नशे का व्यापारी भोंडसी जेल का डिप्टी जेलर आखिर हुआ गिरफ्तार

नशे का व्यापारी भोंडसी जेल का डिप्टी जेलर आखिर हुआ गिरफ्तार
August 15 06:04 2020

क्राइम ब्रांच वाले निकले तो थे खरगोश पकडऩे, पकड़ा गया शेर

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो

गुडग़ांव पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कभी ख्वाबों-ख्यालों में भी नहीं सोचा था कि वे भोंडसी जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट धर्मबीर चौटाला को पकड़ कर लायेंगे। वह कभी भी पुलिस के संदेह के घेरे में भी नहीं रहा। यह तो एक ऐसा इत्तेफाक -था कि जाल तो बिछाया था एक खरगोशनुमा छोटे से चरस सप्लायर को पकडऩे के लिये और उसमें आकर फंस गया शेरनुमा डिप्टी जेलर।

हुआ कुछ यूं कि क्राइम ब्रांच को कुछ समय से रवि उर्फ गोल्डी नामक एक व्यक्ति के बारे में सूचना थी कि वह नशीले पदार्थों का धंधा करता है। दिनांक 23 जुलाई को मुखबिर खास ने पुलिस को सूचित किया कि आज वह ‘माल’ लेकर निकलने वाला है। पुलिस (क्राइम ब्रांच) की एक टीम अपने तरीके से स्कूटी सवार गोल्डी के पीछे लग गयी। पुलिस टीम चाहती तो उसे तुरन्त गिरफ्तार कर सकती थी परन्तु टीम को हिदायत थी कि वह उसे रास्ते में न पकड़ कर वहां पकड़े जहां यह माल सप्लाई करे। अपनी तयशुदा रणनीति के तहत गोल्डी गलियों में इधर-उधर चक्कर काटते हुए पुलिस टीम की नज़रों से ओझल भी हो गया। लेकिन पुलिस पार्टी ने हार नहीं मानी और वह जैसे-तैसे उसको खोजती हुई जेल परिसर तक पहुंच गयी। वहां जेल स्टाफ का नाका लगा था। पुलिस पार्टी ने अंधेरे में तीर चलाते हुए जेल स्टाफ से पूछा कि उनका एक स्कूटी सवार दोस्त जो उन्हें अपने साथ ला रहा था, बिछड़ गया।

हुलिया सुन कर जेल स्टाफ ने बताया कि वह तो अभी-अभी डिप्टी साहब के निवास पर गया है। कुछ देर पहले डिप्टी साहब खुद नाके पर आकर कह गये थे कि ऐसा-ऐसा एक आदमी उनसे मिलने आयेगा, उसे रोका न जाय।

बस फिर क्या था, पुलिस टीम ने अपने आला अफसरान को सूचित करने के साथ-साथ डिप्टी साहब के निवास की ओर कूच कर दिया। ज्योंही ये लोग डिप्टी के दरवाजे पर पहुंचे गोल्डी ‘माल’ देकर बाहर निकला उसने पुलिस वालों को पहचानते ही दुडक़ी तो लगाई लेकिन कामयाब नहीं हो सका और दबोचे में आ गया। उसके बताने पर डिप्टी का दरवाजा खटखटाया जो उसने काफी हीलो-हुज्जत के बाद खोला। थोड़ी नाटकबाज़ी करने के बाद डिप्टी ने करीब 120 ग्राम चरस अपने घर से बरामद करा दिया।

डिप्टी के पकड़े जाने तक क्राइम ब्रांच के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गये। गोल्डी पर जहां केवल एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया वहीं डिप्टी के खिला$फ एनडीपीएस के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा भी लगाई गयी। अपनी कार्रवाई को पुख्ता करने के लिये पुलिस ने वहीं मौके पर अन्य दो डिप्टी जेलरों साजिद खान व दिनेश को भी बुला कर उनके सामने बरामदगी दिखाई और उन्हें भी गवाह बना लिया। गोल्डी पहले इसी जेल में बंद रह चुका था और उसी दौरान चौटाला से उसकी ‘कारोबार’ सम्बन्धी दोस्ती हुई थी।

गुडग़ाव पुलिस के लिये जहां यह एक बड़ी पकड़ थी वहीं हरियाणा के जेल विभाग में पनप रहे भ्रष्टाचार का खुलासा भी है। आये दिन विभिन्न जेलों से मोबाइल फोन व नशीले पदार्थ पकड़े जाने की खबरों के साथ-साथ जेलों में होने वाली अनेक वारदातों की चर्चा होती है; लेकिन उसके लिये केवल कैदियों को दोषी ठहरा कर मामले को र$फा-द$फा कर दिया जाता है जबकि हकीकत में जेल में जो कुछ भी होता है वह जेल अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। संदर्भवश सुधी पाठक जान लें कि जेल में प्रवेश करने से पूर्व सभी जेल कर्मचारियों की तलाशी होती है जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। इस तलाशी से केवल जेल सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट व डॉक्टर को ही छूट होती है।  मतलब स्पष्ट है-कि कोई भी अवैध वस्तु भीतर जायेगी तो इन अ$फसरों के द्वारा अथवा उनके निर्देश पर ही भीतर जा पायेगी।

डिप्टी जेलर धर्मबीर चौटाला दलित वर्ग से आता है। पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के गांव चौटाला का रहने वाला है। वर्ष 2002 में जब ओपी चौटाला सीएम हुआ करते थे, तभी देवी लाल परिवार की सि$फारिश पर इसे जेल महकमे में बतौर असिस्टेंट जेलर नियुक्ति मिली थी, इस से यह भी स्पष्ट होता है कि इस देश की राजनेताओं की पसंद कैसे लोग होते हैं। जानकार बताते हैं कि इसके काले कारनामों का इतिहास काफी पुराना है। कई बार निलम्बित व एक बार बर्खास्त तक हो चुकने के बावजूद तिकड़मबाज़ी के जरिये यह नौकरी में बहाल होता रहा है।

इतना सब कुछ होने के बावजूद भ्रष्ट एवं निकृष्ट राजनीतिक व्यवस्था होने के चलते यह डिप्टी अधिकतर भोंडसी व नीमका जैसी बड़ी जेलों में ही तैनाती पाता है। विदित है कि जितनी बड़ी जेल होगी, जेल स्टाफ की उतनी ही अधिक लूट कमाई होगी और एनसीआर यानी दिल्ली के आस-पास वाले क्षेत्र में तो और भी बल्ले-बल्ले है। मनमर्जी की बढिय़ा तैनातियां पाकर मोटी लूट कमाई के दम पर धर्मबीर चौटाला बहुत जल्द पदोन्नत होकर जेल सुपरिटेंडेंट भी बनने वाला था; परंतु इस शिकंजे में फंसने के बाद सब कुछ बर्बाद हो गया। यही नहीं लूट कमाई का जहर उसके बेटे की नसों में भी इस कदर समा गया था कि उसने नशे में एक वीडियो बना कर वायरल कर दिया जिसमें कहा गया था कि यदि उसके पिता को जेल में बंद करेंगे तो वह जेल को ही उड़ा देगा। जेल तो खैर क्या उडऩी थी, हां वह जरूर ‘उडक़र’ नीमका जेल में बंद हो गया जबकि उसका पिता खुद भोंडसी जेल में बंद है।

view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles