सोनाली फोगाट: संघी-भाजपाईयों का असली बदरंग चेहरा, कुतर्कों द्वारा गुंडई को सही सिद्ध करने में जुटे हैं
मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
बीते विधानसभा चुनावों से पूर्व सोनाली टिक-टॉक के माध्यम से नाच-गा कर लोगों का मनोरंज किया करती थी। भाजपा नेतृत्व को आदमपुर विधानसभा से कुलदीप बिशनोई के मुकाबले चुनाव लडऩे वाला जब कोई न मिला तो उसने इस टिक-टॉक स्टार को ही प्रत्याशी बना दिया, जो चुनाव में बुरी तरह हार गयी।
सोनाली चुनाव बेशक हार गयी लेकिन दिल्ली स्थित भाजपा हाई कमान के माध्यम से राजनीति के अखाड़े में उतरने वाली यह महिला किसी भी तरह अखाड़े में डटे रहना चाहती है। जाहिर है इसके लिये कुछ तो ऐसा करना होगा जिससे वह सुर्खियों में बनी रह सके। हर मोर्चे पर फिसड्डी एवं रसातल में जाती भाजपा के पास जनहित में करने-धरने को तो है कुछ नहीं, लिहाज़ा मार्केट कमेटी के सचिव को पीट कर व अपने गुंडों से पिटवा कर मीडिया में छा जाने का प्रयास किया।
संघ एवं भाजपा को अपने सांगठनिक एवं मीडिया प्रबन्धन के हुनर पर इतना भरोसा है कि वे रस्सी को सांप व सांप को रस्सी बना सकते हैं । इसी के दम पर सारा संगठन सोनाली के पीछे लामबंद हो गया और सोनाली की गुंडई को सही ठहराने में जुट गया। जब संगठन इतना खुल कर आ जाये तो निरीह खट्टर सरकार की क्या औकात जो पार्टी की उभरती ‘प्रतिभाशाली’ नेता की काली करतूत का संज्ञान ले सके । लिहाज़ा अब तक हिसार पुलिस ने न केवल सोनाली के विरुद्ध बहुत ही मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज किया बल्कि सोनाली के निराधार बयान पर पीडि़त कर्मचारी के विरुद्ध भी केस दर्ज कर लिया है।
घटनाक्रम को देखते हुए सोनाली के पूरे षडय़ंत्र को समझिये। वह पहले हिसार मंडी स्थित सचिव सुलतान सिंह के कार्यालय पहुंचती है। मंडी में घूम रहे सचिव को सूचित किया जाता है तो वह द$फ्तर में आता है। वहां कुछ देर बात-चीत करने के बाद सोनाली उसे बालसमंद मंडी में पहुंचने के लिये कहती है। वहां वह सचिव को अकेले में एक शैड के पास लेजा कर फर्श आदि की बातें करती है। कुछ ही दूरी पर तीन गाडिय़ों में भर कर आये उसके ‘कार्यकर्ता’ इशारे की इन्तज़ार में घात लगाये खड़े हैं। इशारा पाते ही वे सचिव पर टूट पड़ते हैं। उनसे पिटते, बचते व भागते सचिव ने एक आढती की दुकान में घुस कर बचना चाहा तो वहां खुद सोनाली ने, कुर्सी पर बैठे सचिव को गिन कर 6 थप्पड़ व चप्पल मारी। यह सब अनेकों आढतियों व सोनल की सुरक्षा में लगी पुलिस की मौजूदगी में होता रहा और कार्यकर्ता वीडियो बना कर वायरल करते रहे ताकि इलाके में उनकी दबंगई का सिक्का चलने लगे।
सोनाली के तर्क देखिये। वे कहती हैं कि सचिव ने उन्हें अपशब्द कहे। अव्वल तो वहां कोई ऐसी परिस्थिति ही नहीं थी कि वह उसे कोई अपशब्द कहता, दूसरे कब, क्या और किसके सामने अपशब्द कहे, इसका कोई ब्योरा वह नहीं देती। यदि अपशब्द कहे भी हों तो उसे गुंडागर्दी करने का अधिकार किसने दे दिया? यदि नेतागण जनता को यही दिखायेंगे कि अपशब्द कहने का बहाना लेकर जिसको, जब जी चाहे पीट लो तो फिर पुलिस एवं समूची न्याय प्रक्रिया की क्या जरूरत रह जायेगी? शायद संघ एवं भाजपा का यही तालीबानी एजेंडा है।
