फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ठेकेदारों से मिलीभगत कर सरकारी धन हड़पने की कला में माहिर हूडा-नगर निगम के सेवानिवृत्त अधिकारी एफमएडीए में पहुंच कर यहां भी पुराने दांंवपेंच लगा कर जेबें भर रहे हैं। सेक्टर 14-15 और 16-17 डिवाइडिंग रोड बनाने के नाम पर अधिकारी और ठेकेदार मिलकर करोड़ों रुपये का खेल कर गए। शिकायत होने पर एफएमडीए के अतिरिक्त सीईओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, जांच भी उन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों को करनी है जो नियमों को तोड़ मरोड़ कर अपने लिए रुपये निचोडऩे और सब कुछ सही दिखाने में माहिर हैं।
लूट कमाई में नगर निगम को भी पीछे छोडऩे वाले एफएमडीए अधिकारियों ने सेक्टर 14-15 और 16-17 डिवाइडिंग रोड के लिए मई 2023 में वर्क अलॉट किया था। 16 करोड़ के इस काम के लिए ठेकेदार को वर्क अलॉट होने के पंद्रह दिन यानी सात अप्रैल 2023 तक बैँक गारंटी के रूप में 80 लाख रुपये जमा करवाने थे। यह वह धन होता है जो काम पूरा न होने या निर्माण में कोई कमी रह जाने पर जब्त कर लिया जाता है। यह रकम तब तक जमा रहती है जब तक निर्माण कार्य एक निर्धारित समय पूर्ण नहीं कर लेता। सेक्टर 14-15 और 16-17 की डिवाइडिंग रोड के मरम्मत के लिए यह परफारमेंस गारंटी अवधि चार साल निर्धारित की गई थी, यानी चार साल में कोई भी टूट फूट होने पर ठेकेदार उसकी मरम्मत करेगा अन्यथा इस बैंक गारंटी से वो काम कराया जाता है। अधिकारियों ने एक और खेल किया कि परफार्मेंस गारंटी चार साल से घटा कर एक साल कर दी।
ठेकेदार के बेनामी पार्टनर की तरह काम करने वाले अधिकारियों ने पंद्रह दिन तो दूर साढ़े छह महीने तक यह बैंक गारंटी मनी जमा ही नहीं कराई। दबाव पड़ा तो 105 दिन बाद बिना जुर्माना लगाए जमा करवा दी गई। यह निर्माण कार्य 14 जून 2024 तक पूरा हो जाना चाहिए था ठेकेदार को भुगतान तो किया जाता रहा लेकिन काम कितना हुआ इसका कोई पुरसाने हाल नहीं था। नतीजा हुआ कि समय सीमा समाप्त होने के बावजूद एक चौथाई काम भी पूरा नहीं हो सका था। खेल यहां से शुरू हुआ, काम तो पूरा नहीं हुआ और एक साल का परफार्मेंस गारंटी का समय भी खत्म हो गया, यानी तकनीकी रूप से ठेकेदार की बैंक गारंटी को रोका नहीं जा सकता था। हुआ भी वही काम पूरा हुए बिना भी एफएमडीए यह बैंक गारंटी जब्त नहीं कर सका है, और यदि कोई टूट-फूट होती है तो ठेकेदार की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी यानी एफएमडीए को अपने खर्च पर यह काम कराना होगा।
परफार्मेंस गारंटी का ऐसा ही खेल एफएमडीए के अनेक अन्य कार्यों में भी होने की आशंका पर एसीईओ पार्थ गुप्ता ने सभी ठेकेदारों के खातों की जांच करने के आदेश दिए हैं। जो अधिकारी काम नहीं करने वाले ठेकेदार से साढ़े छह महीने तक बैंक गारंटी नहीं वसूलते हैं, काम पूरा नहीं होने पर ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते, उसे लाभ पहुंचाने के लिए परफार्मेंस गारंटी की समय सीमा घटा कर एक चौथाई कर सकते हैं उनकी जांच में सब कुछ ओके ही आना है।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि एफएमडीए द्वारा सेक्टर 15-15ए की विभाजक सडक़ की जो दुर्दशा हुइ है उसको लेकर मज़दूर मोर्चा ने विस्तृत जानकारी प्रकाशित की है। आज तक भी उस सडक़ का काम पूरा नहीं हो सका है। महज डेढ़ किलोमीटर की इस सडक़ के निर्माण में भी इन ‘होनहार’ अधिकारियों के कार्यकुशल ठेकेदारों ने सवा साल लगा दिए थे। अभी इस सडक़ को चालू हुए छह महीने भी नहीं बीते हैं कि इसमें दरारें पडऩे लगीं हैं और मरम्मत का काम साथ साथ चल रहा है।
समझा जा सकता है कि वीआईपी सडक़ बनवाने में जब ऐसी गुणवत्ता रखी गई जो बनते बनते टूट रही है तो सेक्टर 14-15 और 16-17 डिवाइडिंग रोड के क्या हाल होने हैं। अब सवाल ये पैदा होता है कि पार्थ गुप्ता ने जो आदेश दिए हैं कि दो दिन में जांच कर उन्हें रिपोर्ट दो, उसके बाद वो करेंगे क्या? उनके पल्ले कुूछ नहीं है क्योंकि लगभग तमाम इंजीनियर खेले खाए खुर्राट भरे हुए हैं, अधिक से अधिक उनको नौकरी से निकाल सकते हो, जिसकी उन्हें कोई विशेष जरूरत भी नहीं है, उन्होंने जो लूट कमाई करनी थी वो ठेकेदारों से कर ली है, रिकवरी करने और जेल भेजने का रिवाज इस देश में है नहीं।