, साथ लाई महिला की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘‘अभी तेरे खिलाफ इस लडक़ी से बलात्कार का केस दर्ज कराता हूं, तू जानता नहीं मेरी पहुंच को।’’ इतना सुनते ही तथा सांगवान का पिछला आपराधिक इतिहास ध्यान में रखते हुए डॉक्टर साहब की तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी।

, साथ लाई महिला की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘‘अभी तेरे खिलाफ इस लडक़ी से बलात्कार का केस दर्ज कराता हूं, तू जानता नहीं मेरी पहुंच को।’’ इतना सुनते ही तथा सांगवान का पिछला आपराधिक इतिहास ध्यान में रखते हुए डॉक्टर साहब की तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी।
May 11 07:07 2020

प्रशासनिक संरक्षण में फार्मासिस्ट सांगवान ने चमकाई जालसाज़ी व गुंडागर्दी

बल्लबगढ (म.मो.) वीरेंद्र सांगवान बतौर फार्मासिस्ट यहां के सिविल अस्पताल में तैनात है। तैनाती बेशक इसकी फार्मासिस्ट की है लेकिन काम इसका घोटाले एवं फ्रॉड करने का है। इसका ताज़ा-तरीन फ्रॉड 30 अप्रैल का सामने आया है, जिसके द्वारा यह रोहित गर्ग नामक एक प्रशिक्षु फार्मासिस्ट को बिना प्रशिक्षण लिये ही प्रमाणपत्र दिलाना चाहता था। इस तरह का प्रमाणपत्र यहां के एसएमओ (सीनियर मेडिकल अफसर) डॉक्टर मान सिंह के हस्ताक्षर के बगैर जारी नहीं हो सकता था। लिहाज़ा यह फ्रॉडी प्रमाणपत्र के तमाम का$गजात तैयार करके रोहित गर्ग व एक अन्य प्रशिक्षु महिला फार्मासिस्ट को साथ लेकर डॉ. मान सिंह के दफ्तर में गया। उन्होंने गर्ग को देख कर कहा कि इसे तो उन्होंने कभी अस्पताल में देखा ही नहीं तो प्रमाणपत्र कैसे दे दें? इस पर फ्रॉडी सांगवान ने हाजरी रजिस्टर पेश कर दिया जिसे देखते ही डॉक्टर ने रजिस्टर में किये गये फ्रॉड को पकड़ लिया।

काम बिगड़ता देख कर सांगवान तैश में आ गया और लगा डॉक्टर को धमकाने व गालियां देने। इसी बीच उसने दफ्तर का दरवाज़ा बंद करते हुए, साथ लाई महिला की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘‘अभी तेरे खिलाफ इस लडक़ी से बलात्कार का केस दर्ज कराता हूं, तू जानता नहीं मेरी पहुंच को।’’ इतना सुनते ही तथा सांगवान का पिछला आपराधिक इतिहास ध्यान में रखते हुए डॉक्टर साहब की तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी। उन्होंने जान छुड़ाने के लिये आधे-अधूरे कागजात पर दस्तखत कर दिये और इसके साथ ही उन्होंने जि़ले के सिविल सर्जन डॉक्टर कृष्ण कुमार को पत्र लिख दिया कि प्रमाणपत्र फर्जी है, इसे ज़ारी न किया जाये। इसके बाद डॉक्टर मान सिंह लोटस नामक एक स्थानीय अस्पताल में कोई जांच करने पहुचे तो वहां भी यह फ्रॉडी पहुंच गया और डॉक्टर को गंदी से गंदी गालियां वहां के स्टाफ के सामने बकी व जान से मारने की धमकी भी दी।

डॉक्टर ने सारे मामले की तहरीर खुद मिल कर एसएचओ आदर्श नगर कैलाश को दी। केस दर्ज करके पुलिस कार्यवाही करने की उपेक्षा एसएचओ ने उल्टे डॉक्टर को ही डराना-समझाना शुरू कर दिया कि क्या रखा है केस दर्ज कराने में इसके बड़े लम्बे हाथ हैं, अनेकों डीसीपी आदि के फोन इसकी सिफारिश में आ चुके हैं, यह उल्टे तुम्हें ही किसी केस में फंसा कर खड़ा कर देगा। इसलिये बेहतरी इसी में है कि राज़ीनामा कर लो। डॉक्टर द्वारा कई दिन पूरा ज़ोर लगाने व थाने के चक्कर लगाने के बावजूद भी जब केस दर्ज नहीं हुआ तो डॉक्टर ने उपायुक्त यशपाल यादव व पुलिस आयुक्त केके राव को सारी व्यथा बयान की, तब कहीं जाकर लंगड़ा सा मुकदमा दर्ज हुआ, यानी केवल 506 व 327 आईपीसी के तहत जबकि कायदे से 186व 353 आईपीसी के अलावा फर्जी प्रमाणपत्र बनाने की भी धारायें लगनी चाहिये थीं।

