मेवात को कूड़ा घर बनाने की साजिश… आईआरबी
की तैनाती के बाद एक और सरकारी पैंतरा
फरीदाबाद-गुडग़ांव का कूड़ा अब नूंह के पास फेंका जाएगा, एक तीर से कई शिकार
मजदूर मोर्चा की विशेष रिपोर्ट
फरीदाबाद: मेवात को लेकर हरियाणा सरकार के इरादे खतरनाक होते जा रहे हैं। हाल ही में उसके दो एक्शन साबित करते हैं कि मेवात को लेकर उसका खास एजेंडा है और उस एजेंडा को पूरा करने के लिए वह लगातार आगे बढ़ रही है। हरियाणा सरकार ने सबसे पहले खासतौर से मेवात इलाके के लिए रिजर्व बटालियन के 700 जवान तैनात करने का फैसला किया और अब मेवात में फरीदाबाद और गुडग़ांव का कूड़ा-कचरा फेंका जाएगा। इन दोनों फैसलों से मेवात के लोग वाकिफ हैं, और इस वक्त मेवात में इन मुद्दों पर लोगों का गुस्सा भडक़ रहा है। वहां कुछ छोटे-मोटे संगठन आंदोलन चला रहे हैं लेकिन उनकी अपनी कोई हैसियत नहीं है, इसलिए प्रभावशाली नहीं हैं।
मेवात बनेगा अब कूड़ाघर
फरीदाबाद और गुडग़ांव में घर-घर से कूड़ा उठाने का काम चाईनीज कम्पनी ईको ग्रीन के पास है। ईको ग्रीन कंपनी को सरकार ने फरीदाबाद-गुडग़ांव बॉर्डर पर बंधवाड़ी में एक खाली प्लाट पर कूड़ा फेंकने की जगह मुहैया करा दी। गुडग़ांव में कुछ पर्यावरणवादियों ने मुहिम छेडक़र बंधवाड़ी से कूड़ा घर यानी डंपिंग स्टेशन हटाने की मांग रखी, ताकि गुडग़ांव की आबोहवा साफ रहे। फिर इस आंदोलन को राजनीतिक रुख दे दिया गया। इसे भाजपा के सांसद और मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और बादशाहपुर के विधायक राकेश दौलताबाद ने लपक लिया। इन लोगों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बनाया तो डंपिंग स्टेशन बंधवाड़ी से फर्रुखनगर बदल दिया गया। लेकिन वहां के लोगों ने भी इसके खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाया और तब राव इंद्रजीत सिंह और विधायक दौलताबाद ने डंपिंग स्टेशन को फर्रुखनगर से मेवात में ले जाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने बिना देर लगाए इस मांग को स्वीकार कर लिया। सीएम ने निर्देश जारी कर दिया कि डंपिंग स्टेशन फर्रुखनगर से मेवात के किसी गांव में ले जाया जाए। इसके बाद राव इंद्रजीत और राकेश दौलताबाद में इसका श्रेय लेने की होड़ मची, वो अलग कहानी है।
अब मेवात के नूंह के पास कौराली गांव में डंपिंग स्टेशन बनाने का आदेश जारी किया गया है। अभी वहां काम शुरू होना है। यह जमीन सुलेमान पुत्र गुल खां, मूसा पुत्र रमजानी और उसमान खां पुत्र अतर खां की है। सरकार से इन्हें इस जमीन का किराया मिलेगा। सरकार इसे कचरा प्रबंधन का नाम देकर मेवात के विकास से जोड़ रही है। लोगों का कहना है कि मेवात के लोगों में शिक्षा की कमी का रोना सरकार और खासकर भाजपा रोती रहती है लेकिन पिछले छह साल में एक यूनिवर्सिटी या कोई और बड़ा शिक्षा संस्थान तक मेवात को भाजपा सरकार नहीं दे सकी, जबकि उसके पास मौका था मेवात के लोगों की राय बदलने का। हमें विकास के नाम पर आईआरबी और कूड़ा करकट मिल रहा है। हम किसी भी कीमत पर मेवात में डंपिंग स्टेशन नहीं बनने देंगे।
