चुनावी मौसम में एफएमडीए ने फिर पीटा ई बसों का ढिंढोरा

चुनावी मौसम में एफएमडीए ने फिर पीटा ई बसों का ढिंढोरा
October 07 05:59 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भाजपा के भोंपू साबित हो रहे एफएमडीए के अधिकारियों ने लोकसभा चुनाव से पहले ई बसों का जो झूठा ख्वाब शहर की जनता को दिखाया था वही ढिंढोरा अब विधानसभा चुनाव में पीट रहे हैं। दरअसल, हूडा, नगर निगम में नौकरी के दौरान शहर की ऐसी तैसी करने वाले हरामखोर और अयोग्य अधिकारी रिटायर होने के बाद इन्हीं भाजपा नेताओं की चरणवंदना कर एफएमडीए में भी घुस गए, अब चुनाव में उनको लाभ पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की तरह उन योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं जो कभी पूरी नहीं होनी हैं, नेताओं के प्यादे कुछ करेंगे ऐसा लगता भी नहीं।

जनवरी में लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही एफएमडीए के नाकारा अधिकारियों ने भाजपा और कृष्णपाल गूजर के हित में माहौल बनाने की नीयत से उड़ा दिया कि प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत फरीदाबाद को सौ ई बसें मिलने वाली हैं। ये बसें अप्रैल में यानी बस मतदान के कुछ दिन बाद ही चलने लगेंगी। एफएमडीए की सीईओ गरिमा मित्तल ने तो यह तक बता दिया था कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिग स्टेशन स्थापित करने का सात करोड़ का प्रस्ताव बना कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। सच्चाई ये थी कि ई बसें चलाने के लिए शहर में आधारभूत ढांचा नही था। इन बसों को चलाने के जो हवा-हवाई रूट बनाए गए थे यानी शहर के कोनों में रहने वाली वोटर जनता के इलाके तक पहुंचने के, उसके लायक सड़कें ही नहीं थीं। चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह नहीं मिली लेकिन सात करोड़ का प्रस्ताव भेज दिया गया।

एफएमडीए के अधिकारियों ने जनवरी में जो ढिंढोरा पीटा था उसका फायदा कृष्णपाल को दिलाया और फिर सब ठंडे बस्ते में चला गया। सुधी पाठकों को बताते चलें कि आज तक न तो चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह की तलाश पूरी हो पाई है, पूरी तो तब होती जब शुरू की गई होती, न ही केंद्र सरकार ने सात करोड़ का प्रस्ताव स्वीकार किया है और न ही शहर की सड़कों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए बदलाव किया गया है। यानी इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए एफएमडीए के निकम्मे अधिकारियों के पास न तो बजट है, न आधारभूत ढांचा और न ही चार्जिंग स्टेशन के जमीन।

अब विधानसभा चुनाव का माहौल है, प्रदेश के साथ ही शहर में भी भाजपा प्रत्याशियों की हालत खराब है। तो एफएमडीए के अंधभक्त अधिकारियों ने जनता को वरगलाने के लिए फिर से ई बस प्रोजेक्ट का झुनझुना बजाया है। घोषणा में सच्चाई लगे इसलिए बसों की संख्या सौ से घटा कर पचास कर दी गई है, लेकिन इन बसों को चलाने में आ रही समस्याओं के समाधान की कोई बात नहीं की जा रही है। जनता को वरगलाते हुए एफएमडीए के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी ने मीडिया में बयान दिया है कि चुनाव समाप्त होने के बाद इस दिशा में कार्य किया जाएगा। सवाल ये उठता है कि जब चुनाव के बाद इस पर काम किया जाना था तो चुनावी माहौल में यह घोषणा करने की क्या जरूरत थी। बागड़ी या उनके जैसे अंधभक्त अधिकारी चाहे जितना जोर लगा लें और चाहे जितने सुनहरे ख़्वाब दिखाएं सत्ता की चाहे जितनी चाटुकारिता कर लें, जनता झूठे और मक्कार नेताओं को इस सबक सिखाएगी।

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Mazdoor Morcha
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