एनजीटी को भी ‘मज़दूर मोर्चा की बात समझ आ गई,नगर निगम  पर लगा 1.65 करोड़ का जुर्माना अफसरों की जेब से वसूला जायेगा

एनजीटी को भी ‘मज़दूर मोर्चा की बात समझ आ गई,नगर निगम  पर लगा 1.65 करोड़ का जुर्माना अफसरों की जेब से वसूला जायेगा
February 22 06:40 2020

मज़दूर मोर्चा के  पिछले अंक में  पाठक पढ चुके हैं कि किस तरह से सैक्टर 48 के सीवेज प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने फरीदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन पर 1.65 करोड़ का जुर्माना लगाया था जिसे एमसीएफ ने तुरंत-फुरंत जमा भी करवा दिया था।

‘मज़दूर मोर्चा ने यह भी लिखा था कि इससे एमसीऍफ़ के अफसरों के ऊपर कोई असर नहीं पडऩे वाला। सुधार तो तभी हो सकता है जब ये जुर्माना सरकारी खजाने से न जाये बल्कि उन निकम्मे अफसरों की जेब से निकाला जाये जो इसके लिये जिम्मेवार हैं। लगता है कि एनजीटी के ज्ञानी न्यायाधीश को हमारी ‘मन की बात  पता चल गयी और उन्होंने ये जुर्माना एमसीएफ के ‘डाकूओं से वसूल करने के आदेश दिये हैं।

संक्षेप से किस्सा इस  प्रकार है कि फरीदाबाद के सेक्टर 48 में मार्केट बनाने के लिये छोड़ी गयी ज़मीन में पानी भर जाता है। 2016 में ‘हुडा से सेक्टर नगर निगम को चला गया लेकिन समस्या ज्यों की त्यों रही। आखिर में जब सेक्टर की आर.डब्लू.ए. व जन कल्याण समिति, समस्या के निदान के लिये, नगर निगम व ‘हुडा के चक्कर काटकर थक गयी तो उन्होंने एनजीटी में केस डाल दिया। एनजीटी ने नगर निगम पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया और एक महीने के अंदर अधिकारियों को सेक्टर में जल भराव की समस्या का समाधान करने के लिये योजना बनाने को भी कहा।

नगर निगम ने उक्त जुर्माना भरने में जरा भी देर नहीं लगाई क्योंकि पैसा जनता की जेब से जाना था। अब क्योंकि पैसा जनता की जेब से गया था इसलिये निगम अधिकारियों ने कोई सबक नहीं सीखा। इसके चलते  पर्यावरण विभाग ने फिर से नगर निगम पर एक करोड़ पन्द्रह लाख का जुर्माना लगा दिया। इस जुर्माने को भरने में भी निगम अधिकारियों ने कोई देर नहीं लगाई। लेकिन अब एनजीटी के आदेशानुसार इन अफसरों को जेब से  पैसा भरना पड़ेगा तो अगला जुर्माना लगने से बचा जा सकेगा।

बताया जाता है कि 22 जनवरी को सुनाये अपने आदेश में अब एनजीटी ने सरकार से कहा है कि वह इस जुर्माने की वसूली सम्बंधित अधिकारियों से करे। इसके लिये 38 अधिकारियों की सूची बनायी गयी है जिनमें पांच तो चीफ इन्जीनियर हैं या रह चुके हैं। इनके नाम डी. आर भास्कर, ओ.पी गोयल, बी.एस सिंगरोहा आदि हैं। दीपक किंगर जो ‘जो स्मार्ट सिटी  प्रोजेक्ट में च$फ इन्जीनियर बन कर गये हुये हैं उनका भी इस सूची में नाम है। जो यहां इतना भ्रष्टाचार करके गये हुये हैं वो वहां जाकर शहर को क्या ‘स्मार्ट बनायेंगे ये तो राम जाने। लेकिन इस लिस्ट में निगम के लगभग सारे इंजीनियरों के नाम हैं। अगर नगर निगम 1.65 करोड़ रु ये उनकी रिटारमेंट तक भी वसूल कर पाया तो ये उसके लिये बड़ी उपलब्धि होगी।

कोर्ट ने इन अफसरों की इस काली करतूत और निकम्मेपन का जिक्र इनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी करने को कहा है ताकि इनकी अगली प्रमोशन आसानी से न हो। लेकिन भ्रष्टाचार के जिस हमाम में नीचे से लेकर ऊपर तक के सारे अफसर व नेता नंगे कूदते नहाते हों, वहां ऐसा कुछ हो पायेगा यह तो समय ही बतायेगा। अभी तो इस साहसिक आदेश के लिये एनजीटी को बधाई। हमें इन्तजार रहेगा उस समय का जब एनजीटी अपने इस आदेश को लागू करवा पायेगा क्योंकि सरकारी संत ‘श्री श्री रविसंकर पर भी दो-तीन साल पहले, यमुना पर एक कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण, एनजीटी ने जुर्माना लगाया था। लेकिन उसे वसूल नहीं कर  पाया था। क्योंकि उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने आना था तो एनजीटी ने उनके सामने पलीद कर दी थी। आशा है अब ऐसा नहीं होगा।

-अजातशत्रु

 

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