नूंह से कांग्रेस विधायक और हरियाणा विधानसभा में डिप्टी सीएलपी लीडर आफताब अहमद का कहना है कि केंद्र सरकार वैसे तो इस जिले को एक्सप्रेशनल जिलों की सूची में बताकर विकास करने की बात कह रही है, लेकिन किसी विकास की परियोजना के बजाय जिले के पर्यावरण को दूषित करने की साजिश रची जा रही है। मेवात के लोग आसपास के गांवों के लोगों की सेहत पर असर डालने वाली परियोजना किसी कीमत पर भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। लोगों को किसी भी तरह का संघर्ष करना पड़ा तो इससे पीछे नहीं हटेंगे। आफताब अहमद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह इस परियोजना को नूंह विधानसभा के कौराली गांव में स्थापित न करें, अगर उन्हें मेवात की तरक्की की इतनी ही चिंता है , तो यहां पर कोई यूनिवर्सिटी कोई हाईवे या कोई उद्योग धंधे इत्यादि लेकर आएं, ताकि इस जिले का विकास हो सके।
बहरहाल, मेवात में डंपिंग स्टेशन बनाए जाने के खिलाफ आंदोलन की स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। सिर्फ कांग्रेस विधायक का कड़ा बयान सामने आया है और इसके बाद मेवात में इस मुद्दे पर पंचायतों का दौर शुरू हो गया है। मेवात विकास सभा ने गुरुवार को इस संबंध में बैठक बुलाकर आंदोलन छेडऩे की चेतावनी दे दी है।
मेवात में आईआरबी की तैनाती के पीछे नीयत क्या है
मेवात में इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की तैनाती को लेकर तमाम तरह के सवाल खड़े हो गए। मेवात में बेहद गरीबी है और प्रदेश के तमाम इलाकों के मुकाबले यह इलाका सबसे शांतिपूर्ण है। यहां मौजूदा सरकार को जो एक बात खटकती है, वो है यहां की मुस्लिम आबादी। सरकार ने पहले पशु क्रूरता निवारण कानून और कड़ा कर मेवात में कथित तौर से पशु काटे जाने पर रोक लगाने की कोशिश की। इसके बाद गाय संरक्षण के लिए एक आयोग बनाया गया और एक टास्क फोर्स बनाई गई। इन सभी के मुख्यालय मेवात और गुडग़ांव में रखे गए। इसके बाद आरएसएस का प्रचार अभियान चलाने वाली वेबसाइटों ने मेवात में हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन जबरन किए जाने की फर्जी खबरें चलाईं। इसकी कई बार खुद सरकारी एजेंसियों ने जांच की और हर बार सूचनाएं झूठी साबित हुईं। लेकिन आरएसएस का एजेंडा चूंकि मेवात के लिए अलग से बनाया गया है तो वहां खट्टर सरकार पर दबाव बनाया गया कि मेवात की खराब कानून व्यवस्था को संभालने के लिए अलग से फोर्स तैनात की जाए।
खट्टर सरकार की आईआरबी की तैनाती आरएसएस के उसी एजेंडे को आगे बढ़ाने का सिलसिला है। इसके तहत सात सौ जवानों की तैनाती मेवात में की जा रही है। इस बटालियन का कमांडेंट मेवात के एसपी को बनाया गया है। यानी जो भी मेवात का एसपी होगा, उसके मातहत आईआरबी के ये सात सौ जवान होंगे। आजकल इन जवानों की भोंडसी में ट्रेनिंग चल रही है। जिन्हें पुलिस के आला अफसर ट्रेनिंग देते हैं। कई बार आरएसएस के प्रचारकों को यहां मंडराते देखा जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि दरअसल, इन जवानों को मेवात के बारे में उल्टीसीधी जानकारी देकर तैयार किया जा रहा है। कोई ताज्जुब नहीं कि जिस तरह यूपी में पीएसी के कई घिनौने साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ाने वाले मामले सामने आए, ठीक उसी तरह की हरकत आईआरबी भी मेवात में न करने लग जाए। अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने शांतिप्रिय मेवात में आईआरबी की तैनाती को मुद्दा नहीं बनाया है। लेकिन मेवात के जागरूक लोग इस स्थिति को भांप गए हैं, वे समझ चुके हैं कि आईआरबी बटालियन उनकी भलाई के लिए मेवात नहीं लाई जा रही है।
