गाय से टकरा कर मरो, बच गए तो जाम में फंसो पर टोल तो देना ही होगा

गाय से टकरा कर मरो, बच गए तो  जाम में फंसो पर टोल तो देना ही होगा
March 09 17:48 2020

ग्राउंड जीरो से विवेक कुमार

भारत दुर्घटनाओं का देश है, इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। कुछ दुर्घटनाएं सरकारी आपदा की शक्ल में आती हैं तो कुछ हमारी लापरवाही से। पर एक किस्म की दुर्घटना बढती ही जा रही है देश में और वह है सड़क दुर्घटना। भारत में हर वर्ष तकरीबन डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। इन दुर्घटनाओं का सबसे अधिक कारण स्पीड है जिसे केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बिना किसी ब्रेक के बढ़ाये जाने में यकीन भी रखते हैं, वह भी सड़क पर बिना जरूरी सेफ्टी इन्तजामातों के।

ऐसा एक वाकया बीते दो मार्च को फरीदाबाद से गुडगाँव जाने वाले हरियाणा राजमार्ग पर स्थित ग्वाल  हाड़ी पुलिस चौकी के पास घटा। क्योंकि रोड एक्सीडेंट की घटनाएं बहुत आम हो चलीं है और बतौर नागरिक हमें इसकी आदत हो गई है, तो जरूरी है ‘मजदूर मोर्चा की इस जमीनी पड़ताल को आज हम अखबार वाले पत्रकार की नजर से न लिखकर, उस व्यक्ति की नजर से ही लिखें और पढ़े जो दुर्घटना में मारा गया, घायल हुआ या दुर्घटना के बाद लगे लम्बे ट्रैफिक जाम में फंसा रहा।

दो मार्च की रात 30 वर्षीय मनु और 34 वर्षीय सचिन फरीदाबाद से एक पार्टी के बाद वापस अपने घर लौट रहे थे। मनु और सचिन गुरुग्राम सेक्टर एक के निवासी हैं। सचिन की गाड़ी से फरीदाबाद पार्टी में पहुंचे ही थे कि अफवाह उड़ी, दिल्ली के बदरपुर और तुगलकाबाद में दंगे हो रहे हैं। हैरानी की बात थी कि दिल्ली पुलिस ने भी कई मेट्रो स्टेशन बंद करके अफवाह पर मोहर लगा दी। लिहाजा उन्हें रात 10 बजे फरीदाबाद से तुगलकाबाद और दिल्ली रिंग रोड पर जाने से अधिक सुरक्षित मार्ग फरीदाबाद-गुरुग्राम राजमार्ग लगा।

सैनिक कॉलोनी फरीदाबाद से निकल कर यह राजमार्ग जिस पर हरियाणा सरकार 25 रुपये एक तरफ का टोल वसूलती है, का 27 किलोमीटर लम्बा स्ट्रेच शुरू होता है। सुनसान और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ी अरावली की  हाडिय़ों के इस मार्ग पर पहली बत्ती पर गाय और सांडों का झुंड खड़ा मिला। अँधेरी सड़क पर इन जानवरों का सफेद रंग ही दोनों को बचा सका अन्यथा यदि कहीं गाढे रंग की गाय मिलती तो दुर्घटना रजिस्टर में इन दोनों का नाम आना भी तय था।

सड़क पर न ही नियमित मार्किंग; बेहतर रोशनी के अभाव के साथ-साथ न ही डीवाइडर पर नया पेंट जिससे सड़क  पर सुरक्षित चला जा सके। सामने से आती हाई बीम लाइटों से जूझते हुए जब सचिन ने बंधवारी टोल गेट पर गाडी रोकी तो ज्ञात हुआ यहाँ फास्ट टैग नहीं चलता। क्यों नहीं चलता, टोल कर्मचारी ने भरपुर बद्तमीजी का  परिचय देते हुआ कहा, खट्टर से पूछ लिओ, पैल्ले पीसे दे दे।

25 रुपये अदा करने के बाद ज्यों ही गाड़ी टोल से बाहर निकली तो पाया सड़क टूटी पड़ी है क्योंकि वहां पर एक फ्लाईओवर बनाया जा रहा है और काम सरकारी है तो कब तक बनेगा भगवान जाने। इस बीच टूटी और धूल उड़ाती सड़क पर वे ग्वाल पहाड़ी पर स्थित पुलिस चौकी पार करते हैं और एक लम्बे ट्रैफिक जाम में खुद को फंसा हुआ पाते हैं। अचानक एक गाडी वापस मुड़ती है और दूसरी तरफ की सड़क पर उल्टी दिशा में जाने लगती है। आदत के अनुसार अन्य गाडी वालों ने भी उसका अनुसरण शुरू किया और उल्टी दिशा में गाड़ी गुडगाँव की ओर ले जाने लगे। परिणामस्वरू दूसरी तरफ की सड़क भी जाम होने लगी।

फदरीदाबाद से गुडगाँव जाने वाली सड़क पर एक किलोमीटर से अधिक का जाम लग चुका था और विपरीत दिशा की सड़क पर भी जाम शुरू हो गया। इस बीच हरियाणा पुलिस के एक सिपाही ने बड़े शांत भाव से मनु को बताया, सड़क पर एक ट्रक पलट गया है और ट्रैफिक का निकलना फिलहाल असंभव है, इसलिए बेहतर होगा आप दूसरा रास्ता ले लें। चारों तरफ से गाडिय़ों से घिरे मनु और सचिन के पास वहां खड़े रहने के अलावा कोई चारा नहीं था। और वे रात 2 बजे घर पहुँच सके। इस बीच अनमनी पुलिस के सिवा राजमार्ग या टोल का कोई कर्मचारी रास्ता खुलवाता नहीं दिखाई दिया।

