back to homepage

विश्लेषण

ट्रेड यूनियन आंदोलन की आखिर जरूरत क्या है? सरकार यूनियन बनाने क्यों देती है? उसे चलने क्यों देती है?

सतीश कुमार (सम्पादक, मजदूर मोर्चा)   जैसा कि पिछले अंकों में लिखा जा चुका है कि औद्योगिक मज़दूरों ने संगठित होकर एक बड़े सशक्त ट्रेड यूनियन आन्दोलन को बुलंदियों पर

Read More

राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, सुनील दत्त, विनोद खन्ना, जयाप्रदा समेत कई दिग्गज सितारे राजनीति में अपने हाथ जलाकर लौट गए हैं, कंगना का भी एक और प्रयोग सही

यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)   मुम्बई में यह हफ्ता रोमांचकारी रहा। लोग झूठ नहीं कहते हैं कि फिल्मों में राजनीति से ज्यादा चकाचौंध है। लेकिन इस रोमांच

Read More

70-80 के दशक में मज़दूर नेता को पालना ज़्यादा महंगा नहीं था

  सतीश कुमार (संपादक मजदूर मोर्चा)   मालिकान की हल्की सी मुस्कुराहट के साथ छोटी-मोटी मेहरबानी के तौर पर नेता के कहने अच्छी मशीन पर लगा देना, छोटी-मोटी पदोन्नति कर

Read More

डॉ कफील खान क्या आप वाकई राजनीति में आना चाहते हैं?

यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)  सात महीने तक जेल में अवैध रूप से रखे जाने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर डॉ. कफील खान यूपी की

Read More

नेशनल पुलिस अकादमी के निदेशक ने कश्मीर पर जो कहा, क्या देशहित में मोदी सरकार उसे सुनेगी?

कश्मीर में राष्ट्र्रवादी पाटों की चक्की में पिस रही है कानून-व्यवस्था   विकास नारायण राय (पूर्व डायरेक्टर, नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद)  रणनीति का तकाजा होता है कि जब विपक्षी पर

Read More

“शुद्र का नाम ऐसा होना चाहिए कि उसे सुन कर ही हिकारत का भाव आये।”

कथा मनु और मानव धर्मशास्त्र की प्रभात कुमार बसंत मानव धर्म शास्त्र को मनुस्मृति के नाम से भी जाना जाता है। आजकल जब हिंदुत्व की चर्चा होती है तो कई

Read More

लश्कर-ए-मीडिया पर चला दो बुलडोजऱ!

यूसुफ किरमानी मुंबई के पत्रकार मित्र उमा शंकर सिंह ने लिखा है कि नोएडा में जितने भी न्यूज़ चैनल हैं, उनकी बिल्डिंगों पर बुलडोजऱ चला दिए जाएँ। ताकि इन चैनलों

Read More

धंधेबाज़ नेता बेचने लगे मज़दूरों को…

  सतीश कुमार कम्पनी मालिकान ने अस्सी का दशक जाते-जाते संगठित मज़दूरोंं के साथ उलझ कर राजनेताओं, पुलिस व प्रशासन के हाथों लुटने के साथ-साथ अपनी उत्पादकता व मुना$फे में

Read More

अदालत और पुलिस की बुलंदी के बावजूद न्याय की अवमानना का चलन क्यों?

  विकास नारायण राय यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने अपने समय में कहा था, “लोकतंत्र तब है जब अमीर लोग नहीं बल्कि गऱीब लोग शासक होते हैं।” जब हाल में मशहूर

Read More