बीते दिनों चंडीगढ मेयर के चुनाव को लेकर अनिल मसीह नामक पीठासीन अधिकारी ने जो घोटाला किया था उसे सारी दुनिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से देखा था। उस पर पुलिस एवं प्रशासन ने तो क्या एक्शन लेना था, हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेकर कोई नाटकबाज़ी करने की जरूरत नहीं समझी थी। मामला जब सुप्रीम कोर्ट के सामने और वह भी मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत हुआ तो उन्हें इतनी तो शर्म आई कि दोषी पीठासीन अधिकारी को तलब किया, उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया और खुली अदालत में बहुत सुंदर-सुंदर टिप्पणियां भी कीं। लेकिन इस सबके बावजूद उस दोषी अनिल मसीह का आज तक कुछ नहीं बिगड़ा है। उसे गिरफ्तार तक करने की जरूरत नहीं समझी गई है, मुकदमा चलाना तो दूर की बात है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस पूरे घोटाले की साजिश वहां के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह तोमर द्वारा रची गई थी। फरीदाबाद में बसने वाले अंधभक्त यह जानकर प्रसन्न हो सकते हैं कि यह उपायुक्त शहर की एक भाजपा नेता नीरा तोमर का सुपुत्र है। इस नाते वे सदैव पूर्व सीएम एवं भाजपा के लाडले रहे हैं। इस नाते इस तरह के छोटे-मोटे घोटाले कर देना तो उनकी कर्तव्य अदायगी में आते ही हैं।