जो अंग्रेजों न डरे तो इनसे क्या डरेंगे
मेवात के लोग अपने गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहते हैं कि हमारे बुजुर्ग जब मुगलों और अंग्रेजों से नहीं डरे तो अब तो फिर भी लोकतंत्र है। हम इस सरकार से नहीं डरने वाले। हर जुल्म का मुकाबला करना हमें आता है। कांग्रेस के लंबे शासनकाल और अब भाजपा के छह साल के शासनकाल में मेवात को उसका वह हक नहीं मिला, जो फर्ज उसने देश की आजादी की लड़ाई में और उससे भी पहले मुगल शासकों से टक्कर लेते हुए निभाया है। सन् 1526 में हसन खां मेवाती के लड़ाकों ने बाबर की सेना से जबरदस्त युद्ध किया। बाबर ने हसन खां मेवाती को इस्लाम का वास्ता दिया लेकिन हसन खां मेवाती झुकने को तैयार नहीं हुए। अंत में बाबर ने उन्हें बंधक बना लिया।
हरियाणा सरकार के गुडग़ांव गजेटियर के मुताबिक मेव मुसलमानों ने सन् 1800 के शुरुआत से ही अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। 1803 में अंग्रेज-मराठों के बीच हुए लसवाड़ी के युद्ध में मेव छापामारों ने दोनों ही सेनाओं को नुकसान पहुंचाया और लूटपाट की थी। अंग्रेज इससे काफी नाराज थे। सन् 1806 में नगीना के नौटकी गांव के रहने वाले मेवातियों ने मौलवी ऐवज खां के नेतृत्व में अंग्रेज सेना को काफी नुकसान पहुंचाया।
इस हार से अंग्रेज घबरा गए और दिल्ली के रेजीडेंट मिस्टर सेक्टन को सन् 1807 में अपने अधिकारियों को एक पत्र के जरिए समझाया कि मेवातियों के साथ समझौता कर लेना चाहिए। हालांकि ये अंग्रेजों की चाल थी और वो सही समय का इंतजार कर रहे थे, जो मौका उन्हें नवंबर 1857 में मिल गया। बताया जाता है कि 10 मई 1857 को चांद खान नामक मेवाती सैनिक ने अंग्रेजों पर गोलियां बरसा दीं थीं। इस पर अंग्रेजों ने मेवात के रूपडाका गांव के 425 मेव मुसलमानों को तो अंग्रेजों ने गोली मार दी थी, जबकि अलग-अलग घटनाओं में विद्रोह की वजह से 470 मेवातियों को उनके अपने गावों में फांसी पर लटका दिया गया। दस गांवों को अंग्रेजों ने जला दिया था। उन शहीदों की याद में यहां के गई गांवों में मीनारें बनवाई गई हैं।
कचरा अमूल्य संसाधन भी है
सर्वविदित है कि फरीदाबाद, गुडग़ांवा सहित पूरे एनसीआर के लिए जो कचरा निस्तारण एक भयंकर समस्या बना हुआ है वही कचरा एक अमूल्य संसाधन भी हो सकता है। आज टैक्नोलॉजी इतनी विकसित हो चुकी है कि इसी कचरे से बॉयो खाद, कुकिंग गैस व बिजली जैसी वस्तुएं पैदा की जा रही है। लेकिन इस देश में नालायक एवम् शासक वर्ग ने इस टैक्रोलॉजी के इस्तेमाल के नाम पर सैकड़ों करोड़ों रूपए तो डकार लिये लेकिन कचरा निस्तारण ज्यों का त्यों समस्या बना हुआ है।
सुधी पाठक जानते होंगे कि फरीदाबाद नगर निगम ने बंधवाड़ी के स्थान पर जो बीसियों एकड़ जमीन के साथ-साथ 70 करोड़ रूपया एक कम्पनी को दिया था वह सब बर्बाद होकर रह गया है। केवल यही नहीं ऐसी ही स्थिति दिल्ली जैसे महानगर में भी बनी हुई है। उचित समाधान निकालने की बजाये हमेशा पिछड़े इलाकों को बड़े शहरों का डस्टबिन बनाने की फिराक में रहते हैं।