जिला सैनिक,अर्धसैनिक बोर्ड कार्यालय बना अय्याशी का अड्डा डीसी के आदेश के बावजूद दफ्तर नहीं आता कल्याण अधिकारी

जिला सैनिक,अर्धसैनिक बोर्ड कार्यालय बना अय्याशी का अड्डा डीसी के आदेश के बावजूद दफ्तर नहीं आता कल्याण अधिकारी
March 08 11:42 2023

रीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण एवं उन्हें तरह-तरह की सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये जि़ला सोल्जर, सेलर, एयरमैन बोर्ड के नाम से हर जि़ले में कार्यालय बनाये गये थे। इसका मुख्य अधिकारी सेक्रेटरी कहलाता था जो सेना से सेवानिवृत कैप्टन अथवा मेजर रैंक का हुआ करता था। अब इस कार्यालय का नाम भी बदल दिया गया है और सेके्रटरी का पदनाम भी बदल कर कल्याण अधिकारी रख दिया गया है। जिलों के अतिरिक्त इसका राज्यस्तरीय मुख्यालय पंचकूला में स्थित है। जहां इसका मुख्य अधिकारी ब्रिगेडियर रैंक का होता है।

फरीदाबाद में इसका भव्य कार्यालय सेक्टर 16 में करीब 40 साल पूर्व बनाया गया था। भूतल पर कार्यालय, भोजन कक्ष तथा छोटा सा मीटिंग कक्ष है। ऊपरी मंजिल में 10 कमरे बतौर रेस्ट हाउस के बनाये गये हैं। कार्यालय के मुखिया यानी वेलफेयरअधिकारी को वाहन भी दिया गया है। इसके द्वारा वह प्रतिमाह 2000 कि.मी. तक अपने क्षेत्र में दौरे कर सकता है। लेकिन बीते कई सालों से वेलफेयर अधिकारी का पद खाली पड़ा है। वैसे तो यही एक नहीं राज्य भर के 14 अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। कर्नल अमन यादव जो गुडग़ांव के कल्याण अधिकारी हैं उन्हीं को फरीदाबाद व कुछ अन्य जि़लों का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। यहां का सरकारी वाहन भी उन्हीं के कब्जे में होने के बावजूद वे यहां कभी नहीं आते। उनकी लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए उपायुक्त विक्रम ने 29 नवम्बर 2022 को डाक निकालते वक्त अपने हाथ से टिप्पणी लिखी थी कि वे सप्ताह में दो बार अवश्य कार्यालय में आया करेंगे और उनसे मिल कर भी जाया करेंगे। लेकिन इसके बावजूद ढाक के वही तीन पात।
कार्यालय के मुखिया के हाजिर रहने से यहां के बाबू क्या करते होंगे उसका तो पता नहीं परंतु अधिकारी के न रहने से यहां जो गुंडागर्दी व गदरफंड चल रहा है वह निहायत ही शर्मनाक एवं दुखदायी है। अपने किसी भी काम के लिये आने वाले भूतपूर्व फौजी को यहां बहुत ही प्रताडि़त एवं परेशान होना पड़ता है। कर्मचारी अ$फसर दफ्तर से नदारद रहते हैं। लगभग तमाम कामों के लिये अधिकारी कर्नल अमन के दस्तखत आवश्यक होते हैं। जिसके लिये उन्हें गुडग़ांव जाना पड़ता है। इस जाने-आने के खर्च के नाम पर ये बाबू लोग सम्बन्धित लोगों से अच्छी-खासी वसूली करते हैं। रामफल नामक एक बाबू तो सारा दिन शराब के नशे में ही दफ्तर के एक कमरे में सोया रहता है।

इससे भी शर्मनाक हालत तो फौजियों के विश्राम के लिये बने रेस्ट हाउस की है। इसको एक प्रकार के वेश्यालय एवं शराब खाने का रूप दे दिया गया है। यहां हर शाम विभिन्न ‘जोड़ों’ की महफिलें सजती हैं जिसमें शराब के दौर भी खुलकर चलते हैं। यह सारा धंधा दफ्तर के बाबूओं व चौकीदार आदि की मिलीभगत से चलता है।

सरकारी भवन होने के नाते इसे उक्त अवैध धंधों के लिये पूरी तरह से सुरक्षित समझा जाता है। जाहिर है कि ऐसे में, इसका इस्तेमाल करने वाले भाड़ा भी दिल खोल कर देते हैं। कुल मिला कर रेस्टहाउस की हालत ऐसी बना दी गई है कि कोई सही ढंग का शरीफ आदमी यहां ठहर नहीं सकता।

दफ्तरी बाबूओं को दफ्तर में बैठाये रखने के लिये सरकार ने बायोमिट्रिक हाजिरी का नियम बनाया है परन्तु इस दफ्तर के बाबूओं ने अपने आप को इससे भी मुक्त कर रखा है और कोई पूछने वाला नहीं है। नाममात्र को एक हाजिरी रजिस्टर जरूर बना रखा है जिसकी जांच व पुष्टि करने वाला कोई अधिकारी नहीं है। ऐसे में यह रजिस्टर भी फर्जीवाड़ा बनकर रह गया है। जिसका जब चाहे इसमें हाजिरी लगा ले, कोई पूछने वाला नहीं है। दफ्तर में आने वाले कागजात एवं डाक आदि को रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। पूरे दफ्तर में अफरा-तफरी का माहौल होने के चलते यहां आने वाले भूतपूर्व फौजियों को किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल पाती।

बेशक यहां के तमाम बाबू भी पूर्व फौजी ही हैं इसके बावजूद दफ्तर में आने वाले पूर्व फौजियों के प्रति इनके मन में उनके प्रति कोई संवेदना नहीं है। हर काम के लिये इन्हें पैसे चाहिये। अक्सर देखा गया है कि आने वाले पूर्व फौजियों को पास में ही बनी सीएसडी कैंटीन से शराब तथा अन्य सामान मंगवाया जाता है, इसके बाद ही उनका कोई काम हो पाता है। एक और मजे की बात तो यह है कि कर्नल अमन यहां कभी दर्शन तो देते नहीं, उसके बावजूद उनके द्वारा दफ्तर के वाहन का पूरा इस्तेमाल हो रहा है।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles