तुम गीता ज्ञान लो और हम गीता के नाम पर अज्ञानता, लूट व गन्दगी फैलायेंगे.. हरियाणा सरकार

तुम गीता ज्ञान लो और हम गीता के नाम पर अज्ञानता, लूट व गन्दगी फैलायेंगे.. हरियाणा सरकार
December 14 09:07 2019

यूरोप के चाणक्य माने जाने वाले मैकियावाली ने कभी कहा था “राजनीति में नैतिकता का कोई स्थान नहीं होता|” मैकियावाली को बिना पढ़े उसकी बात को सच साबित करने पर उतारू हरियाणा की खट्टर सरकार ने 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर तक अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन कुरुक्षेत्र जिले में किया| साथ ही हरियाणा के तमाम अन्य जिलों में भी गीता महोत्सव का आयोजन हुआ| गीता के नाम पर होने वाले इस महोत्सव की ग्राउंड जीरो छानबीन से सरकार की नीयत और समझ पर कई सवाल पैदा होते हैं|

मसलन जींद जिले में इस महोत्सव पर लोगों की भीड़ तो नदारद रही पर भाजपा सरकार ने अपनी मार्केटिंग स्टाइल का अद्भुत नमूना पेश करते हुए अश्लील नृत्य का आयोजन किया जो ज्यादा भीड़ तो नहीं खींच सका पर सोशल मीडिया पर सनसनी और लोक में संघी मानसिकता की किरकिरी का माध्यम ज़रूर बना|

फरीदाबाद के सेक्टर 12 स्थित एचएसवीपी कन्वेंशन सेंटर में इस महोत्सव का शुभारम्भ हरियाणा कैबिनेट मिनिस्टर मूलचंद शर्मा ने किया| शुभारम्भ का फीता काटने के मौके पर औपचारिक भाषण में मूलचंद शर्मा ने कहा कि कृष्ण की कर्मस्थली कुरुक्षेत्र रही है और वहीँ पर अर्जुन के माध्यम से कृष्ण ने समूचे विश्व को गीता का सन्देश दिया| शर्मा ने भी त्रिपुरा के अनोखे ज्ञान वाले मुख्मंत्री विप्लव देव की बात दोहराते हुए कहा कि संजय द्वारा महाभारत युद्ध का आँखो-देखा वर्णन धृतराष्ट्र को सुनाना उस काल खंड में इन्टरनेट होने की पुष्टि करता है| यानी ज्ञान के परदे में अन्धविश्वास परोसने की मुहिम चल रही है|

22 वर्षीय प्रवीण नागर दिल्ली के रामानुजन कालेज में एम्ए इतिहास के छात्र हैं और अपने मित्रों के साथ गीता महोत्सव में आये थे| प्रवीण से जब पुछा गया कि क्या उन्होंने कभी गीता पढ़ी है तो प्रवीण ने बताया, “भाई गीता तो धर राखी है घर में पर कदी पड्डी नहीं, हाँ भाई कालेज में गीता को देखने रोज़ जाया करूँ|” प्रवीण से पूछने पर कि क्या मूलचंद शर्मा की इस बात को वो सही मानते हैं जिसमे शर्मा ने महाभारत युग में इन्टरनेट होने की बात कही, तो प्रवीण ने कहा बिलकुल ये बात शत प्रतिशत ठीक है| अगर इन्टरनेट नहीं था तो कैसे संजय बैठा-बैठा देख रहा था सब? सोचिये, अन्धविश्वास मुहिम की ऐसी सफलता!

प्रवीण के साथ ही उनके 23 वर्षीय दोस्त नरेश जो आईपी यूनिवर्सिटी से वकालत कर रहे हैं, ने कहा कि कृष्ण ने जब अपना विकराल रूप धारण किया था तब सिर्फ और सिर्फ अर्जुन ही उसे देख-सुन सकता था| ऐसा किस तकनीक से संभव हो सका, इस सवाल पर नरेश का मानना है कि ये तकनीकें हमारे वेदों में लिखी हुई हैं| प्रवीण, नरेश और उनके दो अन्य दोस्तों से ये पूछने पर कि कितने वेद हैं हमारे, कोई भी सही जवाब नहीं दे सका| यहाँ तक कि एक भी वेदों का नाम नहीं बता सका|

फरीदाबाद गीता महोत्सव में 19 वर्षीय शिखा अपने माता-पिता के साथ आयी थी| गीता उपदेश को लेकर शिखा की जानकारी इतनी थी कि ये उपदेश भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया| इस उपदेश में क्या कहा गया या किन कारणों से ये उपदेश कृष्ण ने अर्जुन को दिया इसपर शिखा लाजवाब ही रही| शिखा ने माना कि वह तो बस इस कार्यक्रम में होने वाले गीत-संगीत को देखने आयी थी|

