मोदी जी ने मन की बात में स्वदेशी खिलौने बनाने की बात इसलिये की थी क्योंकि रिलायंस के अम्बानी ने एक खिलौने बनानी वाली बड़ी कंपनी खरीदी थी और उस के लिये अम्बानी को हरिद्वार में ‘टाय पार्क’ के नाम पर जमीन अधिग्रहित करके दी जा रही है।

मोदी जी ने मन की बात में स्वदेशी खिलौने बनाने की बात इसलिये की थी क्योंकि रिलायंस के अम्बानी ने एक खिलौने बनानी वाली बड़ी कंपनी खरीदी थी और उस के लिये अम्बानी को हरिद्वार में ‘टाय पार्क’ के नाम पर जमीन अधिग्रहित करके दी जा रही है।
September 05 14:07 2020

युवाओं का इन्टरनेट विद्रोह

मोदी के ‘मन की बात‘ कार्यक्रम को

दुत्कारा, इसे बताया मन की बकवास

 

युवाओं का प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गुस्सा अपने चरम पर है। 30 अगस्त को हुये अपने मासिक प्रवचन ‘मन की बात’ में मोदी सिर्फ देसी कुत्ते पालने व खिलौने बनाने की बात तक सीमित रह गये जबकि युवा उनसे रोजगार और पढ़ाई के बारे में सरकार के प्रयासों को सुनना चाह रहे थे। प्रधानमंत्री की इस जुमलेबाजी से तंग आकर देश के युवाओं ने इस बार विद्रोह का बिगुल फूंक दिया।

बीजेपी द्वारा हर बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम को बहुत पसन्द किया जाने वाला कार्यक्रम बताया जाता था। सो गुस्साये बेरोजगार छात्रों व युवाओं ने इस बार इसे ही निशाना बनाया। इसे ‘मन की बात’ की जगह ‘मन की बकवास’ कह के इस पर कटाक्ष किये जाने लगे और ‘यू ट्यूब पर प्रधानमंत्री कार्यालय के पेज पर डाले गये इस वीडियो पर उन्होंने धड़ाधड़ ‘नापसन्द’ का बटन (डिसलाइक) दबाना शुरू कर दिया। 31 अगस्त तक मोदी जी के मन की बात को दुत्कारने वालों की संख्या जब पांच लाख तक पहुंचने को हुयी और इन्टरनेट पर जब हल्ला मचा तो पहले तो बीजेपी ने इसे कांग्रेस की साजिश बताया लेकिन जब उससे भी विरोध का तूफान नहीं रूका तो 1 सितम्बर को इसमें विदेशी हाथ बताया जाने लगा। कहा जाने लगा कि भारत में चाइनीज ऐप  पर बैन से बौखलाकर चीन ये सब कर रहा है। लेकिन फिर भी जब वीडियो के ‘नापसंद’ की संख्या 10 लाख तक पहुंचने ही वाली थी (सिर्फ 6000 कम रह गयी थी) तो इस पर लगे पसंद, नापसंद और टिप्पणी (कमेंटस) के बटन बंद कर दिये गये यानी ये ‘आप्शन’ हटा लिये गये। जाहिर है तब तक मोदी और बीजेपी की दुनिया में जितनी भद्द पिटनी थी वो पिट चुकी थी। बता दें कि तब तक इस पर लाइक सिर्फ दो लाख ही आये थे।

याद रहे कि 6 करोड़ सदस्यों के साथ बीजेपी दुनिया में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है। फिरर भी उसके प्रधानमंत्री के वीडियो पर सिर्फ दो लाख ‘पसंद’ और दस लाख ‘नापसंद’ दर्ज होना ये दिखाता है कि बीजेपी के सदस्य भी मोदी को अब पसंद नहीं करते हैं। क्योंकि उनके द्वारा उठाये जा रहे आर्थिक कदमों से बड़े पूंजीपतियों को फायदा हो रहा है और छोटे-मोटे काम-धंधे, दुकान करनेवाले जो बीजेपी के पक्के समर्थक थे उनको नुक्सान। इसीलिये बड़ी संख्या में बीजेपी का ये वोटर उससे विमुख हो रहा है। इसलिये जरूरी है कि बीजेपी या तो अपनी इस नीति को बदले या नेता को। क्योंकि नीति तो नहीं बदली जायेगी लिहाजा मोदी का बदला जाना तय होता जा रहा है।

चलते-चलते ये भी बता दें कि मोदी जी ने मन की बात में स्वदेशी खिलौने बनाने की बात इसलिये की थी क्योंकि रिलायंस के अम्बानी ने एक खिलौने बनानी वाली बड़ी कंपनी खरीदी थी और उस के लिये अम्बानी को हरिद्वार में ‘टाय पार्क’ के नाम पर जमीन अधिग्रहित करके दी जा रही है।

                       –अजातशत्रु

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