फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के भ्रष्टतम अधिकारियों में एक मंत्री गूजर का ‘बेटा’ एक्सईएन ओमदत्त अब नगर निगम में शामिल किए गए 24 गांवों के कूड़ा प्रबंधन के नाम पर नोट छापने की तैयारी में हैं। जिन गांवों में पंचायती राज व्यवस्था के तहत कूड़ा-कचरा प्रबंधन बहुत ही अच्छे ढंग से चल रहा था, तीन साल पहले ये नगर निगम में क्या शामिल हुए इनमें भी कचरे के ढेर लगने लगे। अब इसका निस्तारण करने के नाम पर लाखों रुपये की बंदरबांट करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि जानकार इसे केवल चुनावी शोशेबाज़ी मान रहे हैं।
तिगांव विधानसभा क्षेत्र के 24 गांव जनवरी 2021 मेंं जिला पंचायती राज विभाग से नगर निगम को हस्तांतरित किए गए थे। खेड़ी कलां, साहूपुरा, मच्छगर, नीमका जैसे बड़े गांवों की तरह ही अन्य सभी गांवों में भी आधारभूत सुविधाएं पर्याप्त विकसित अवस्था में नगर निगम को सौंपी गईं थीं। पंचायत विभाग की ओर से इन गांवों मेें सफाई व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण और कचरा प्रबंधन अच्छे ढंग से किया जाता था। गावों के लोगों का कहना है कि जब तक नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया था गांव में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी खास कर कूड़े की। नगर निगम के अंडर जाते ही यहां जगह जगह कूड़े के ढेर लगने लगे, विधायक राजेश नागर से लेकर निगम के अधिकारियों तक गुहार लगाई गई लेकिन कुछ नहीं हुआ, गांव वालों को कूड़े के ढेरों के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है।
निगम के जानकारों के अनुसार मोटा बजट बनाने और लूट कमाई करने की नीयत से ही इन गांवों में कूड़ा प्रबंधन पर ढील दी गई ताकि जब गांव वाले परेशान होकर आवाज उठाएं तो इसके लिए बड़े पैकेज की मांग की जाए। इसके पीछे मंत्री गूजर के शातिर दिमाग ‘बेटे’ ओमदत्त का हाथ बताया जा रहा है। नए गांवों में विकास के नाम पर लूट कमाई करने के लिए ओमदत्त ने पिता समान मंत्री गूजर का इस्तेमाल कर निगमायुक्त से इन गावों को अपने नाम करा लिया। पंयायती राज में पहले से विकसित स्ट्रीट लाइट, इंटरलॉकिंग सड़कें बनाने के नाम पर 65 करोड़ रुपये का बजट बनाया गया।
अब सफाई के नाम पर 35 करोड़ का बजट बनाया गया है। इतना ही नहीं इन गांवों में कूड़ा एकत्रीकरण केंद्रों से कूड़ा उठाने के लिए निजी कंपनी से ट्रैक्टर-ट्रॉली और अर्थमूवर की सेवाएं ली जाएंगी। इसके लिए भी नौ लाख रुपये का बजट बनाया जा रहा है। सवाल ये है कि जब नगर निगम में एस्कॉर्ट कंपनी द्वारा सीएसअपार के तहत दिए गए 25 नए ट्रैक्टर-ट्राली खड़े सड़ रहे हैं तो उन्हें क्यों नहीं इस्तेमाल किया जाएगा। यही नहीं नगर निगम में दो अर्थमूवर मशीनें भी टायर खराब होने या कुछ छोटी मोटी कमियों के कारण खड़ी हैं उन्हें दुरुस्त कराकर क्यों इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। ऐसा करने से मोटी कमाई नहीं होगी, इसलिए निगम के संसाधनों को बर्बाद करने में भी ओमदत्त से लेकर निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास तक को गुरेज नहीं है।
ओमदत्त के अनुसार इन गांवों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा नई कंपनी को सौंपा जाएगा। यह काम अगले महीने से शुरू होने की संभावना है। जानकार कहते हैं कि यह केवल चुनावी चाय की प्याली में तूफान से ज्यादा कुछ नहीं है। गांव वालों को कूड़ा प्रबंधन चाक चौबंद किए जाने के ख्वाब दिखाए जा रहे हैं, चुनाव खत्म होने के बाद सब कुछ वैसे ही चलेगा जैसा चल रहा है। यदि निगम के हरामखोर अधिकारी इतने ही काम करने वाले होते तो पूरे शहर में जगह जगह कचरों के ढेर नहीं लगे होते। इनसे शहर तो संभाला नहीं जा रहा, गांवों का ठेका लेते घूम रहे हैँ।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि ईकोग्रीन कंपनी का डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ठेका खट्टर सरकार ने फरवरी 2024 में रद्द कर दिया था। नई कंपनी के साथ ठेका होने तक नगर निगम को यह कूड़ा कलेक्शन कराना था और शुल्क भी वसूलना था लेकिन निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ईकोग्रीन कंपनी के ही वेंंडर आज भी न केवल डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कर रहे हैं बल्कि मनमानी वसूली भी कर रही हैं।
दरअसल घरों से निकलने वाले कचरे में काफी मात्रा में कबाड़ भी होता है जिससे अच्छी आमदनी होती है। वेंडर कंपनियां घरों से होने वाली वसूली और कबाड़ की कमाई के चंद टुकड़े निगम को डाल कर मुनाफे वाला धंधा बेरोकटोक चला रही हैं। गांवों में सफाई हो न हो लेकिन सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट बना कर खेल किए जाने की तैयारी है।