श्रृष्टि महज 9 वर्ष की है और कक्षा पांच की छात्रा है| गीता के श्लोकों को कंठस्थ किये हुए श्रृष्टि का मानना है कि गीता हिन्दू धर्म की एक पवित्र पुस्तक है| इस पवित्र पुस्तक में क्या लिखा है इसपर श्रृष्टि ने अपने पिता की ओर देखते हुए कहा कि इसमें कृष्ण भगवान् के बारे में लिखा गया है| श्रृष्टि के भाई 6 वर्षीय ध्रुवके हाथ में गीता उपदेश की किताब थी| उसने कहा कि इसे सबसे पहले जो घर में लकड़ी वाली कुर्सी है किताबों की उस पर रख देगा| रोज़ नहा कर दीदी के साथ शाम को पुस्तक की प्रार्थना करेगा| ध्रुव के पिता नरेद्र कुमार का मानना है कि गीता में समस्त विश्व का ज्ञान छुपा है| ऐसे ही भक्ति भाव से शुरू हुए इस महोत्सव में मुख्यमंत्री से लेकर लगभग सभी पुस्तक की भक्ति करते नज़र आये| उसमे क्या लिखा है, इसकी परवाह किसी को नहीं|

अब सवाल यह है कि क्या सच में दुनिया में कोई भी एक किताब ऐसी हो सकती है जिसमे समस्त विश्व का ज्ञान समाहित हो? हाँ में जवाब कोई मूर्ख ही दे सकता है| गीता महोत्सव के माध्यम से जहाँ खट्टर सरकार युवाओं को तर्कशील बनने का एक बड़ा पैगाम दे सकती थी वहां अपनी सीमाओं के अनुसार सरकार ने युवा वर्ग को अंध-भक्ति के लिए ही प्रेरित किया| इस सरकार को असल में चाहिये भी सिर्फ और सिर्फ अंध भक्त|

इस बीच कुरुक्षेत्र में हो रहे गीता महोत्सव की बानगी ऐसी रही कि भाजपा नेता मनोज तिवारी को सांस्कृतिक गायन के लिए आमंत्रित किया गया| अट्ठारह हज़ार स्कूली छात्रों ने मंत्रो का उच्चारण करके गीनीज़ बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया| जिस देश का एक भी विश्विद्यालय पिछले पांच वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय लिस्ट में सम्मानजनक स्थान न ला सका हो उस देश के अट्ठारह हज़ार युवाओं को श्लोक कंठस्थ कर तोता रटंत तक सीमित रहने के लिए बाध्य किया जा रहा है|

फरीदाबाद में चल रहे गीता महोत्सव के समापन समारोह में केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए| गुर्जर ने गीता की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाए जाने की वकालत की| वहीं कार्यक्रम में आये कुछ आगंतुकों से जब यह पूछा गया कि क्या आप कृष्णपाल गुर्जर के गीता पर दिये इस ज्ञान से सहमत हैं कि ये विश्वव्यापी है, तो 24 वर्षीय हर्ष जो तिगाँव, फरीदाबाद के निवासी हैं ने बताया कि गीता में लिखी बात सच ही नहीं पवित्र भी है| गीता के उपदेशों को चुनौती नहीं दी जा सकती| हर्ष ने साथ ही यह भी जोड़ दिया कि कृष्णपाल ने स्वयं गीता कभी पढ़ी है या नहीं ये तो नहीं पता पर हां गुर्जर जो कह रहे हैं वो सब नाटक है; इस आदमी ने इतने अवैध काम किये हुए हैं, अब जब मंत्री बन गए हैं तो मंच पर से जो चाहें बोल दें|

44 वर्षीय रामबीर शौकंद महोत्सव में गीता की प्रति खरीदने के उद्देश्य से आये थे| मंत्रियों और अन्य राजनैतिक लोगों का भाषण सुन शौकंद ने कहा कि गीता पर किसी को बोलने की क्या आवश्यकता है, जिसे पढनी है मेरी तरह खरीद ले और पढ़ ले| अब ये नेता जो हर मिनट पाप करते हैं गीता पर प्रबचन दें तो काहे का गीता महोत्सव बचा भाई|

खैर सरकार का गीता महोत्सव 8 दिसम्बर को संपन्न हुआ| इसी बीच हिसार के रहने वाले राहुल सहरावत ने आरटीआई द्वारा हरियाणा सरकार से महोत्सव पर होने वाले खर्च का हिसाब माँग लिया था| जवाब में 4.2 करोड़ रुपये का हिसाब दिया गया जबकि खर्च 15 करोड़ रुपये बताया गया है| बाकी पैसों का हिसाब क्यों नहीं दिया गया इसका कोई भी कारण नहीं बताया गया|

