सेक्टर 89 पीयूष हाइट्स के छह सौ से अधिक रेजिडेंट्स से वसूली, मारपीट अवैध उगाही कर रहे मंत्री के लगुए-भगुए फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 89 पीयूष हाइट्स सोसायटी की आरडब्लूए पर अवैध रूप से कब्जा जमाए विजेंद्र सिंह नरवत और उसके गुंडे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के संरक्षण में हजार से अधिक सोसायटी वासियों को न केवल लूट रहे हैं बल्कि विरोध या सवाल करने वालों को जान से मारने की धमकी देने के साथ बुरी तरह से पीट रहे हैं।
मंत्री के चरणों में बैठी थाने की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पीडि़तों की शिकायत पर कान नहीं देते। अभी तक इन दबंगों के खिलाफ एक दर्जन के करीब शिकायतें दी जा चुकी हैं लेकिन कोई अधिकारी इनके खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। भाजपा के अंधभक्त रेजिडेंट्स अचंभे में हैं कि उन्होंने जिस कृष्णपाल गूजर को वोट देकर जिताया, उसके गुंडे ही उनकी धुनाई कर लूट रहे हैं और कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही।
पीयूष हाइट्स सोयायटी में 1086 आवास हैं। यहां के सुरेंद्र सांगवान के अनुसार सोसायटी एक्ट के तहत जितने भी रेजिडेेंट्स हैं जो कॉमन एरिया मेंटिनेंस चार्ज का भुगतान करते हैं वह अनिवार्य रूप से आरडब्ल्यूए के मेंबर होंगे। नियमानुसार कोई सोसायटी तब ही आरडब्ल्यूए को हैंडओवर की जा सकती है जब उसके सभी फ्लैटों के 80 प्रतिशत मालिक आरडब्ल्यूए के सदस्य हों। मानक पूरे नहीं होने के कारण यह सोसायटी अभी आरडब्ल्यूए को हैंडओवर भी नहीं की गई है। आरोप है कि बिल्डर से मिलीभगत कर शुरूआती निवासी अनिल सिंह ने यहां फर्जी तरीके से आरडब्ल्यूए का गठन किया और खुद स्थापना अध्यक्ष बन गया।उसका सहयोग मूल रूप से खेड़ी गांव निवासी और सोसायटी में फ़्लैट हथियाए विजेंद्र सिंह नरवत, उसके भाई अरविंद नरवत आदि ने किया था। बाद में विजेंद्र नरवत और उसके लगुए भगुओं ने अनाप शनाप प्रस्ताव बनाकर करीब 150 लोगों की कोर कमेटी बना ली और बाकी सदस्यों के मत देने का अधिकार छीन लिया। इस तरह अध्यक्ष पद हथियाने के बाद विजेंद्र ने सोसायटी में अवैध वसूली, गुंडगर्दी, टैक्स चोरी आदि के खेल शुरू कर दिए। लूट एवं गुुंडागर्दी को निर्बाध चलाए रखने के लिए यह पूरा गिरोह मंत्री कृष्णपाल गूजर का शरणागत हो गया। इसके परिणामस्वरूप कोई भी सरकारी अधिकारी इनके विरुद्ध आने वाली किसी भी शिकायत का संज्ञान नहीं लेता।
सोसायटी के सभी घरों से करीब तीन हज़ार रुपये महीना कॉमन एरिया मेंटिनेंस शुल्क वसूला जाता है। आरोप है कि केवल चार साढ़े चार सौ घरों से वसूली दिखाई जाती है और बाकी धन हड़प लिया जाता है। इस धांधली को उजागर करने के लिए सुरेंद्र सांगवान, अनुराग रोहन, राजेश रंजन आदि ने डिस्ट्रक्ट रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज़ में फरवरी 2022 को आवेदन कर सोसायटी के खातों की तीसरी पार्टी से ऑडिट कराने की मांग की। जिला रजिस्ट्रार सचिन यादव ने ऑडिट का आदेश जारी कर दिया लेकिन मंत्री गूजर के इशारे पर खेल कर दिया और ऑडिट की कोई अवधि निर्धारित नहीं की।
नतीजा वही हुआ आज तक ऑडिट नहीं हो सका है। आरडब्ल्यूए से से प्रति वर्ष करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये मेटिनेंस चार्ज वसूला जाता है लेकिन इसका हिसाब नहीं रखा जाता है। नियमानुसार मेंटिनेंस शुल्क देने वालों को जीएसटी की छूट मिलती है लेकिन रसीद नहीं दिए जाने के कारण वो इसका लाभ नहीं ले पाते हैं।
