केस तो अधिकारियों और कथित गोरक्षकों के खिलाफ दर्ज होना चाहिए

केस तो अधिकारियों और कथित गोरक्षकों के खिलाफ दर्ज होना चाहिए
August 26 18:57 2024

गुडग़ांव रोड पर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से दस गोवंशियों की मौत का मामला

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) गुडग़ांव रोड पर हनुमान मंदिर के पास शुक्रवार रात हाईवे की सड़क पर पसरे दस गोवंशियों की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई जबकि दो गोवंशी गंभीर रूप से घायल हो गए। आश्चर्य है, कि गोरक्षा के नाम पर गुडग़ांव के जमात अली का पशु धन छीन लेने वाला बिट्टू बजरंगी और पशु तस्करों की तलाश में सारी रात हाईवे व अन्य मुख्य मार्गों पर गश्त करने वाले उस जैसे ही दर्जन भर से अधिक कथित गोरक्षकों को हाईवे पर बैठी गायों की सुरक्षा का ख्याल नहीं आया। दरअसल उन्हेंं केवल कथित रूप से तस्करी किया जाने वाला गोवंश ही असुरक्षित लगता है, भले ही वाहन में पशु किसी पशु पालक के ही क्यों न हों। ऐसा नहीं है कि घटना के बाद से कथित गोरक्षक रातों में उन्हें सड़कों से हटाने लगे हों, आज भी इस हाईवे पर इक्का दुक्का जगह गोवंश सड़क पर खड़ा या पसरा हुआ दिख जाता है। हां, हादसा या चोरी होने पर ये पशु प्रेमी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इन गोवंशियों की मौत के जिम्मेदार सिर्फ कथित गोरक्षक ही नहीं हैं, नगर निगम, पुलिस महकमा भी हैं।

सुधी पाठकों को बताते चलें कि हादसा उसी गुडग़ांव रोड पर हुआ है जिस पर इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह में नगर निगम ने करीब 1.30 करोड़ की लागत से स्ट्रीट लाइटें लगाई थीं। अगर ये स्ट्रीट लाइटें जल रही होतीं तो चालक को सड़क पर बैठा ये गोवंश दूर से ही नजर आ जाता और वह गति नियंत्रित कर हादसा बचाते हुए निकल सकता था। लेकिन ये स्ट्रीट लाइटें जो प्रधानमंत्री के गुडग़ांव रोड स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) में आने के उपलक्ष्य में आनन-फानन लगवाई गई थीं वो स्थापना के बाद से ही जलना बंद हो गईं थीं।

यही नहीं तीसरे सप्ताह से ही लाइटें उखड़ कर गिरने लगी थीं। मज़दूर मोर्चा ने स्ट्रीट लाइटें लगवाने वाले भ्रष्टाचारी एक्सईएन और मंत्री गूजर के बेटा ओमदत्त की करतूतों के समाचार कई बार प्रकाशित किए लेकिन मंत्रियों की जी हुजूरी करने वाली आईएएएस निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास हमेशा उसका बचाव करती रहीं। यदि 1 करोड़ 30 लाख रुपयों की बंदरबांट न होती तो ये स्ट्रीट लाइटें जल रही होती और वाहन चालकों को काफी मदद मिलती, लेकिन गोवंश भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

एसएचओ सूरजकुंड ने बताया कि हादसा करने वाले वाहन की पहचान नहीं हो सकी है हालांकि कुछ वाहन संदिग्ध हैं जिनके मालिकों को नोटिस देकर बुलाया जा रहा है। समझने वाली बात ये है कि जिन्हें वो ढूंढते फिर रहे हैं वो तो खुद भुक्तभोगी हैं, पीडि़त हैं रात के अंधेरे में उनके साथ क्या हुआ होगा, उन पर क्या बीती होगी, कितना नुकसान हुआ होगा इसका अनुमान क्या ये सरकार लगा सकती है? दोषी तो खुद सरकार और इसकी विभिन्न एजेंसियां हैं जिन्होंने यातयात वाली सड़क को गाय-बैलों के बैठने का स्थान बना छोड़ा है।

सुधी पाठकों को ये भी जानना जरूरी है कि पूर्व सीएम खट्टर ने इसी गुडग़ांव रोड पर स्पीड रडार कैमरे लगवाए थे। नाइट विजन वाले ये कैमरे हर गुजरने वाले ओवरस्पीड वाहन का ऑनलाइन चालान भेजते थे। ये कैमरे गायब हैं, यदि ये कैमरे लगे होते तो बहुत संभावना है कि हादसा करने वाले वाहन की तस्वीरें भी मिल जातीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्पीड रडार कैमरे लगने से हाईवे पर लगाई जाने वाली इंटरसेप्टर पर तैनात पुलिसकर्मियों की ऊपरी कमाई खत्म होने लगी थी। खूब जोर शोर और प्रचार कर लगाए गए स्पीड रडार कैमरे मोटी कमाई में ब्रेक लगने के कारण आला अधिकारियों की मूक सहमति से चुपचाप उतार लिए गए। अगर ये कैमरे लगे होते तो पुलिस को खट्टर सरकार द्वारा संरक्षित वो गाय-बैल और बछड़े भी नजर आ जाते जो हाईवे पर तेज गति से चलने वाले वाहनों के हादसे का कारण बनते। आखिर खट्टर ने पुलिस को भी तो गोवंश की रक्षा के आदेश जारी किए हुए हैं। लेकिन ऊपरी कमाई जरूरी है अब चाहे गोवंश मरे या वाहन हादसों का शिकार हों या उनमें बैठे लोगों की मौत हो। हादसे के बाद पुलिस अपनी कागजी कार्रवाई तो मुस्तैदी से पूरी करेगी ही, हो सकता है कि यहां भी कमाई के कुछ रास्ते निकल आएं।

गोरक्षा के नाम पर जान लेने पर उतारू कथित गोरक्षक गुडग़ांव रोड पर दस गोवंशियों की मौत के बाद से चुप्पी साधे हैं। दरअसल, इसमें उन्हें हिंदू-मुसलमान की संभावना नजर नहीं आ रही, अन्यथा संघी दंगाई बिटुआ से लेकर न जाने कितने गोरक्षक सड़कों पर उतर चुके होते। इस घटना के बाद भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी है, आज भी सड़कों पर गोवंश वैसे ही बैठे नजर आ जाएंगे।

नाम न छापने की शर्त पर एक जागरूक नागरिक ने सरकार से सवाल किया कि गोरक्षा के हर उपाय किए जा रहे हैं, हर शहर में गोशालाएं बनाई जा रही हैं, पेट्रोल-डीजल पर काऊ सेस वसूला जा रहा है, गोरक्षकों और गोशाला मालिकों को सरकार मोटे पैकेज दे रही है, बावजूद इसके सड़कों पर केवल गोवंश ही आवारा घूमते नजर आते हैं, कोई भैंस, बकरी या अन्य पशु आवारा घूमते नहीं मिलते। जिस तरह से सरकारें गोरक्षा के नाम पर पैसा बहा रही हैं, बावजूद इसके पूजनीय पशुओं की दुर्दशा भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है। सरकार यदि सभी गोशाला मालिकों और गोरक्षकों के कार्यों का ऑडिट कराए तो बिहार के चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

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Mazdoor Morcha
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