तो फिर दो मार्च को ऐसा क्यों नहीं किया गया जबकि घटना स्थल टोल प्लाजा से मात्र चंद मिनट की दूरी पर था। विवेक ने बताया कि दो मार्च को हुई ऐसी किसी घटना की जानकारी उनके पास नहीं है इसलिए इस बाबत हमें पेट्रोलिंग इन्चार्ज विकास से बात करनी पड़ेगी।

विकास का कहना था कि सड़क पर यदि गाय हैं तो उसमे टोल वसूलने वाली कंपनी या सरकार क्या कर सकती है, यह काम तो निगम का होना चाहिए। इसके बावजूद दफ्तर के समय में पेट्रोलिंग टीम गाय को हटा देती है पर लोग गाड़ी रोक-रोक कर जब रोटी खिलाएंगे तो गाय सड़क पर आएगी ही। इसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते।

टेलीफोनिक वार्ता में विकास ने आगे बताया कि दो मार्च की रात दुर्घटना 10:47 पर हुई, उसके तुरंत बाद हमने एम्बुलेंस और जेसीबी भेजी और 45 मिनट में जाम खुलवा दिया। जबकि सच्चाई ये है कि जाम नहीं खुला और न ही जाम खुलवाने के लिए टोल का कोई कर्मचारी वहां दिखा जैसा कि मनु और सचिन ने स्वयं अनुभव किया। विकास के मुताबिक एक बार जाम खुलवाया था पर फिर दोबारा दुर्घटना हो गई इसलिए जाम बढ़ गया। साथ ही उन्होंने कहा, दुर्घटना होने के बाद बेशक टोल की जिम्मेवारी है जल्द से जल्द दुर्घटना स्थल पर पहुंचे पर अगर कोई पुलिस या सरकारी महकमे का आदमी वहाँ आ गया तो टोल कर्मी की उसी समय जिम्मेवारी समाप्त हो जाती है।

साथ ही सड़क पर खड़ी गायों के झुण्ड और अन्य जानवरों को हटाने का काम भी हमारा नहीं है। तो क्या सड़क पर आदमी मरने के पैसे देता है, थोडा तुनकते हुए हमारे इस सवाल पर विकास ने भिनकते हुए कहा कि इस हिसाब से तो सड़क पर अपराधी चल रहे हैं तो क्या उन्हें पकडऩे की जिम्मेवारी भी हमारी ही है। हम इतना ही कर सकते हैं, पेट्रोलिंग टीम के जो तीन आदमी हैं वे रास्ता खुलवाए जब तक पुलिस न आ जाए और पेट्रोलिंग करें।

बतौर नागरिक आजकल सोशल मीडिया पर कई लोग कहते सुने जा सकते हैं कि हमारे टैक्स का पैसा फला-फला विश्वविद्यालय के बच्चों को पढ़ाने में क्यों बर्बाद किया जा रहा है। तो एक जागरूक नागरिक के तौर पर हमें यह भी पूछना चाहिए कि जिस सड़क पर चलने के हमसे जबरन 25 रु ये एक तरफ के लिए जा रहे हैं उन रास्तों पर हमें सुरक्षा और सुगम यातायात की सुविधाएँ क्यों नहीं दी जा रही?

क्यों पैसे देने के बाद भी अँधेरी सड़क पर गाय का झुण्ड हमारी जान लेने के लिए खड़ा है, और प्रशासन उनको हटाने के बजाय हमी को जिम्मेवार बना रहा है। बेशक गाड़ी वाले गाड़ी रोक कर रोटी खिला रहे हैं तो क्यों नहीं ऐसे लोगों पर जुर्माना किया जा रहा? क्यों नहीं गायों को पकड़ कर गौशालाओं तक पहुँचाया जा रहा जबकि गौमाता के लाल आजकल सरकार चला रहे हैं।

इसके साथ ही दुर्घटना होने पर टोल की जिम्मेदारी है, वह रास्ता खुलवाए और एक सुगम पैसेज की व्यवस्था जल्द से जल्द करने के साथ-साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाए। जो जाम ग्वाल पहाड़ी के पास दो मार्च की रात को लगा था उसको 30 मिनट तक लगने दिया गया और उसके बाद घायलों तक किसी मदद का पहुँच पाना ही मुश्किल हो गया।

ऐसी खबरों की आदत पाल चुके हमारे समाज को सरकारी और निजी कंपनियों की इस लूट पर सवाल के साथ-साथ यह भी पूछना चाहिए की जिस सड़क पर हमसे वसूली होती है उस पर वादे के मुताबिक सुविधाएँ क्यों नहीं मिल रहीं? और अगर नहीं मिल रहीं तो हमारा पैसा वापस दो तथा भविष्य में पैसा लेना बंद करो। जब तक हम ऐसे सवालों से सरकारों को असहज नहीं करेंगे, सडकों पर मरते रहेंगे और हमारी मौत से लगे जाम को पुलिस सायरन बजाती मंत्री की गाडी के लिए ही खुलवायेगी जो हमारे पैसोंसों से बनी इन सड़कों पर टोल भी नहीं देते।

 

 

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Mazdoor Morcha
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