एसएचओ द्वारा डॉक्टर को डराने धमकाने के लिये किन्हीं उच्चाधिकारियों के दिये गये हवाले की बात सच हो या न हो परन्तु उपायुक्त व पुलिस आयुक्त के नोटिस में आने के बावजूद भी इतने दिन बाद केस का दर्ज होना और वह भी कमजोर धाराओं में, स्वत: सिद्ध करता है कि इस फ्रॉडी को कहीं न कहीं से तो प्रशासनिक संरक्षण हासिल है; वरना जि़ले के इतने बड़े अधिकारियों के नोटिस में बात आने के बाद सबसे पहले तो उस एसएचओ की ही जवाब-तलबी हो जानी चाहिये थी और सही धाराओं में मुकदमा दर्ज होता जो वह दो-चार दिन तो हवालात में रहता। इसी प्रशासनिक ढील एवं संरक्षण के चलते अपराधी छुट्टा घूम रहा है और डॉक्टर को धमकी पर धमकी दिये जा रहा है।

सांगवान पुराना घोटालेबाज़ है

आपराधिक घोटालेबाज़ी करना इसका काफी पुराना पेशा है। इससे सम्बन्धित चार खबरें ‘मज़दूर मोर्चा’ के जनवरी-फरवरी 2019 के अंकों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। 6-12 जनवरी शीर्षक चिकित्सा के लिये नहीं, लुटाने के लिये बजट है,13-19 जनवरी शीर्षक बीके अस्पताल:सरकारी खजाने में सेंध, अनाधिकृत धन निकासी, 27-2 $फरवरी शीर्षक कैदी को जेल से अस्पताल शिफ्ट करने का मामला:हाईकोर्ट ने दिये जांच का आदेश, 3-9 फरवरी शीर्षक उपायुक्त के आदेश पर सांगवान पुन: बीके अस्पताल में तैनात, से प्रकाशित की गयी थीं।

घोटालेबाज़ी में माहिर सांगवान पहले तो बड़े डॉक्टरों, यहां तक कि पीएमओ सीएमओ तक को अपने धंधे में हिस्सेदार बनाने का प्रयास करता है, बात न बने तो यह दायें-बायें से प्रशासनिक सि$फारिश लगवाने के अलावा डराने-धमकाने का भी काम करता है। अपने इसी हुनर के चलते बल्लबगढ में तैनाती होने के बावजूद यह जि़ले के प्रमुख बीके अस्पताल में अपनी अस्थायी तैनाती को सदैव बनाये रखता है। इसी अस्पताल एवं सीएमओ कार्यालय के द्वारा ही जि़ले भर की करोड़ों रुपये की खरीदारी व भर्तियां तो होती ही हैं, अनेकों प्रकार के प्रमाणपत्र भी यहीं से जारी होते हैं। इन सभी कामों में कमिशनखोरी व रिश्वतखोरी का मोटा धंधा सांगवान यहीं से कर सकता है।

आज भी तैनाती बल्लबगढ में होते हुए यह बीके अस्पताल में अस्थायी ड्यूटी पर तैनात है और तरह-तरह की खरीदारियों में जुटा हुआ है। अपनी इस अस्थायी तैनाती के लिये इसे केवल जि़ले के सीएमओ (सिविल सर्जन) को ही काबू करना होता है। इसके लिये यदि सीएमओ खूद व खूद लेन-देन के आधार पर राजी न हो तो यह अन्य हथकंडे अपनाता है।  इसे लेकर ‘मज़दूर मोर्चा’ ने सीएमओ डॉक्टर कृष्ण कुमार से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने सा$फ कह दिया कि मेरे से हाथ जुड़वा लो पर इस बावत कोई बात न करो।

इस पर संवाददाता द्वारा अधिक जोर दिये जाने पर उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएमओ डॉक्टर राजेश से बात कर लो। पुछने पर डॉक्टर राजेश ने बात को थोड़ा घुमाते हुए कहा कि उनके यहां स्टाफ की कमी के चलते सांगवान को अस्थायी ड्यूटी पर यहां लगाया जाता है। यदि स्टाफ की कमी है तो सांगवान को ओपीडी में दवाई बांटने के लिये बैठा कर वहां से किसी फार्मासिस्ट को खरीदारी पर क्यों नही लगाया जाता, सांगवान को ही खरदारी में क्यों लगाया जाता र्है? इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था। मामला स्पष्ट है कि सांगवान की पकड़ यहां काफी अच्छी है।

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Mazdoor Morcha
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