
हूडा के सेक्टर 46 की मार्केट में मिलन स्वीट एंड स्नैक्स नाम से मंत्री मूलचंद के परिवार के सदस्य का रेस्टोरेंट हाल ही में खोला गया है। कहने को तो यह हूडा की डबल स्टोरी शॉप (डीएसएस) है लेकिन मंत्री जी ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए इसके निर्माण में न केवल बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ाईं और मनचाहे ढंग से इमारत बनाई बल्कि सरकारी जमीन तक पर अतिक्रमण कर डाला। दुकान के बाहर बरामदे पर कब्जा तो किया ही गया, पार्किंग एरिया पर भी अतिक्रमण कर अपना चाट स्टॉल लगाया गया है। स्थायी रूप से लगाए गए चाट स्टॉल के सामने पड़ी मेज कुर्सियों के कारण यहां वाहन खड़ा करना तो दूर, पैदल निकलना भी मुश्किल है। मंत्री द्वारा अतिक्रमण किए जाने पर आसपास के दुकानदारों ने भी पैदल चलने के लिए बनाए गए बरामदे में अतिक्रमण कर लिया है। हूडा अधिकारियों की हिम्मत नहीं है कि वो इसके खिलाफ कोई कार्रवाई करें, उल्टे मंत्री के होटल के पास किसी भी चाट, पकौड़ी वाले को रेहड़ी नहीं लगाने दिया जाता, क्योंकि इन रेहड़ी वालों के कारण मंत्रीजी की दुकान पर चाट की बिक्री कम हो सकती है। जो रेहड़ी लगाना चाहते हैं उन्हें मंत्री जी की दुकान से काफी दूर ही रहना होता है। इन रेहड़ी वालों को हूडा मार्केट में खड़े होने के एवज में हफ़्ता तो देना ही पड़ता है गाहे बगाहे मुफ़्त चाट भी खिलानी पड़ती है।
हूडा के सभी सेक्टरों और मार्केट काँप्लेक्स में जमकर अतिक्रमण और अवैध निर्माण किया गया है। बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर लंबाई-चौड़ाई और ऊंचाई के मानक दरकिनार करते हुए इमारतें बनाई जा रही हैं। बरामदे से लेकर पार्किंग क्षेत्र तक दुकानदारों का कब्जा है। बरामदे में कोई स्टॉल लगाकर जगह रोके है तो कोई डिस्प्ले आइटम लगाकर तो कुछ ने हस्तशिल्प, जैसे छोटे कारीगरों को टेबल लगाने के लिए किराए पर जगह दे रखी है। यह सब हूडा अधिकारियों की जानकारी और मिलीभगत से ही होना संभव है। सूत्रों के अनुसार दुकान, रेहड़ी आदि लगाने के लिए बरामदे के इस्तेमाल से लेकर मार्केट परिसर की हर जगह के रेट तय हैं। रेहड़ी वालों से यह रकम हूडा अधिकारियों द्वारा कमीशन पर रखे गए वसूली एजेंट करते हैं तो स्थायी दुकान वाले भी हफ़्ता इकट्ठा कर प्रतिनिधियों के जरिए पहुंचा देते हैं।
हुडा अधिकारी भी न तो यह मोटी ऊपरी कमाई छोडऩे को तैयार है और न ही मंत्रीजी की नाराजगी मोल लेना चाहते हैं। जनता सुविधाओं से वंचित हो या उसे परेशानी का सामना करना पड़े इससे अधिकारियों या मंत्री-विधायक को कोई फर्क नहीं पड़ता। जब मंत्री ख्रुद ही अतिक्रमण करे तो फिर किससे नियम कानून के पालन की उम्मीद की जाए।