दूसरे सोनाली खुद में कोई पब्लिक ऑथोरिटी नहीं हैं। उनके पास उतने ही सीमित अधिकार हैं जितने किसी भी नागरिक के पास होते हैं। सत्तारूढ दल की सदस्यता होने के नाते वह सचिव पर बेजा दबाव बनाये हुए थी। उसे कोई अधिकार नहीं था कि वह सचिव को बालसमंद मंडी में बुला कर ले जाये और चने की खरीद न होने, शैड व फर्शों की कमी को लेकर सचिव जैसे एक अदना कर्मचारी से उलझती फिरे। यदि उन्हें वास्तव में ही चने की खरीद या मंडी में अपर्याप्त सुविधाओं से तकलीफ थी तो जि़ले में बैठे एक से बड़े एक अधिकारी से कहती, मंडी बोर्ड के चेयरमैन, सम्बन्धित मंत्री अथवा मुख्यमंत्री से कहती। लेकिन उन्हें न तो किसानों से कोई हमदर्दी है न मंडी की समस्या से कुछ लेना-देना था, उसे तो गुंडई द्वारा इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज करनी थी, ठीक वैसे ही जैसे रंगदारी मांगने वाले गुंडे किसी व्यापारी की हत्या या अपहरण करके अपना सिक्का चलाते हैं।
सोनाली अपनी सफाई में सचिव पर अनेकों तरह के आरोप लगाने के साथ-साथ उस पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाती है। उसके मुताबिक सचिव आढतियों व किसानों को तंग कर-कर के उनसे अवैध वसूली करता है जिसके बल पर उसने अकूत सम्पत्ति एकत्र कर ली है। यदि सोनाली के सारे आरोप सही भी हैं तो बीते 6 साल से उनकी खटारा सरकार आखिर कर क्या रही है? क्यों नही, अब तक उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की गयी? क्या अब सरकार ने कानूनी कार्यवाही खुद न करके सोनाली जैसों को यह काम सौंप दिया है?
जहां तक बात भ्रष्टाचार, और मंडियों में किसानों की दुर्दशा की तो वह न केवल हिसार में बल्कि पूरे राज्य और हर महकमे में भ्रष्टाचार के नये-नये रिकार्ड बनते जा रहे हैं जबकि यह सत्तारूढ नेताओं के संरक्षण के बिना संभव नहीं। हां यह संभव हो सकता है कि सोनाली के संरक्षण में अभी कोई भ्रष्टाचारी न आ पाये हों क्योंकि अभी तक किसी भी भ्रष्टाचारी ने उसकी औकात का ‘सही’ मूल्यांकन न किया होगा। इस वारदात के बाद उनका मूल्यांकन बढऩा स्वाभाविक है जिसके चलते अब उनके संरक्षण में भी भ्रष्टाचारी आने लगेंगे।
पीडि़त सचिव के समर्थन में कर्मचारी संगठन जरूर कुछ मरी-मरी आवाज में मुद्दे को उठाने का प्रयास कर रहे हैं। परन्तु सरकार अपने कर्मचारी नेताओं की औकात से बखूबी वाकिफ है, इसलिये उसने जो भी कुछ करना होगा अपने हिसाब से ही करेगी। इस हालात को देखते हुए पीडि़त अपनी जातिय खाप पंचायत की शरण में पहुंच गया है। खाप पंचायत ने जींद के दनोदा गांव में बिनैन खाप की महा पंचायत बुलाकर सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम मंगलवार को दे दिया है। इसके बाद महापंचायत अपना अगला कदम उठाने पर विचार करेगी।