टिकट नहीं कट रही है बाबू, जेब कट रही है!
दिल्ली म मो: मोदी जी जहाँ बैठे हैं यानी कि दिल्ली और मोदी जी जहाँ से चुन के आये हैं, मतलब बनारस, यहाँ आने जाने के लिए चलने वाली कई रेलगाडिय़ों में फ्लेक्सी फेयर लगाया जा रहा है। कोरोना काल के नाम पर इज्जत बचाने में जुटी भाजपा सरकार की मारक नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था ने हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीँ सरकार ने तय कर लिया है कि जब तक आम नागरिक के खून पसीने की कमाई की एक-एक पाई छीन नहीं लेगी चैन से न बैठेगी न बैठने देगी।
61 साल के राधेश्याम फरीदाबाद में रिक्शा चलाते हैं। सेक्टर 3 से सेक्टर 9 के आस-पास की हार्डवेयर दुकानों से माल उठाना और उनको घरों तक पहुंचा कर महीने में सात हजार कमा लेते हैं। बनारस के रहने वाले राधेश्याम लॉकडाउन में घर नहीं जा सके तो लोगों से मांग-मांग कर काम चलाया। जैसे ही लॉकडाउन खुला, रिक्शा चलने लगा पर कमाई पहले जैसे नहीं रही। अब कुछ कम कमाते हैं पर ये हैं कि छिटपुट काम मिल जाता है। इस बार त्यौहार पर गाँव जाने का सोचा तो लगा अब कभी गाँव जा ही नहीं सकेंगे। एक आदमी का ट्रेन का भाड़ा लगभग 1500 रूपया था और चालू डब्बा तो रहा ही नहीं जो बैठ लें। इसलिए अब यहीं रह गए कि छोड़ो दिवाली और छठ।
राधेश्याम की ही तरह राहुल ने अपनी माता की बनारस जाने के लिए ट्रेन में टिकट बुक करवाई। कोरोना के भय से एसी टू का टिकट लिया जो उन्हें लगभग 2100 रुपये का पड़ा। इतना महंगा टिकट लेकर पहली बार सफर करने जा रहीं उनकी माता की तबीयत कुछ ठीक न होने के कारण मात्र 4 घंटे बाद ही टिकट को कैंसिल करवाया तो पाया कि 600 रुपये काट लिए गए और बाकी के पैसे तीन दिन बाद खाते में आने का एक सन्देश भेज दिया गया आईआरसीटीसी द्वारा।
प्रधानमंत्री ने रेलवे को बिकने न देने का जुमला देकर पहली निजी ट्रेन तेजस को हरी झंडी दी थी। मीडिया ने महीनो शोर मचाये रखा कि कितनी रफ्तार से ट्रेन बनारस पहुच गई। कुछ दिन पहले वही ट्रेन अब बंद कर दी गई, आज मीडिया में कोई शोर नहीं कि क्यों बंद हुई, क्या कारण थे जो ट्रेन बंद हुई? तो कारण राधेशयाम और राहुल की समस्याओं से कुछ अलग नहीं। यदि जल्दी ही इनका निवारण आम आदमी के हक में नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि तेजस के साथ-साथ सभी रेलें बंद हो जाएँ।