लूट सिर्फ यहीं नहीं होती, डीबीएचवीएन से 5.50 रुपये प्रति यूनिट मिलने वाली बिजली के लिए ये दबंग 7.25 रुपये वसूली करते हैं। इस मद में हर साल कई करोड़ रुपये हज़म कर जाते हैं। पीडि़तों ने उपभोक्त शिकायत निवारण फोरम में शिकायत की थी। फोरम ने अक्तूबर 2020 को डीएचबीवीएन को समान दर से बिल वसूलने और बिजली खातों का ऑडिट करने का आदेश दिया था लेकिन गूजर के दबंगों के आगे बेबस डीबीएचवीएन के अधिकारी आज तक कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। दबंगों ने विरोध करने वाले रेजिडेंट्स की बिजली काट कर उनके मीटर भी उखाड़ लिए। जनवरी 2021 में ऐसे ही एक बुजुर्ग सुभाष चावला के घर का मीटर उखाड़ लिया गया, उन्होंने शिकायत की तो सोसायटी के दफ्तर बुलाया गया। यहां सुभाष दंपति को दबंगों ने बुरी तरह से पीटा। पीडि़त की शिकायत पर बीपीटीपी पुलिस ने हल्की धाराओं में केस दर्ज किया, लेकिन आज तक न तो जांच हुई, न दबंगों से पूछताछ। उनकी ही तरह प्रत्येक विरोधी के साथ दंबगों ने यही हरकत की। अनुराग रोहन की तो एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई तो उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।
गूजर के गुंडों की दबंगई यहीं पर नहीं रुकी, सोसायटी के हरित क्षेत्र यानी पार्क पर कब्जा करने की नीयत से सोसायटी वासियों के घोर विरोध के बावजूद वहां एक मंदिर का निर्माण कर डाला। इस मंदिर की कमाई पर कब्जा करने की नीयत से अवैध रूप से श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट बनाकर, उसे इस मंदिर का जिम्मा सौंप दिया। इस ट्रस्ट में विजेंद्र नरवत, उसका भाई अरविंद नरवत परिवार के सदस्य और लगुए भगुए हैं। पीडि़तों की शिकायत पर एनजीटी ने इस मंदिर को अतिक्रमण करार देकर डीटीपी फरीदाबाद राजेंद्र सिंह को ग्रीन एरिया बहाल करने का आदेश दिया। यहां भी मंत्री गूजर ने अड़ंगा लगा दिया। एनजीटी के आदेश के बावजूद मंत्री के इशारे पर डीटीपी राजेंद्र सिंह ने अतिक्रमण हटाने के बजाय अनधिकृत रूप से कंपाउंडिंग का आवेदन स्वीकार कर लिया।
पीडि़तों के आवेदन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोसायटी के सभी सदस्यों को आरडब्ल्यूए की मेंबरशिप देने का आदेश 21 मार्च 2024 को दिया। राज्य रजिस्ट्रार ने भी यही आदेश दिया लेकिन मंत्री गूजर का दबदबा देखिए कि जब सदस्यों ने 2 अप्रैल को जिला रजिस्ट्रार फरीदाबाद सचिन यादव को सभी को मेंबर बनाने का आवेदन दिया तो उसने हाईकोर्ट और राज्य रजिस्ट्रार के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। पीडि़तों ने उसके खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है।
सोसायटी के स्वयंभू पदाधिकारी बने गिरोह के ये लोग अपने आप को सोसायटी वासियों द्वारा चयनित भी बताते हैं। यह खुला सच है कि न केवल पीयूष हाइट्स बल्कि नहरपार की अधिकांश सोसासटियों पर मंत्री कृष्णपाल गूजर के इसी तरह के गुंडों का कब्जा है। ये रेजिडेंट्स इन गुंडों के हाथों बीते सात आठ साल से लुट-पिट रहे हैं लेकिन अंधभक्ति में चूर होने के साथ साथ गुुंडो से भयभीत अधिकतर रेजिडेंट्स डट कर मुकाबला करने के बजाय डर कर रेंगना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं गुंडागर्दी का विरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति का साथ देने के बजाय ये लोग गुंडों का साथ देना इसलिए बेहतर समझते हैं कि उन पर गुंडों की दयादृष्टि बनी रहे, उनका रेंगने का हक़ न छीन लिया जाए। रेजिडेंट्स की इसी फूट का फायदा गूजर और उसके चेले उठा रहे हैं, जिस मेंटिनेंस चार्ज का धन सोसायटी के विकास और रखरखाव में खर्च होना चाहिए था उसका मोटा हिस्सा गूजर के चेले बैठे बिठाए लूट रहे हैं और विरोध करने वाले को सबक सिखा रहे है। जब तक सोसायटी के सभी लोग एकजुट होकर विरोध नहीं करेंगे तब तक ऐसे ही लुटते पिटते रहेंगे, गूजर के रहते पुलिस या प्रशासन उन्हें हक नहीं दिलाएगा, उन्हें खुद ही आगे आना होगा।
सोसायटी वासी आशा की एक किरण मौजूदा विधानसभा चुनाव में देख सकते हैं। यदि अंधभक्तों की आंखें खुल गईं जिसकी कि पूरी संभावना नजऱ आ रही है, तो राज्य से कृष्णपाल की संघी सरकार का सफाया होना निश्चित है। आने वाली कांग्रेस सरकार के राज में कृष्णपाल एवं उसके गिरोह की गुंडागर्दी चलना असंभव हो जाएगा। उस वक़्त जिला रजिस्ट्रार सचिन यादव, डीटीपी राजेंद्र सिंह और पुलिस सहित सभी अधिकारियों को सही ढंग से काम करना होगा।