डाक्टरों की जरूरत समाप्त करने के लिये निगम ने वहां के मेडिकल कॉलेज को बर्बाद करने की ठान रखी है। अपने इसी मंसूबे के तहत इन डॉक्टरों को यहां भेजा गया है।

डाक्टरों की जरूरत समाप्त करने के लिये निगम ने वहां के मेडिकल कॉलेज को बर्बाद करने की ठान रखी है। अपने इसी मंसूबे के तहत इन डॉक्टरों को यहां भेजा गया है।
March 31 10:43 2020

ईएसआईसी अस्पताल में कोरोना टैस्टिंग की दो लैब शीघ्र

फरीदाबाद (म.मो.) एनएच-3 स्थित ईएसआईसी के मैडिकल कॉलेज अस्पताल में शीघ्र ही कोरोना टैस्टिंग की दो लैब काम करने लगेंगी। उसके बाद टैस्टिंग के लिये नमूनों को रोहतक व खानपुर के मैडिकल कॉलेज में नहीं भेजना पड़ा करेगा। इससे तुरंत परिणाम मिल जायेंगे और आगे की कार्यवाही तुरंत शुरू हो पायेगी। ‘मोर्चा’ को सूचना 27 मार्च को प्राप्त हुई है जबकि 24 मार्च तक यहां के डीन डॉ. असीम दास मात्र एक लैब कहीं से जुगाडऩे का प्रयास कर रहे थे।

ऐसे में जहां भारत सरकार व उसका ईएसआई निगम आराम से चैन की बंसी बजा रहा है वहीं इस मेडिकल कॉलेज के डीन प्रयास कर रहे थे कि कोई संस्थान इन्हें सीएसआर के तहत यह मशीन बतौर दान दिला दे। करीब 40-50 लाख की जिस मशीन को प्राप्त करने के लिये डीन व्याकुल थे उसे पाने व चालू करने के लिये ईएसआई निगम में लाखों करोड़ रुपये पर कुंडली मारे बैठे अफसरों को कोई चिंता नहीं थी। चिंता हो भी क्यों उनके अपने इलाज के लिये देश की बेहतरीन से बेहतरीन सेवायें सरकारी खर्च पर उनको उपलब्ध जो हैं, गरीब मज़दूर मरता है तो मरे।

सूत्र बताते हें कि डीन ने आईसीएमआर (इन्डियन काऊंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) को अवगत कराया था कि उनके पास टैस्टिंग हेतु पूर्णतया दक्ष स्टाफ व मौलिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है केवल कुछ उपकरणों की आवश्यकता है जिनके मिलने पर उनका संस्थान कोरोना टैस्टिंग का काम पूरी दक्षता के साथ कर सकता है। इसका असर यह हुआ कि एक ओर ईएसआईसी मुख्यालय ने तुरंत उस उपकरण की स्वीकृत प्रदान कर दी तथा दूसरी ओर स्थानीय इन्डियन ऑयल संस्थान के पास भी वह उपकरण मौजूद तो था लेकिन उसे कुछ मरम्मत की दरकार थी। लिहाज़ा इन्डियन ऑयल ने तुरन्त उसकी मरम्मत करा कर मेडिकल कॉलेज को सौंपने का भरोसा दिया।

इस प्रकार जहां एक लैब के लिये तरस रहे थे वहां अब दो-दो उपकरण काम करने लगेंगे।

 

ईएसआईसी की मूर्खता का एक और नमूना

फरीदाबाद (म.मो.) एमसीआई (मेडिकल काऊंसिल ऑफ इन्डिया) की शर्तों के अनुसार अपने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फेकल्टी की संख्या पूरी करने के लिये निगम के महामूर्ख अधिकारियों ने बजाय नई भर्ती के अधिक चतुराई दिखाते हुए अपने मुंबई स्थित मेडिकल कॉलेज हस्पताल से छ: एसिस्टेंट एवं एसोसिएट प्रोफेसरों का तबादला फरीदाबाद के लिये कर दिया। ऐसा नहीं है कि वहां इन डॉक्टर (प्रोफेसरों) की जरूरत नहीं थी, हां इनकी जरूरत समाप्त करने के लिये निगम ने वहां के मेडिकल कॉलेज को बर्बाद करने की ठान रखी है। अपने इसी मंसूबे के तहत इन डॉक्टरों को यहां भेजा गया है।

मज़दूर मोर्चा’ पिछले अंकों में लिख चुका है कि मुंबई से यहां आकर ये डॉक्टर तो नौकरी करने वाले हैं नहीं। ये लोग अनमने मन से यहां पदभार तो संभाल लेंगे लेकिन टिकेंगे नहीं। ये लोग पहले तो हर तरह की छुट्टियां लेंगे, हर तरह की जुगाड़बाज़ी करके तबादला वापस कराने का प्रयास करेंगे; जब कहीं बात नहीं बनेगी तो नौकरी छोड़ भी देंगे। आज वही सब हो रहा है। यहां से वे लोग दो-चार दिन की छुट्टी पर मुंबई गये थे। इस बीच लॉक-डाउन लग गया, परिवहन व्यवस्था ठप हो गयी तो वे लोग अब बड़े मज़े से पूरे वेतन सहित छुट्टियों का लुत्फ लेते हुए निगम के मूर्ख अधिकारियों पर हंस रहे होंगे जिनमें इतनी भी अक्ल नहीं कि उनका तबादला वापस मुंबई करके वहीं उनकी सेवाएं ले लें।

इसी मूर्खता से पैदा हुई दूसरी समस्या यह है कि उन डॉक्टरों का तबादला यहां कर चुकने के बाद उन पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। अब केवल एमसीआई को दिखाने मात्र के लिये उनकी नियुक्ति यहां रहेगी। समझा जा सकता है कि इस तरह की खानापूर्ति से न तो मेडिकल कॉलेज के छात्रों को कोई लाभ होने वाला है और न ही अस्पताल के मरीज़ों को हां नई भर्ती करने से वेतन पर जो 10-15 लाख मासिक खर्च होना था वह जरूर बच जायेगा जिससे निगम के मुनाफे में जरूर बढोतरी हो जायेगी।

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Mazdoor Morcha
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