सबका भला हो सबको न्याय मिले-मोदी
यूपी के प्रयागराज के परेड मैदान में शनिवार को मनाये गये सामाजिक अधिकारिता दिवस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि हर व्यक्ति का भला हो और हर व्यक्ति को न्याय मिले। भारतीयों के हितों की रक्षा व उनकी सेवा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दो दिन तक दिल्ली में चले दंगों को चुपचाप देखने के बाद, जिसमें करीब 60 लोग मारे गये और सैंकड़ों घायल हैं, प्रधानमंत्री जी को शनिवार को यूपी में जाकर ये बात याद आई। उससे पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली में उनके कार्यकर्ता अपने नेताओं के आह्वान पर काफी बड़ी मुस्लिम आबादी का ‘भला कर चुके थे। सैंकड़ों दुकानें व मकान जला चुके थे व सैंकड़ों लोगों पर कातिलाना हमला कर चुके थे। उन्होंने सबका भला करने व न्याय देने की पूरी कोशिश की लेकिन फिर भी कोई कसर रह गई होगी तो वो अब दिल्ली पुलिस पूरी कर देगी। बेचारी तीन दिन चुपचाप बैठी वहां अब तक अपनी आंखों के सामने न्याय होता देख रही थी।
सभी शरणार्थियों को नागरिकता देकर रहेंगे-अमितशाह
कलकत्ता में रविवार को एक रैली में केन्द्रीय गृह मंत्री अमितशाह ने कहा कि जब तक नये नागरिकता कानून के तहत देश में सभी शरणार्थियों को नागरिकता नहीं दे दी जाती तब तक नरेन्द्र मोदी सरकार नहीं रूकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2020 में होने वाले राज्य के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी दो तिहाई सीटें जीतकर सरकार बनायेगी।
अमितशाह जितने दूसरे देश के शरणार्थियों को नागरिकता देने पर उतारू है उतना ही अपने देश के नागरिकों को शरणार्थी बनाने पर भी उतारू हैं ताकि हिसाब बराबर रहे। अभी दिल्ली में दंगों में हजारों नागरिकों को शरणार्थी बना कर वे इसकी शुरूआत कर चुके हैं। वहां भी उन्होंने दो तिहाई यानी लगभग 48 सीटों का लक्ष्य रखा था पर वो हासिल नहीं हो पाया क्योंकि शायद नागरिक से शरणार्थी बनाने का काम वहां थोड़ी देर से हुआ। शायद बंगाल में वो ऐसी गलती नहीं करेंगे। पहले वहां के नागरिकों (मुस्लिमों) को शरणार्थी बनायेंगे और फिर चुनाव करवायेंगे। दो तिहाई बहुमत मिलना फिर तय है ही।
ठाड्डा मारै रोवण भी ना दे
भाजपा के दिल्ली के भूतपूर्व विधायक नन्द किशोर गर्ग ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की थी कि दंगों में मारे गये लोगों को तुरन्त सहायता या उनकी सम्पत्ति के नुक्सान का मुआवजा न दिया जाये। ध्यान रहे कि दिल्ली में हाल ही में हुये दंगों में सैंकड़ों लोगों के घर, दुकान व दफ्तर आदि जला दिये गये थे। दिल्ली सरकार ने इन बर्बाद लोगों को अपनी जिंदगी दुबारा से शुरू करने के लिये कुछ वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।
नन्द किशोर गर्ग का तर्क ये था कि पहले जांच हो कि हिंसा के अभियुक्त कौन है और पीडि़त कौन। नन्द किशोर जी शायद यह जानते हैं कि पीडि़तों में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा मुसलमान हैं क्योंकि हमला उनकी (यानी बीजेपी) पार्टी ने ही किया है। इसलिये वो उनको कोई मदद नहीं पहुंचने देना चाहते। इस घृणित और अमानवीय याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने ठीक ही कूड़ेदान में फेंक दिया।
गुड़ खाये गुलगुलों से परहेज
दिल्ली में पिछले हफ्ते हुये दंगों में 60 के करीब लोग मारे गये और कई सौ करोड़ की सम्पत्ति जला दी गई। करीब तीन दिनों तक चले इन दंगों में दिल्ली पुलिस हमलावर बीजेपी के गुंडों की भीड़ के साथ मिलकर हिंसा और आगजनी में भाग लेती दिखी। दिल्ली की केजरीवाल और केन्द्र में मोदी व शाह की सरकार भी मुंह फेरकर बैठी रही जिससे उनकी इस हिंसा के षडयन्त्र में भागीदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अब दिल्ली पुलिस और सरकार दोनों अखबारों में बड़े-बड़े इश्तिहार दे रहे हैं कि लोग हिंसा फैलाने वाले मैसेज न भेजे। अब क्या हो गया भाई अभी और शामिल रहो इस खेल में। जब गुड़ ही खा लिया तो अब गुलगुल्लों से परहेज क्यों।
-जुम्मन मियां पंक्चर वाले