करनाल (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के आयुष्मान प्रकोष्ठ के डिप्टी सीईओ डॉ. रवि विमल 26 सितंबर को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) करनाल द्वारा पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
आयुष्मान पैनल के स्थानीय निजी अस्पताल श्रीमूलचंद किडनी अस्पताल एवं यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट जिसे कुछ अर्सा पहले उसके काले कारनामों की वजह से पैनल से हटा दिया गया था, पुन: पैनल पर लाने के लिए डिप्टी सीईओ डॉ. रवि विमल ने दस लाख रुपये मांगे थे। घपलेबाजी करने में माहिर अस्पताल वाले भी कम शातिर नहीं थे उन्होंने भी दस लाख रुपये देने की हां तुरंत भर ली, क्योंकि पैनल पर आने से मोटी लूट कमाई जो होती है।
अस्पताल वालों का डॉॅ. रवि विमल से पांच-पांच लाख रुपये की दो किस्तों में देने का सौदा तय हुआ। इस बीच उन्होंने डॉ. विमल की शिकायत एसीबी से कर दी। सौदे के मुताबिक अस्पताल वाले पांच लाख रुपये लेकर पंचकूला स्थित आयुष्मान भारत के कार्यालय में उसके द$फ्तर पहुंचे। यहां डॉ. विमल को रुपये थमाए, उनका इशारा होते ही एसीबी टीम ने डॉ. विमल को रंगेहाथ पकड़ लिया, उनके पास से रिश्वत के पांच लाख रुपये बरामद कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। जांच के दौरान एसीबी को उसके घर से भी काली कमाई के एक करोड़ दो लाख रुपये अतिरिक्त बरामद हुए, तफ्तीश जारी है।
डॉ. विमल वैसे तो हरियाणा ईएसआई हेल्थ केयर का डॉक्टर है, इस तैनाती पर आने से पहले ये ईएसआई अस्पताल यमुना नगर का मेडिकल सुपरिंटेंडेंट था लेकिन इस पद पर कोई विशेष कमाई तो होती नहीं थी इसलिए पर उसने प्रतिनियुक्ति पर लूट कमाई वाले आयुष्मान प्रकोष्ठ में तैनाती प्राप्त कर ली। जानकार बताते हैं कि इस पद पर उसकी दूसरी बार तैनाती हुई है। इस मामले से यह समझना कठिन नहीं है कि गरीब जनता को इलाज देने के नाम पर मोदी द्वारा किया जा रहा यह पाखंड काली कमाई का बड़ा साधन बन चुका है।
2011 बैच की आईएएस संगीता तेतरवाल इस प्रकोष्ठ की सीईओ हैं। यह संभव नहीं है कि कोई डिप्टी सीईओ अपने सीईओ की मर्जी एवं मिलीभगत के बगैर इस तरह की डकैतियां मार सके । जब डॉक्टर रवि विमल के घर की तलाशी ली गई तो लगे हाथ सीईओ संगीता के घर की भी तलाशी ले ली जाती तो सारा भेद खुल जाता। इसी प्रकोष्ठ के पास हरियाणा सरकार के कर्मचारियों व पेंशनर्स को कैशलेस इलाज देने का एजेंडा कई वर्षों से लंबित पड़ा है। इतना ही नहीं इसी प्रकोष्ठ की चालबाजियों के चलते इलाज करने वाले अनेकों अस्पतालों की सैकड़ों करोड़ की पेंमेंट रुकी पड़ी है जिसके चलते वे कई बार इलाज करने से मना कर चुके हैं। कुल मिला कर यह प्रकोष्ठ कोई सेवा देने के बजाय लूट कमाई का अड्डा बन चुका है।
आईएएस संगीता तेतरवाल वैसे भी खुद को जन सेवक न समझ कर प्रशासक समझती हैं। अंबाला नगर निगम में तैनाती के दौरान उसने न्यायपालिका के आदेश की भी अनदेखी की थी, इस पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें बुरी तरह लताड़ा था।