भाजपा सांसद हेमामालिनी को 15 लाख एवं भाजपा सांसद मनोज तिवारी को 10 लाख सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के लिए बतौर कलाकार दिए गए| विदेशी आगंतुकों के आवगम पर 5 लाख खर्च किये वहीं विदेशी मेहमानों के हवाई टिकट पर भी 15 लाख का खर्च बताया गया है| कुरुक्षेत्र ब्रह्म सरोवर के जीर्णोधार पर 1.11 करोड़ का खर्च आया तो मुख्यमंत्री विजिट एवं परिक्रमा के साथ-साथ फूलों व कृत्रिम रौशनी पर भी 2.50 करोड़ रुपये खर्च किये गए|

उपरोक्त धनराशि किसी भी सरकारी मेले में खर्च होने वाली आम राशि जैसी ही प्रतीत होती है| परन्तु क्योंकि महोत्सव सरकारी है तो कुछ फ़िज़ूल दिखना ही चाहिए| गौरतलब है कि भगवत गीता की 10 प्रतियां जो विशेषरूप से वीवीआईपी को देने के लिए रखी गईं थीं उनकी कीमत 3.8 लाख है| एक प्रति की कीमत लगभग 38000 रूपए|

इस दाम पर खरीदने से क्या गीता में छुपा विश्वज्ञान कुछ अलग अंदाज़ में आएगा? क्या खुद भगवान कृष्ण दिव्य रूप में गीता दर्शन बताएंगे? इन किताबों का ठेका दिया गया तन्वी स्टेशनरी को| सरकार के उप-मुख्यमंत्री ने खुद इतनी महँगी प्रतियों पर तंज़ कसते हुए शंका व्यक्त की है कि जब 200 रुपये में यही किताब उपलब्ध है तो क्या कारण है जो एक प्रति 38000 रुपये में खरीदी गयी? नेता विपक्ष भूपिंदर हुड्डा के फिजूलखर्ची के तंज़ पर खट्टर ने जवाब दिया कि बेशक ये पैसे की बर्बादी है पर हम ये बर्बादी आगे भी करते रहेंगे|

हरियाणा भाजपा सरकार ने पिछले पांच साल के अपने कार्यकाल में राज्य में एक भी विश्वविद्यालय नहीं खोला और न ही कोई अस्पताल बनाया| बेशर्मी की हद तक जा कर इन गीता महोत्सवों में सरकार ने अपनी योजनाओं की प्रदर्शनियां भी लगवाई हुई थीं| स्मार्ट सिटी के नाम की प्रदर्शनी देख कर लगभग सभी आगंतुक फरीदाबाद शहर की स्मार्टनेस का मजाक उड़ाते मिले| केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल और हरियाणा कैबिनेट मिनिस्टर मूलचंद ने यदि कभी गीता को पढ़ा होता तो या तो प्रदर्शनी हटवा लेते या फरीदाबाद को स्मार्ट शहर कहना बंद कर देते|

देश में रोज़गार का हाल जगजाहिर है| केंद्र सरकार सीएबी जैसे विभाजनकारी बिलों को लाने में मशगूल है तो राज्य की भाजपा सरकार गीता महोत्सव जैसे कार्यक्रम करवाने में| एक भी मंत्री ने अपने बच्चों को न गीता पढाई है न रामायण पर आम जनता के 18 हज़ार बच्चों को महीनो गीता के श्लोक रटवाते रहे| कहाँ तो बच्चो को तर्कशील बनाने की आवश्यकता है और कहाँ हमारे नेता और परिजन तक बच्चों को तोता रटंत में माहिर भक्त बनाने पर तुले हैं|

यदि सच में गीता का पाठ इन बच्चों ने खुले दिमाग से किया होता तो वे ज़रूर पूछते कि क्यों गीता में द्विजों की सेवा को शूद्रों का धर्म बताया गया है| क्यों स्वयं भगवान् ने अपने बच्चों को जाति के आधार पर बाँट दिया? कर्म करो और फल की चिंता न करो का ज्ञान देने वाले कृष्णपाल गुर्जर से पूछते ये नौजवान की कौन सा कर्म है जिसे बिना फल की चिंता के किया जाता है? क्यों न एक पीएचडी किये हुए, एक स्नातक किये हुए, एक एमबीबीएस किये हुए युवा अपने रोज़गार की चिंता करें? इम्तिहान दे कर भी रिजल्ट की उम्मीद न करें? यदि ऐसे तर्कशील सवाल इन मंत्रियों से होने लगें तो करोड़ों रुपये जो इस महोत्सव के नाम पर लुटा दिए गए, वह धन जनता के कल्याणकारी कार्यों में इस्तेमाल होते|

शायद इसीलिए, खट्टर सरकार के मार्गदर्शन के लिए स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “गीता पढने से बेहतर है फुटबॉल खेलना|”

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Mazdoor Morcha
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